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Farrukhabad News: बीएएमएस की डिग्री पर अस्पताल फिर खुला
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प्रसूता की मौत पर अस्पताल किया गया था सील
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। शहर के मसेनी स्थित गायत्री हॉस्पिटल में एक माह पूर्व प्रसूता की मौत होने पर परिजन ने हंगामा कर गलत इलाज का आरोप लगाया था। इसके बाद तत्कालीन सीएमओ ने अस्पताल सील कर दिया। यह अस्पताल फिर खोल दिया गया।
गायत्री हॉस्पिटल में अप्रैल में कंपिल के गांव रसीदपुर निवासी महिला का ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। प्रसूता की मौत होने पर जब परिजन ने गलत इलाज व इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाकर हंगामा किया तो विभाग भी हरकत में आ गया। तत्कालीन सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने अस्पताल सील कर दिया था।
जांच में पता चला यह अस्पताल बीएएमएस के नाम पंजीकृत कराकर चलाया जा रहा था। इसी बीच एक भाजपा नेता ने डीएम से बिना डॉक्टर संचालित अस्पताल बंद करने की मांग की। पता चला कि संचालक की शिकायत पर शहर के एक जनप्रतिनिधि ने भाजपा नेता को चुप करा दिया। उधर, डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण एक सर्जन के नाम से है। हालांकि शपथ पत्र में सर्जन ने सात अन्य अस्पतालों में भी ऑपरेशन करने बात स्वीकार की है। अब सवाल उठता है कि सर्जन जब दूसरे अस्पतालों में ऑपरेशन करने जाते हैं तो मरीज किस एमबीबीएस डॉक्टर के भरोसे छोड़ दिए जाते। इस पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि बीएएमएस डॉक्टर मरीज की देखरेख व इलाज कर सकते हैं, फिर बीएएमएस डॉक्टर को एलोपैथिक इलाज करने पर रोक क्यों, इस पर वह चुप्पी साध गए।
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फर्रुखाबाद। शहर के मसेनी स्थित गायत्री हॉस्पिटल में एक माह पूर्व प्रसूता की मौत होने पर परिजन ने हंगामा कर गलत इलाज का आरोप लगाया था। इसके बाद तत्कालीन सीएमओ ने अस्पताल सील कर दिया। यह अस्पताल फिर खोल दिया गया।
गायत्री हॉस्पिटल में अप्रैल में कंपिल के गांव रसीदपुर निवासी महिला का ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। प्रसूता की मौत होने पर जब परिजन ने गलत इलाज व इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाकर हंगामा किया तो विभाग भी हरकत में आ गया। तत्कालीन सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने अस्पताल सील कर दिया था।
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जांच में पता चला यह अस्पताल बीएएमएस के नाम पंजीकृत कराकर चलाया जा रहा था। इसी बीच एक भाजपा नेता ने डीएम से बिना डॉक्टर संचालित अस्पताल बंद करने की मांग की। पता चला कि संचालक की शिकायत पर शहर के एक जनप्रतिनिधि ने भाजपा नेता को चुप करा दिया। उधर, डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण एक सर्जन के नाम से है। हालांकि शपथ पत्र में सर्जन ने सात अन्य अस्पतालों में भी ऑपरेशन करने बात स्वीकार की है। अब सवाल उठता है कि सर्जन जब दूसरे अस्पतालों में ऑपरेशन करने जाते हैं तो मरीज किस एमबीबीएस डॉक्टर के भरोसे छोड़ दिए जाते। इस पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि बीएएमएस डॉक्टर मरीज की देखरेख व इलाज कर सकते हैं, फिर बीएएमएस डॉक्टर को एलोपैथिक इलाज करने पर रोक क्यों, इस पर वह चुप्पी साध गए।
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