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झमाझम बारिश: बाजार में सन्नाटा, व्यापारी मायूस
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शहर के नेहरू रोड पर सुबह 11:09 बजे बाजार में पसरा सन्नाटा। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। सोमवार को सुबह से दो-तीन बार झमाझम बारिश हुई। इससे दिन भर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारी ग्राहकों का इंतजार करते रहे। कामकाजी लोग छाता लगाकर घरों से निकले। शाम के वक्त आसमान से बादल कम होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि ठिठुरन बढ़ने से लोग जल्द ही घरों में दुबक गए।
बारिश और बादली से कई दिनों से जनजीवन प्रभावित है। सोमवार को सुबह छह बजे से ही झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब 10 बजे बूंदाबांदी कम हुई। इसके बाद 12 बजे फिर एक घंटे तक काले बादल झमाझम बरसे।
दो बार हुई बारिश से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर पैदल, दोपहिया वाहन नहीं दिखे। एकाध चौपहिया वाहन दिखाई दिए। जरूरी कामकाज के लिए ही लोग घरों से छाता लगाकर निकले। बाजार में दिन भर सन्नाटा पसरा रहने से व्यापारी खासे मायूस दिखे। रोजाना कमाने-खाने वालों को दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है।
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काम न मिलने से लौट जाते हैं मायूस
त्रिपौलिया चौक पर छाता लगाए खड़े गुरसहायगंज के गांव लालपुर निवासी 62 वर्षीय श्रमिक रामकुमार ने बताया कि छह दिन से आते हैं। काम न मिलने से मायूस लौट जाते हैं। पत्नी बीमार हैं। दो वक्त की रोटी चलाना मुश्किल है।
छोटे दुकानदारों का खासा नुकसान
बूरा वाली गली निवासी पान विक्रेता उमेश चौरसिया ने बताया कि सुबह से 100 रुपये की बिक्री नहीं हुई। हम छोटे दुकानदारों का रोज कमाना और खाना होता है। बारिश में ग्राहकों के न आने से घर चलाना मुश्किल हो गया।
बिक्री न होने से मायूस
छक्का नाजिर कूंचा के मुकेश अग्रवाल की सौंदर्य प्रसाधन की दुकान है। बताया कि बिक्री हो या नहीं, खर्चे बने रहते हैं। मौसम की मार से बिक्री प्रभावित रही। इससे जरूरत भर की भी कमाई नहीं हुई।
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बारिश और बादली से कई दिनों से जनजीवन प्रभावित है। सोमवार को सुबह छह बजे से ही झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब 10 बजे बूंदाबांदी कम हुई। इसके बाद 12 बजे फिर एक घंटे तक काले बादल झमाझम बरसे।
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दो बार हुई बारिश से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर पैदल, दोपहिया वाहन नहीं दिखे। एकाध चौपहिया वाहन दिखाई दिए। जरूरी कामकाज के लिए ही लोग घरों से छाता लगाकर निकले। बाजार में दिन भर सन्नाटा पसरा रहने से व्यापारी खासे मायूस दिखे। रोजाना कमाने-खाने वालों को दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है।
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काम न मिलने से लौट जाते हैं मायूस
त्रिपौलिया चौक पर छाता लगाए खड़े गुरसहायगंज के गांव लालपुर निवासी 62 वर्षीय श्रमिक रामकुमार ने बताया कि छह दिन से आते हैं। काम न मिलने से मायूस लौट जाते हैं। पत्नी बीमार हैं। दो वक्त की रोटी चलाना मुश्किल है।
छोटे दुकानदारों का खासा नुकसान
बूरा वाली गली निवासी पान विक्रेता उमेश चौरसिया ने बताया कि सुबह से 100 रुपये की बिक्री नहीं हुई। हम छोटे दुकानदारों का रोज कमाना और खाना होता है। बारिश में ग्राहकों के न आने से घर चलाना मुश्किल हो गया।
बिक्री न होने से मायूस
छक्का नाजिर कूंचा के मुकेश अग्रवाल की सौंदर्य प्रसाधन की दुकान है। बताया कि बिक्री हो या नहीं, खर्चे बने रहते हैं। मौसम की मार से बिक्री प्रभावित रही। इससे जरूरत भर की भी कमाई नहीं हुई।