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ओपीडी में मरीजों की भीड़, डॉक्टर नदारद
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लोहिया अस्पताल में डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। लॉकडाउन के बाद से अभी तक लोहिया अस्पताल में ओपीडी की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पाई हैं। चिकित्सक समय से अपने कक्षों में बैठकर मरीज नहीं देखते। यही वजह है कि मरीज परेशान रहते हैं। शनिवार सुबह सवा 11 बजे डॉ. स्वास्ति बाजपेई के अलावा कोई भी चिकित्सक अपने कक्ष में नहीं था।
ओपीडी में शनिवार को 319 मरीजों ने पर्चे बनवाए। सवा 11 बजे पर्चा काउंटरों पर महिला-पुरुषों की लंबी लाइनें थीं। सबसे अधिक मरीज हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्ष के सामने थे। चाचूपुर के देवेंद्र अपने आठ साल के पुत्र शिवा को लेकर पहुंचेे। बोले, गंगा स्नान करने साइकिल से आए थे।
वापसी के समय टेंपो ने टक्कर मार दी। इससे शिवा के पैर में गंभीर चोट लग गई। इमरजेंसी गए, तो उन्होंने नाम लिखकर ओपीडी भेज दिया। अब डॉक्टर के इंतजार है। ओपीडी में न तो फिजीशियन थे और न ही बाल रोग विशेषज्ञ। हृदयरोग विशेषज्ञ भी नहीं थे। सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा के कक्ष में डॉ. स्वास्ति बाजपेई मरीजों को देख रही थीं।
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मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं। सीएमएस डा. एसपी सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की कमी हैै। जो तैनात हैं, उन्हें मरीजों को भी देखने राउंड पर जाना होता है। कई बार इमरजेंसी कॉल पर चले जाते हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि मरीजों को दिक्कत न हो।
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ओपीडी में शनिवार को 319 मरीजों ने पर्चे बनवाए। सवा 11 बजे पर्चा काउंटरों पर महिला-पुरुषों की लंबी लाइनें थीं। सबसे अधिक मरीज हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्ष के सामने थे। चाचूपुर के देवेंद्र अपने आठ साल के पुत्र शिवा को लेकर पहुंचेे। बोले, गंगा स्नान करने साइकिल से आए थे।
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वापसी के समय टेंपो ने टक्कर मार दी। इससे शिवा के पैर में गंभीर चोट लग गई। इमरजेंसी गए, तो उन्होंने नाम लिखकर ओपीडी भेज दिया। अब डॉक्टर के इंतजार है। ओपीडी में न तो फिजीशियन थे और न ही बाल रोग विशेषज्ञ। हृदयरोग विशेषज्ञ भी नहीं थे। सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा के कक्ष में डॉ. स्वास्ति बाजपेई मरीजों को देख रही थीं।
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मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं। सीएमएस डा. एसपी सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की कमी हैै। जो तैनात हैं, उन्हें मरीजों को भी देखने राउंड पर जाना होता है। कई बार इमरजेंसी कॉल पर चले जाते हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि मरीजों को दिक्कत न हो।