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Farrukhabad News: किराना दुकानदार ग्राहकों को नहीं दे रहे बिल
Sat, 27 Sep 2025 08:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 27 Sep 2025 08:34 PM IST
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फोटो-12, दुकानदार की ओर से जारी किया गया कच्चा बिल। संवाद
फर्रुखाबाद। शासन से खाद्य पदार्थों पर घटाई गई जीएसटी का लाभ अभी आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है। किराना दुकानदार ग्राहकों को जीएसटी बिल भी नहीं दे रहे हैं।
कच्चे पर्चे पर ही लिखे खाद्य सामग्री के भाव के हिसाब से ही भुगतान करना पड़ रहा है। पैक्ड सामग्री पर लिखी डेढ़ गुनी एमआरपी लूट पर सामान दिया जा रहा।
सरकार ने भले ही रोजमर्रा की वस्तुओं पर जीएसटी खत्म कर या घटाकर लोगों को महंंगाई से राहत देने का प्रयास किया है। फिलहाल अभी जीएसटी की घटी दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। बाजार में टूथ पेस्ट, हेयर ऑयल, बॉडीलोशन, हैंडवाश, साबुन, वॉशिंग पाउडर व टॉयलेट क्लीनर आदि सामग्री एमआरपी रेट पर ही बिक रहे हैं।
आटे का पैकेट पुराने रेट पर 290 रुपये का 10 किलो मिल रहा है। वहीं ब्रांडेड आटे के पैकेट पर एमआरपी ही सवा गुनी तक लिखी है। बाजार 340 रुपये का 10 किलो बिकने वाले आटे के पैकेट पर एमआरपी 440 रुपये लिखी है।
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कंपनियों द्वारा बढ़ाकर एमआरपी लिखने से फुटकर दुकानदार भी मनमाने दामों पर बिक्री कर रहे हैं। ग्राहकों को यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है कि दुकानदार उनसे कितना मुनाफा कमा रहा है। रिफाइंड का एक लीटर का पैकेट 160 रुपये में मिल रहा है। इसी कंपनी ने ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए 750 मिली का पैकेट 130 रुपये का बिक रहा है। धोखे में आकर ग्राहक एक लीटर का पैकेट समझकर ले जा रहे हैं।
इसके अलावा अरहर, उड़द व मूंग की दाल पुराने भाव पर 100 से 120 रुपये किलो मिल रही है। वहीं सरसों का तेल 170 रुपये लीटर बिक रहा है। कोई भी दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दे रहा है। फिलहाल खाता न बही, कच्ची पर्ची पर लिखा भाव ही सही बताया जा रहा है।
दुकानदार बोले जीएसटी का कोई फर्क नहींं
किराना दुकानदारों ने बताया कि सरकार को निर्माण कंपनियों पर लगाम लगाने की जरूरत है। उत्पादों पर एमआरपी निर्धारित करनी चाहिए। इससे लोगों को पता चल सके कि उन्हें किस भाव में सामग्री मिल रही है और उस पर कितना जीएसटी लिया जा रहा है। अभी तक पुराने भाव पर ही सभी सामग्री बेची जा रही है। एमआरपी बढ़ाकर डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दुकानदारों को जीएसटी की घटी हुई दरों पर खाद्य सामग्री बेचनी चाहिए। यदि कोई दुकानदार पुरानी दरों पर सामान बेचता है, शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता दुकानदार से जीएसटी बिल जरूर लें।
-विपिन कुमार नाग, उपायुक्त वाणिज्य कर
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कच्चे पर्चे पर ही लिखे खाद्य सामग्री के भाव के हिसाब से ही भुगतान करना पड़ रहा है। पैक्ड सामग्री पर लिखी डेढ़ गुनी एमआरपी लूट पर सामान दिया जा रहा।
सरकार ने भले ही रोजमर्रा की वस्तुओं पर जीएसटी खत्म कर या घटाकर लोगों को महंंगाई से राहत देने का प्रयास किया है। फिलहाल अभी जीएसटी की घटी दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। बाजार में टूथ पेस्ट, हेयर ऑयल, बॉडीलोशन, हैंडवाश, साबुन, वॉशिंग पाउडर व टॉयलेट क्लीनर आदि सामग्री एमआरपी रेट पर ही बिक रहे हैं।
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आटे का पैकेट पुराने रेट पर 290 रुपये का 10 किलो मिल रहा है। वहीं ब्रांडेड आटे के पैकेट पर एमआरपी ही सवा गुनी तक लिखी है। बाजार 340 रुपये का 10 किलो बिकने वाले आटे के पैकेट पर एमआरपी 440 रुपये लिखी है।
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कंपनियों द्वारा बढ़ाकर एमआरपी लिखने से फुटकर दुकानदार भी मनमाने दामों पर बिक्री कर रहे हैं। ग्राहकों को यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है कि दुकानदार उनसे कितना मुनाफा कमा रहा है। रिफाइंड का एक लीटर का पैकेट 160 रुपये में मिल रहा है। इसी कंपनी ने ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए 750 मिली का पैकेट 130 रुपये का बिक रहा है। धोखे में आकर ग्राहक एक लीटर का पैकेट समझकर ले जा रहे हैं।
इसके अलावा अरहर, उड़द व मूंग की दाल पुराने भाव पर 100 से 120 रुपये किलो मिल रही है। वहीं सरसों का तेल 170 रुपये लीटर बिक रहा है। कोई भी दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दे रहा है। फिलहाल खाता न बही, कच्ची पर्ची पर लिखा भाव ही सही बताया जा रहा है।
दुकानदार बोले जीएसटी का कोई फर्क नहींं
किराना दुकानदारों ने बताया कि सरकार को निर्माण कंपनियों पर लगाम लगाने की जरूरत है। उत्पादों पर एमआरपी निर्धारित करनी चाहिए। इससे लोगों को पता चल सके कि उन्हें किस भाव में सामग्री मिल रही है और उस पर कितना जीएसटी लिया जा रहा है। अभी तक पुराने भाव पर ही सभी सामग्री बेची जा रही है। एमआरपी बढ़ाकर डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दुकानदारों को जीएसटी की घटी हुई दरों पर खाद्य सामग्री बेचनी चाहिए। यदि कोई दुकानदार पुरानी दरों पर सामान बेचता है, शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता दुकानदार से जीएसटी बिल जरूर लें।
-विपिन कुमार नाग, उपायुक्त वाणिज्य कर

फोटो-12, दुकानदार की ओर से जारी किया गया कच्चा बिल। संवाद