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कटरी तौफीक में पांच झोपड़ियां बहीं
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 13 Jul 2015 11:31 PM IST
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एक दिन बाद ही अचानक गंगा नदी के बढ़े जलस्तर से कहर बरपना शुरू हो गया।
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सोमवार को ग्राम सभा कटरी तौफीक में 5 ग्रामीणों की झोपड़ियां बाढ़ में बह
गईं। कुछ पीड़ित तो गृहस्थी का सामान भी नहीं निकाल सके। तहसीलदार ने मौके
पर पहुंचकर प्रधान को निर्देश दिए कि बाढ़ पीड़ितों को ऊंचे स्थान पर ले
जाने की व्यवस्था करवाएं।
एक दिन पहले ही गंगा नदी का जलस्तर घटने से ग्राम सभा कटरी तौफीक के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी, पर सोमवार सुबह अचानक जलस्तर बढ़ने से गांव में बाढ़ का पानी घुस आया। सुबह 8 बजे बाढ़ का पानी गांव में घुसने से गिरीशचंद्र, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र, रामराज, और रामानंद की झोपड़ियां बह गईं। कई लोग तो अपना गृहस्थी का सामान भी नहीं निकाल
सके। नरसिंह और रिंकू ने बताया कि उनकी झोपड़ियां गांव के कुछ अंदर पड़ी हैं। बाढ़ का पानी घुसने से वह लोग ट्रैक्टर-ट्राली पर झोपड़ियों और गृहस्थी के सामान को लादकर ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं। गिरीशचंद्र ने बताया कि वह परिवार के साथ सुबह खेत में काम कर रहे थे। अचानक बाढ़ का पानी गांव में घुस आया। जब तक वह लोग घर पहुंचते, तब तक उनकी झोपड़ी
गृहस्थी समेत बह गई । अब परिवार समेत ऊंचे स्थान पर रहेंगे जाकर। गिरीशचंद्र ने बताया कि उनका 10 बीघा खेत, नरसिंह का 11 बीघा और रामानंद का पांच बीघा खेत बाढ़ से कट गया है। जमुना देवी ने अपने कच्चे मकान की ईंटों को निकालना शुरू कर दिया है। बाढ़ की सूचना मिलने पर तहसीलदार विनोद जोशी, लेखपाल रामानंद पांडेय और प्रधान गोपीनाथ मौके पर पहुंचे। तहसीलदार ने प्रधान को निर्देश दिए कि वह बाढ़ पीड़ितों को ऊंचे स्थान पर पहुंचाने का प्रबंध करें।
एक दिन पहले ही गंगा नदी का जलस्तर घटने से ग्राम सभा कटरी तौफीक के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी, पर सोमवार सुबह अचानक जलस्तर बढ़ने से गांव में बाढ़ का पानी घुस आया। सुबह 8 बजे बाढ़ का पानी गांव में घुसने से गिरीशचंद्र, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र, रामराज, और रामानंद की झोपड़ियां बह गईं। कई लोग तो अपना गृहस्थी का सामान भी नहीं निकाल
सके। नरसिंह और रिंकू ने बताया कि उनकी झोपड़ियां गांव के कुछ अंदर पड़ी हैं। बाढ़ का पानी घुसने से वह लोग ट्रैक्टर-ट्राली पर झोपड़ियों और गृहस्थी के सामान को लादकर ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं। गिरीशचंद्र ने बताया कि वह परिवार के साथ सुबह खेत में काम कर रहे थे। अचानक बाढ़ का पानी गांव में घुस आया। जब तक वह लोग घर पहुंचते, तब तक उनकी झोपड़ी
गृहस्थी समेत बह गई । अब परिवार समेत ऊंचे स्थान पर रहेंगे जाकर। गिरीशचंद्र ने बताया कि उनका 10 बीघा खेत, नरसिंह का 11 बीघा और रामानंद का पांच बीघा खेत बाढ़ से कट गया है। जमुना देवी ने अपने कच्चे मकान की ईंटों को निकालना शुरू कर दिया है। बाढ़ की सूचना मिलने पर तहसीलदार विनोद जोशी, लेखपाल रामानंद पांडेय और प्रधान गोपीनाथ मौके पर पहुंचे। तहसीलदार ने प्रधान को निर्देश दिए कि वह बाढ़ पीड़ितों को ऊंचे स्थान पर पहुंचाने का प्रबंध करें।