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Farrukhabad News: अपहरण के बाद हत्या में तत्कालीन एसओ के साथ पुलिस अधिकारियों की रही घोर लापरवाही

Thu, 02 Apr 2026 12:28 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:28 AM IST
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Gross negligence of police officers with then SO in murder after kidnapping
अमृतपुर। ओमवीर की हत्या के मामले में तत्कालीन महिला एसओ मोनू शाक्या सहित सहित जिले के उच्चाधिकारियों ने आठ माह तक घोर लापरवाही की। इसी का नतीजा है कि हत्या के आठ माह बाद पुलिस गांव के पास उसका कंकाल बरामद कर सकी। पत्नी धर्मशिला ने दोस्त सहित छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तत्कालीन एसओ ने मुख्य आरोपी रामू यादव को पकड़ने के बाद छोड़ दिया था। यदि उससे सख्ती से पूछताछ की जाती तो मामला बहुत पहले खुल गया होता। परिजन तत्कालीन एसओ मोनू शाक्या सहित उच्चाधिकारियों पर रुपये लेकर आरोपी को छोड़ने का आरोप लगाते रहे।
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20 जुलाई 2025 को ओमवीर के घर वापस न आने पर परिजन ने दोस्त रामू से पूछताछ की थी। उसने कोई सही जवाब नहीं दिया था। इसके कारण ही परिजन को उस पर शक हो गया था। गुमशुदगी दर्ज कराने पर भी परिजन ने अनहोनी की आशंका जताई थी। थाना पुलिस ने मामले में कोई सुनवाई नहीं की। परिजन ने एसपी व एएसपी से भी गुहार लगाई पर सुनवाई नहीं हुई। परिजन ने डीआईजी, आईजी व डीजीपी से शिकायत की। तब एएसपी के आदेश पर 31 अगस्त को दोस्त रामू यादव, उसके भाई सुरजीत सहित छह लोगों पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज हो सकी थी। थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की और दूसरे दिन ही उसे छोड़ दिया था। पुलिस की इस कार्यशैली से परिजन परेशान थे। उन्होंने गोरखपुर जाकर जनता दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की। इसका भी कोई असर नहीं हुआ। ओमवीर की मां राजेश्वरी और पत्नी धर्मशिला हार मानने को तैयार नहीं हुई। वह 23 मार्च को फिर संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंच गईं। वहां धर्मशिला ने एसपी आरती सिंह के सामने रो-रोकर न्याय की गुहार लगाई। एसपी ने सीओ अमृतपुर संजय वर्मा के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश दिए। इसके बाद एसओजी आरोपी दोस्त की तलाश में जुट गई। उसे उठाकर पूछताछ की तो मामला खुलने में देर नहीं लगी। आठ माह तक नामजद आरोपी की गिरफ्तारी न होना पूरे पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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अमृतपुर की तत्कालीन थानाध्यक्ष मोनू शाक्या ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की गई थी। खोजबीन के लिए कई टीमें भी लगी थीं। ड्रोन कैमरे से भी खोजबीन कराई गई थी। पर आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य न मिलने से गिरफ्तारी नहीं की गई थी। आरोपियों से मिलीभगत व रुपये लिए जाने का आरोप गलत है।
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पूर्व प्रधान की पत्नी ने 50 से अधिक समर्थकों के साथ परिजन को धमकाया था
परिजन के अनुसार ओमवीर के अपहरण में आरोपी पूर्व प्रधान देवेंद्र यादव की पुलिस विभाग में अच्छी पकड़ है। गांव में उसकी दहशत रहती है। इसी का नतीजा है कि पुलिस ने उससे पूछताछ तक नहीं की। उसकी पत्नी गांव के ही 50 से अधिक समर्थकों के साथ ओमवीर के घर पहुंच गई थी। उसने धर्मशिला को धमकाया था कि उसके पति का नाम एफआईआर से हटवा दो नहीं तो नतीजा ठीक नहीं होगा। इसके बाद धर्मशिला ने 30 जुलाई को मोदी राठौर सेना के प्रदेश अध्यक्ष के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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