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Farrukhabad News: स्वास्थ्य विभाग ने फाइलों में बांट दी स्कूलों की फर्स्ट एड किट
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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों को दी जाने वाली फर्स्ट एड किट फाइलों में ही बांट दी, जमीनी हकीकत कुछ और है। शिक्षकों को पता भी नहीं कि उन्हें दवा की किट कब मिली। इस फर्जीवाड़े के खेल में सीएचसी प्रभारियों ने किट वितरण का प्रमाणपत्र भी सीएमओ को सौंपा है।
शिक्षा का व्यवसायीकरण के तहत शासन से सभी स्कूलों में बच्चों के प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। इसमें कॉटन, बैंडेज, ओआरएस, बीटाडीन ट्यूब व लोशन, पैरासीटामॉल टैबलेट आदि दवाएं शामिल हैं। इससे स्कूल में किसी बच्चे को बुखार आने या छोटी-मोटी चोट लगने पर प्राथमिक उपचार किया जा सके। जनपद में सभी सीएचसी प्रभारी व शहर के सिविल अस्पताल लिंजीगंज के अधीक्षक सीएमओ को इस बात का प्रमाणपत्र दे चुके हैं कि उनके क्षेत्र में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों के अलावा मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेजों में फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।
विधान परिषद में गुरुवार को शिक्षा का व्यवसायीकरण के संबंध में बैठक हुई थी। इसमें जिले के कुल 1702 स्कूलों में फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। यह दावे कागजों तक ही सीमित हैं। कई ब्लॉक के शिक्षकों से बातचीत की गई, फिलहाल सभी ने एक ही जवाब दिया कि स्वास्थ्य विभाग से दवा की किट उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। इससे स्वास्थ्य विभाग के दावों में फर्जीवाड़े की बू आ रही है।
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शिक्षकों से बातचीत के कुछ अंश
क्षेत्रीय सीएचसी से स्कूलों में वितरित की गई फर्स्ट एड किट के बारे में पूछने पर शिक्षक चौंक गए। कहा कि उन्हें तो जानकारी भी नहीं है। शहर के प्राथमिक विद्यालय नरायनपुर के प्रधानाध्यापक आलोक कुमार, उच्च प्राथमिक विद्यालय लिंजीगंज के प्रधानाध्यापक सुशील मिश्र, मोहम्मदाबाद प्राथमिक विद्यालय उखरा के प्रधानाध्यापक आदित्य निर्मल, मोहम्मदाबाद उच्च प्राथमिक विद्यालय पुठरी के प्रधानाध्यापक कौशल दीक्षित व बढ़पुर ब्लॉक के शिक्षक प्रदीप यादव सहित कई शिक्षकों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से फर्स्ट एड किट प्राप्त नहीं कराई गई।
सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि सभी सीएचसी प्रभारियों ने उन्हें इस बात का प्रमाणपत्र दिया है कि उनके क्षेत्र के सभी स्कूलों में फर्स्ट एड किट वितरित कर दी गई है। स्कूलों में दवा किट न भेजने के संबंध में वह सीएचसी प्रभारियों से जवाब मांगेंगे।
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शिक्षा का व्यवसायीकरण के तहत शासन से सभी स्कूलों में बच्चों के प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। इसमें कॉटन, बैंडेज, ओआरएस, बीटाडीन ट्यूब व लोशन, पैरासीटामॉल टैबलेट आदि दवाएं शामिल हैं। इससे स्कूल में किसी बच्चे को बुखार आने या छोटी-मोटी चोट लगने पर प्राथमिक उपचार किया जा सके। जनपद में सभी सीएचसी प्रभारी व शहर के सिविल अस्पताल लिंजीगंज के अधीक्षक सीएमओ को इस बात का प्रमाणपत्र दे चुके हैं कि उनके क्षेत्र में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों के अलावा मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेजों में फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।
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विधान परिषद में गुरुवार को शिक्षा का व्यवसायीकरण के संबंध में बैठक हुई थी। इसमें जिले के कुल 1702 स्कूलों में फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। यह दावे कागजों तक ही सीमित हैं। कई ब्लॉक के शिक्षकों से बातचीत की गई, फिलहाल सभी ने एक ही जवाब दिया कि स्वास्थ्य विभाग से दवा की किट उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। इससे स्वास्थ्य विभाग के दावों में फर्जीवाड़े की बू आ रही है।
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शिक्षकों से बातचीत के कुछ अंश
क्षेत्रीय सीएचसी से स्कूलों में वितरित की गई फर्स्ट एड किट के बारे में पूछने पर शिक्षक चौंक गए। कहा कि उन्हें तो जानकारी भी नहीं है। शहर के प्राथमिक विद्यालय नरायनपुर के प्रधानाध्यापक आलोक कुमार, उच्च प्राथमिक विद्यालय लिंजीगंज के प्रधानाध्यापक सुशील मिश्र, मोहम्मदाबाद प्राथमिक विद्यालय उखरा के प्रधानाध्यापक आदित्य निर्मल, मोहम्मदाबाद उच्च प्राथमिक विद्यालय पुठरी के प्रधानाध्यापक कौशल दीक्षित व बढ़पुर ब्लॉक के शिक्षक प्रदीप यादव सहित कई शिक्षकों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से फर्स्ट एड किट प्राप्त नहीं कराई गई।
सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि सभी सीएचसी प्रभारियों ने उन्हें इस बात का प्रमाणपत्र दिया है कि उनके क्षेत्र के सभी स्कूलों में फर्स्ट एड किट वितरित कर दी गई है। स्कूलों में दवा किट न भेजने के संबंध में वह सीएचसी प्रभारियों से जवाब मांगेंगे।