हॉलमार्क हो तो भी शुद्धता परखें
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फर्रुखाबाद। त्योहारी सीजन में सोना सस्ता होने से लोग यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। यही वजह है कि सराफा बाजार में खरीददारों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में सोने की शुद्धता जांचना भी जरूरी है। क्योंकि हॉलमार्क लगे सोने के गहने भी 100 प्रतिशत शुद्ध हों, यह जरूरी नहीं है। 24 कैरेट सोने के गहने में भी मिलावट हो सकती है। हो सकता है कि कोई आपको 60 प्रतिशत शुद्धता का ही सोना पकड़ा दे। यह आशंका इस वजह से ज्यादा है, क्योंकि कुछ महीने पहले लखनऊ में एक बड़े सराफा कारोबारी के यहां हॉलमार्क लेजर मशीन मिली थी। वह खुद ही अपने यहां के गहनों पर 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी का ठप्पा लगा रहा था।
दरअसल भारतीय मानक ब्यूरो में पंजीयन कराए बिना कोई भी हॉलमार्क लेजर मशीन नहीं रख सकता है। चोरी-छिपे यह मशीन हासिल करने से सोने का कारोबार करने वाले इसका दुरुपयोग करते हैं। ऐसी हॉलमार्क लेजर मशीन से यदि प्रमाणित गहने बिकेंगे तो ग्राहकों का ठगा जाना लाजिमी है। लखनऊ में दो साल पहले हुई घटना के बाद से हॉलमार्क लगे गहनों की शुद्धता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
यह भी जानें
- हॉलमार्क किए आभूषण पर पांच बेहद छोटे चिह्न बनाए जाते हैं। पहला तिकोना का निशान, जो बीआईएस का मार्क है। दूसरा मार्क अंक है, जो शुद्धता कैरेट बताता है। तीसरा मार्क हॉलमार्क करने वाले केंद्र का होता है। चौथा निशान अल्फाबेट में होता है, जो हॉलमार्किंग करने का वर्ष बताता है। पांचवां निशान सराफा कारोबारी का होता है।
- हॉलमार्क के आभूषण में कोई कमी निकलती है तो उसके खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और हर्जाना वसूला जा सकता है। इसके लिए पक्का बिल लेना जरूरी है।