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म्यांमार की सियासत पर भारत की नजर
ब्यूरो अमर उजाला फर्रुखाबाद।
Updated Wed, 25 Nov 2015 01:01 AM IST
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म्यांमार की सियासत पर भारत की नजर है, वहां बनने वाली प्रजातांत्रिक सरकार से रिश्ते मधुर रहेंगे। पाकिस्तान अभी बैक ड्राप में है। बाकी मुल्कों से संबंध सुधारने की पहल प्राथमिकता पर है। नेपाल अपनी नाकामी का दोष भारत पर लगाकर लोगों का ध्यान बंटाना चाहता है।
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आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होना पड़ेगा। यह कहना है विदेश मामलों के जानकार एवं म्यांमार, साउथ अफ्रीका, मैक्सिको व केन्या में भारत के राजदूत रहे चुके राजीव भाटिया का।
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अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर मीडिया से बातचीत के दौरान राजीव भाटिया ने लोहाई रोड स्थित डा. रजनी सरीन के आवास पर कहा कि दक्षिण एशिया जटिल क्षेत्र है। पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल भी हो रही है। प्राथमिकता पर बाकी मुल्कों से संबंध सुधारना है। श्रीलंका, बांग्लादेश व भूटान से संबंध अच्छे हुए हैं।
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नेपाल, मालदीप व अफगानिस्तान से संबंध तनाव भरे हैं। नेपाल में मधेसी नए संविधान का विरोध कर रहे हैं। नेपाल सरकार आंदोलनकारियों का ध्यान बंटाने के लिए भारत पर दोष लगा रही। चीन नेपाल को अपने खेमे में लाने की फिराक में है।
भाटिया ने बताया कि म्यांमार प्रजातांत्रिक सरकार की ओर है। चुनाव में सू की विजय हुई है। मार्च तक सरकार का गठन हो सकता है। सेना भी सरकार के संविधान पर भरोसा जता रही है। यह अच्छा है। भारत के रिश्ते म्यांमार से बढ़िया रहेेंगे। मोदी के विदेशी दौरों पर भाटिया ने कहा कि यह जरूरी है।
भारत को बाकी मुल्कों से तकनीक, प्रोजेक्ट व इन्वेस्टमेंट मिल रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी विदेशों में बसे भारतवंशियों से रूबरू हो रहे हैं। विश्व में भारत की छवि अच्छी है। मुल्कों में भारत के प्रति विश्वास बढ़ रहा है।
आतंकवाद विश्व के लिए बड़ी चुनौती है। इससे सभी देशों को मिलकर लड़ना होगा। जरदोजी व टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार के आयात की समस्या पर राजीव ने कहा कि वह इस मामले को दिल्ली में रखेंगे।