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Farrukhabad News: लोहिया अस्पताल से सरकारी दवाएं गायब, बाहर से दवा लेना मजबूरी
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के जिम्मेदार भरपूर दवाएं होने का भले ही दावा कर रहे हों, मगर उनकी सूची से दर्ज दवाओं में से तमाम गायब हैं। 62 तरह की टेबलेट और कैप्सूल में से 29, 49 तरह के इंजेक्शन में से 10 नहीं हैं। यही नहीं जन औषधि केंद्र पर लंबी कतारें भी नि:शुल्क दवाएं न होने की ओर इशारा करती हैं। मरीज बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं।
ठंड के मौसम में खांसी, जुकाम, बुखार, दमा और ह्रदय रोग बढ़ रहे हैं। बच्चों, बूढ़ों और हृदय रोगियों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। डॉक्टर दवाएं लिख रहे हैं, मगर अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पातीं। लिहाजा मरीजों को पैसे खर्च करके जन औषधि केंद्र अथवा निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में शासन की ओर से उपलब्ध दवाओं की एक सूची मुख्य स्टोर के बाहर लगाई गई है। इसमें हृदय संबंधी दिक्कतों में काम आने वाली एस्पिरिन, रक्त प्रवाह को बेहतर करने वाली एटेनोलोल आदि नहीं हैं। इसी तरह डायजीपाम, डोपामाइन, डायक्लोमाइन आदि इंजेक्शन भी नहीं हैं।
डॉक्टर व दवा स्टोर कर्मियों में सामंजस्य की कमी
एक 11 साल की बच्ची को खांसी जुकाम होने पर सोमवार को बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना को दिखाया गया। डॉक्टर ने चार तरह की दवाएं लिखीं। दवा स्टोर पर दो दवाएं न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। इस मामले में संबंधित फार्मासिस्ट ने बताया कि कई बार नाम पढ़ने में नहीं आता। कुछ दवाएं अलग नाम से होती हैं, मगर साल्ट एक ही होते हैं। इससे भी दिक्कत होती है।
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-अस्पताल में सभी दवाएं कार्पोरेशन से आती हैं। यहां से डिमांड भेजी जाती है। सूची के नाम से दूसरे नाम की एक ही साल्ट वाली दवाएं भी स्टोर में होती हैं। मरीजों की जरूरत के हिसाब से दवाओं की कमी नहीं है।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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ठंड के मौसम में खांसी, जुकाम, बुखार, दमा और ह्रदय रोग बढ़ रहे हैं। बच्चों, बूढ़ों और हृदय रोगियों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। डॉक्टर दवाएं लिख रहे हैं, मगर अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पातीं। लिहाजा मरीजों को पैसे खर्च करके जन औषधि केंद्र अथवा निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में शासन की ओर से उपलब्ध दवाओं की एक सूची मुख्य स्टोर के बाहर लगाई गई है। इसमें हृदय संबंधी दिक्कतों में काम आने वाली एस्पिरिन, रक्त प्रवाह को बेहतर करने वाली एटेनोलोल आदि नहीं हैं। इसी तरह डायजीपाम, डोपामाइन, डायक्लोमाइन आदि इंजेक्शन भी नहीं हैं।
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डॉक्टर व दवा स्टोर कर्मियों में सामंजस्य की कमी
एक 11 साल की बच्ची को खांसी जुकाम होने पर सोमवार को बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना को दिखाया गया। डॉक्टर ने चार तरह की दवाएं लिखीं। दवा स्टोर पर दो दवाएं न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। इस मामले में संबंधित फार्मासिस्ट ने बताया कि कई बार नाम पढ़ने में नहीं आता। कुछ दवाएं अलग नाम से होती हैं, मगर साल्ट एक ही होते हैं। इससे भी दिक्कत होती है।
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-अस्पताल में सभी दवाएं कार्पोरेशन से आती हैं। यहां से डिमांड भेजी जाती है। सूची के नाम से दूसरे नाम की एक ही साल्ट वाली दवाएं भी स्टोर में होती हैं। मरीजों की जरूरत के हिसाब से दवाओं की कमी नहीं है।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।

पवन कुमार

पवन कुमार