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चौथे दिन धनुष भंग और सीता विवाह का बखान
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:44 PM IST
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श्रीराम कथा अमृत वर्षा के चौथे दिन धनुष भंग और सीता विवाह की कथा सुनकर
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श्रोता भाव विभोर हुए।। कथा में बताया गया कि धनुष अहंकार का प्रतीक था।
इसे तोड़ने में भगवान ने एक क्षण लगाया। पुष्प वाटिका में एक फूल तोड़ने
में पसीना आ गया। अर्थात भगवान अहंकार को क्षण मेें तोड़ देते हैं । विनय,
विनम्रता और कोमलता के वह आधीन हो जाते हैं।
सीपी ग्राउंड में श्रीराम कथा महायज्ञ समिति के तत्वावधान में शकुंतला देवी अग्रवाल की स्मृति में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन विजय कौशल महाराज ने सीता विवाह का मनोहारी चित्रण किया। पुष्प वाटिका में राम-सीता मिलन की व्याख्या करते हुए उन्हाेंने कहा कि भगवान मनुष्य को अनायास ही मिल जाते हैं। भक्ति पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है। बिना संतों की शरण में जाए भगवान से संबंध नहीं हो सकता। सीता जी भक्ति का प्रतीक हैं और शिव धनुष अहंकार का प्रतीक था।
भगवान कहते हैं कि कठोरता सदैव बीच में होती है अर्थात मनुष्य न तो बालपन में कठोर होता है और न बुढ़ापे में। कठोरता और अहंकार जवानी में जन्म लेता है उसे उसी समय तोड़ देना चाहिए। इसका संदेश भगवान ने धनुष को बीच से तोड़ कर दिया था। उनकी मंशा को सीता जी भांप गई थीं। मानस मर्मज्ञ ने कहा कि अहंकार को चढ़ाया नहीं तोड़ा जाता है। कहा कि जनक क्षत्रिय होने के बावजूद विवेक और शास्त्र को अपना दर्शन मानते थे। परशुराम ब्राह्मण होने के बावजूद शस्त्र को
अपना दर्शन मानते थे। परशुराम का दर्शन दंडात्मक था। हमारे देश में जब जब कड़े कानून बनाए गए उनको तोड़ने का जरिया पहले खोज निकाला गया। उन्होंने कहा कि यदि नीयत शुद्ध हो तो कानून का पालन कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुष्प वाटिका वैदेही की वाटिका है। इसमें भक्ति का वास है। यहां सीता का राम से मिलन हुआ था। अशोक वाटिका एक भोगी की वाटिका थी। इसमें सीता का भगवान से वियोग हुआ।
भीषण शीतलहर के बावजूद कथा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा। रविवार की कथा में प्रमुख रूप से जिला जज राजेंद्र चौधरी, सिविल जज मुन्ना सिंह, पूर्व सांसद चंद्र भूषण सिंह, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, सत्य प्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मी नरायन अग्रवाल, गिरीश चंद्र अग्रवाल,
प्रह्लाद नरायन अग्रवाल, सत्यनरायन अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, ज्योत्सना अग्रवाल, घनश्याम अग्निहोत्री, योगेश तिवारी, पियूष अग्रवाल, हरेराम अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल, नफीरी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
सीपी ग्राउंड में श्रीराम कथा महायज्ञ समिति के तत्वावधान में शकुंतला देवी अग्रवाल की स्मृति में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन विजय कौशल महाराज ने सीता विवाह का मनोहारी चित्रण किया। पुष्प वाटिका में राम-सीता मिलन की व्याख्या करते हुए उन्हाेंने कहा कि भगवान मनुष्य को अनायास ही मिल जाते हैं। भक्ति पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है। बिना संतों की शरण में जाए भगवान से संबंध नहीं हो सकता। सीता जी भक्ति का प्रतीक हैं और शिव धनुष अहंकार का प्रतीक था।
भगवान कहते हैं कि कठोरता सदैव बीच में होती है अर्थात मनुष्य न तो बालपन में कठोर होता है और न बुढ़ापे में। कठोरता और अहंकार जवानी में जन्म लेता है उसे उसी समय तोड़ देना चाहिए। इसका संदेश भगवान ने धनुष को बीच से तोड़ कर दिया था। उनकी मंशा को सीता जी भांप गई थीं। मानस मर्मज्ञ ने कहा कि अहंकार को चढ़ाया नहीं तोड़ा जाता है। कहा कि जनक क्षत्रिय होने के बावजूद विवेक और शास्त्र को अपना दर्शन मानते थे। परशुराम ब्राह्मण होने के बावजूद शस्त्र को
अपना दर्शन मानते थे। परशुराम का दर्शन दंडात्मक था। हमारे देश में जब जब कड़े कानून बनाए गए उनको तोड़ने का जरिया पहले खोज निकाला गया। उन्होंने कहा कि यदि नीयत शुद्ध हो तो कानून का पालन कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुष्प वाटिका वैदेही की वाटिका है। इसमें भक्ति का वास है। यहां सीता का राम से मिलन हुआ था। अशोक वाटिका एक भोगी की वाटिका थी। इसमें सीता का भगवान से वियोग हुआ।
भीषण शीतलहर के बावजूद कथा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा। रविवार की कथा में प्रमुख रूप से जिला जज राजेंद्र चौधरी, सिविल जज मुन्ना सिंह, पूर्व सांसद चंद्र भूषण सिंह, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, सत्य प्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मी नरायन अग्रवाल, गिरीश चंद्र अग्रवाल,
प्रह्लाद नरायन अग्रवाल, सत्यनरायन अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, ज्योत्सना अग्रवाल, घनश्याम अग्निहोत्री, योगेश तिवारी, पियूष अग्रवाल, हरेराम अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल, नफीरी गुप्ता आदि मौजूद रहे।