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खुले में लैपटाप रखने को मजबूर, नेटवर्क से भी व्यापारी परेशान
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कृषि उत्पादन मंडी समिति को हाईटेक करने के लिए ऑनलाइन तो कर दिया गया, लेकिन गल्ला व्यापारी व आढ़तियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रक्रिया का प्रशिक्षण न दिए जाने से भी दिक्कत आ रही है।
नवीन मंडी को पिछले माह ऑनलाइन कर दिया गया था।
आढ़तियों के हाथ से बने बिल वाउचर निरस्त कर दिए गए थे। मंडी कर्मचारियों को प्रवेश पर्ची व गेटपास ऑनलाइन काटना पड़ रहा है। मंडी में कुल 38 गल्ला आढ़ती हैं जबकि दुकानें 24 ही हैं। 14 आढ़तियों का माल खुले में या तिरपाल के सहारे रहता है। उन्हें लैपटॉप व कंप्यूटर खुले में रखने पड़ रहे हैं।
मंडी में नेटवर्क की भी बड़ी समस्या है। इससे साइट ठीक से नहीं चल पाती है। इससे बिक्री वाउचर व बिल काटने में घंटों लग जाते हैं।
आढ़ती सुनील गुप्ता ने बताया कि किसान द्वारा लाए गए अनाज का बिक्री वाउचर (6-आर) काटा जाता है। इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। जब बीच में साइट बंद हो जाती है तो नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है।
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आढ़ती जब माल बाहर की मंडियों में बेचने के लिए भेजते हैं तो 9-आर काटने के लिए भी यही समस्या आ रही है। किसानों का कहना है कि हाथ से कटी बिक्री की रसीद तो तुरंत मिल जाती थी लेकिन नई व्यवस्था में कंप्यूटर की रसीद समय पर नहीं मिल पाती है।
आढ़ती संघ के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि मंडी में नई दुकानें बनवाई जाएं जिससे दुकान विहीन लोगों को भी दुकान मिल सके। इसके बाद वे अपना माल व कंप्यूटर सुरक्षित रख पाएंगे।
इसके साथ ही मंडी अधिकारी सभी आढ़ती व कर्मचारियों को नई व्यवस्था की तकनीकी जानकारी व उसका अभ्यास कराने के प्रशिक्षण की व्यवस्था करें। उच्च स्तर की वाईफाई सुविधा मंडी में उपलब्ध हो।
‘नई व्यवस्था के कारण जो समस्याएं हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश के अनुसार प्रयास होगा। नई दुकानों का प्रस्ताव भेजा गया है।’
डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, मंडी सचिव
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नवीन मंडी को पिछले माह ऑनलाइन कर दिया गया था।
आढ़तियों के हाथ से बने बिल वाउचर निरस्त कर दिए गए थे। मंडी कर्मचारियों को प्रवेश पर्ची व गेटपास ऑनलाइन काटना पड़ रहा है। मंडी में कुल 38 गल्ला आढ़ती हैं जबकि दुकानें 24 ही हैं। 14 आढ़तियों का माल खुले में या तिरपाल के सहारे रहता है। उन्हें लैपटॉप व कंप्यूटर खुले में रखने पड़ रहे हैं।
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मंडी में नेटवर्क की भी बड़ी समस्या है। इससे साइट ठीक से नहीं चल पाती है। इससे बिक्री वाउचर व बिल काटने में घंटों लग जाते हैं।
आढ़ती सुनील गुप्ता ने बताया कि किसान द्वारा लाए गए अनाज का बिक्री वाउचर (6-आर) काटा जाता है। इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। जब बीच में साइट बंद हो जाती है तो नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है।
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आढ़ती जब माल बाहर की मंडियों में बेचने के लिए भेजते हैं तो 9-आर काटने के लिए भी यही समस्या आ रही है। किसानों का कहना है कि हाथ से कटी बिक्री की रसीद तो तुरंत मिल जाती थी लेकिन नई व्यवस्था में कंप्यूटर की रसीद समय पर नहीं मिल पाती है।
आढ़ती संघ के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि मंडी में नई दुकानें बनवाई जाएं जिससे दुकान विहीन लोगों को भी दुकान मिल सके। इसके बाद वे अपना माल व कंप्यूटर सुरक्षित रख पाएंगे।
इसके साथ ही मंडी अधिकारी सभी आढ़ती व कर्मचारियों को नई व्यवस्था की तकनीकी जानकारी व उसका अभ्यास कराने के प्रशिक्षण की व्यवस्था करें। उच्च स्तर की वाईफाई सुविधा मंडी में उपलब्ध हो।
‘नई व्यवस्था के कारण जो समस्याएं हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश के अनुसार प्रयास होगा। नई दुकानों का प्रस्ताव भेजा गया है।’
डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, मंडी सचिव