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भूखे, प्यासे श्रमिकों के चेहरों पर घर पहुंचने की खुशी

Mon, 25 May 2020 09:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 09:42 PM IST
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Hunger and thirst made everyone suffer, forgetting to see their land
फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन पहुंचने पर उससे उतरे श्रमिक अपनी गृहस्थी के साथ ? - फोटो : FARRUKHABAD
भूख-प्यास ने किया बेहाल, अपनी जमीन देख सब भूले
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फर्रुखाबाद। गुजरात प्रांत के नाडियाड रेलवे स्टेशन से 1445 यात्रियों को लेकर चली ट्रेन सोमवार सुबह सवा नौ बजे फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन से 745 श्रमिकों को कासगंज उतारा गया। यहां 700 श्रमिक पहुंचे। इनमें 280 जिले के थे। स्टेशन पर ट्रेन को चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
एक-एक डिब्बे से श्रमिकों को दो गज की दूरी बनाते हुए उतारा गया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने थर्मल स्क्रीनिंग की। डीएम मानवेंद्र सिंह, एसपी डॉ. अनिल मिश्र ने गेट पर ही सभी बच्चों को बिस्कुट के पैकेट और लोगों को मास्क वितरित किए। इसके बाद करीब 12 बजे 51 रोडवेज बसों से करीब 70 जिलों के लिए रवाना किया गया।
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बसों पर श्रमिकों को बैठाने की व्यवस्था संबंधित नोडल अधिकारी संभाले रहे। ट्रेन से उतरे श्रमिकों ने भूखे-प्यासे होने की बात कही। लेकिन उन्हें तसल्ली थी कि, अब घर पहुंच जाएंगे तो सब ठीक हो जाएगा। चार पैसे कम कमाएं पर घर पर सुकून से परिवार के साथ रहेंगे। यहां उतरते साथ ही प्रवासी रास्ते की दुश्वारियां भूल गए। उन्हें खुशी थी कि अब अपनी धरती पर हैं।
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गैर जिलों के श्रमिकों को भोजन, पानी दिया
गैर जिलों के जो भी श्रमिक यहां से रवाना किए गए, उससे पहले सभी को भोजन उपलब्ध कराया गया। पानी की एक-एक बोतल भी दी गई। इसके बाद सभी को सकुशल घर पहुंचाने के लिए नोडल अधिकारियों से देखरेख करने की बात कही गई।
जिले के सभी श्रमिक होंगे होम क्वारंटीन: डीएम
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले के सभी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा। उन्हें अनाज भी उपलब्ध कराया जाएगा। इन्हें घरों में ही क्वारंटीन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग सभी की मानीटरिंग करेगा।
इन अफसरों ने संभाली व्यवस्थाएं
ट्रेन पहुंचने से पहले ही एडीएम विवेक श्रीवास्तव, एएसपी त्रिभुवन सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य, एसडीएम सदर अनिल कुमार, सीओ सिटी मन्नीलाल गौंड, स्टेशन अधीक्षक योगेंद्र शाक्य, आरपीएफ इंस्पेक्टर जेके सिंह आदि अधिकारी मुस्तैद रहे।
इन जिलों के सवार थे यात्री
ट्रेन में मिर्जापुर, संत रविदासनगर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर एवं वाराणसी, अलीगढ़, हाथरस, हरदोई, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, आंबेडकर नगर, अमेठी, बाराबंकी, फैजाबाद, सुल्तानपुर, एटा, कासगंज, औरैया, इटावा, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी एवं ललितपुर, बागपत,
बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, आजमगढ़, बलिया, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बस्ती, संत कबीरनगर, सिद्धार्थनगर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर एवं फर्रुखाबाद के श्रमिक शामिल रहे।
...जब राजस्व कर्मी भूल गए सोशल डिस्टेंस
ट्रेन से उतरे यात्रियों को अन्य जिलों में पहुंचाने की व्यवस्था में तहसीलदार की देखरेख में राजस्व कर्मियों को लगाया गया था। लोगों को सोशल डिस्टेंस का पाठ पढ़ाने वाले प्रशासनिक कर्मचारी, अधिकारी खुद ही एक दूसरे से सटकर खड़े दिखाई दिए।
खाली हाथ गए और लौटे भी खाली हाथ
हरदोई के थाना पचदेवरा के गांव धर्मपुर निवासी सर्वेश अपनी पत्नी, बच्चों और परिवार के 15 लोगों के साथ गुजरात के घोड़ासर खेड़ा कस्बे में दीवाली पर गए थे। वह ईंट पाथने का काम करते हैं। बोले, गए थे कुछ कमाने, मगर लौटे खाली हाथ। जो चार महीने में कमाया, वह दो महीने में खा लिया। वहीं किसी ने सहायता नहीं की। हां ट्रेन का न तो टिकट लगा और न ही खाने में एक भी पैसा खर्च हुआ। अब मजदूरी ही सहारा बनेगी।

आने को न मिलता तो भूखों मर जाते
कमालगंज के गांव गगनी निवासी अमर सिंह, दिलबाग, लालाराम, राजू, बैताल अपने बीबी-बच्चों सहित गुजरात के बड़ौदा में दो वक्त की रोटी की खातिर गए थे। वहां भट्ठे पर ईंट पाथते थे। अमर सिंह बोले, जो था वह खा लिया। वहां किसी ने सहयोग नहीं किया। हां यदि कमाया हुआ न होता, तो हम सब भूखों ही मर जाते। सोचा था कमाकर लाएंगे और घर बनवाएंगे। पर यह सपना ही रह गया, अब यहीं मेहनत करेंगे।
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