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Farrukhabad: डायरिया से चार बच्चों की मौत, विशेषज्ञ बोले- झोलाछापों के चक्कर में न आएं, सीधे अस्पताल ले जाएं

Fri, 05 Jul 2024 03:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Fri, 05 Jul 2024 03:05 AM IST
सार

Farrukhabad News: लोहिया जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना कहते हैं कि बच्चे के बीमार होने पर सीधे सरकारी अस्पताल ले जाएं। झोलाछापों के चक्कर में न आएं। बारिश का डायरिया गंभीर होता है। माइल्ड व एवरेज की बजाय इन दिनों बच्चे सीधे सीवियर डायरिया के शिकार होते हैं।

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Four children died of diarrhea, experts said dont fall for quacks, take them directly to the hospital
सांकेतिक - फोटो : Freepik

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले में डायरिया बच्चों के लिए जानलेवा हो रहा है। लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में 34 घंटे में चार बच्चे मृत अवस्था में लाए गए। यह सभी उल्टी-दस्त के शिकार थे। इनमें से दो के परिजनों से चंद घंटों में हजारों रुपये लेकर सांसें थमने पर निजी अस्पताल से लोहिया अस्पताल भेजा गया। ईएमओ ने कागजी खानापूरी कर बच्चों के परिजनों को मृत होने की सूचना दी, तो मातम पसर गया।

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लोहिया जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बुधवार सुबह 2:41 बजे मऊदरवाजा क्षेत्र के बीबीगंज बंदोबस्ती के अवनीश अपने 11 साल के बच्चे को लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। परिजन चीख-पुकार करने लगे। बच्चे के पिता ने बताया कि आवास विकास के निजी अस्पताल में उल्टी-दस्त के बाद मंगलवार शाम को भर्ती किया था। हालत बिगड़ने पर बाहर ले जाने की बात कह दी।
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तलैया फजल इमाम के रिहान अपनी बेटी हसीबा (12) को बुधवार सुबह तीन बजे इमरजेंसी मृत अवस्था में लेकर पहुंचे। बताया कि उल्टी-दस्त हुए और बेहोश हो गई। बृहस्पतिवार सुबह पौने आठ बजे सोता बहादुरपुर के फैयाज के पुत्र इजीजुल (3) को मृत अवस्था में लाया गया। इजीजुल के चाचा मोहम्मद ताज ने बताया कि उसे रात करीब दो बजे उल्टी-दस्त हुए। सुबह पांच बजे पास के ही एक डॉक्टर से दवा लाए, मगर आराम नहीं हुआ। पौने आठ बजे इमरजेंसी में मृत घोषित कर दिया।

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12 हजार लेकर इलाज किया, बाहर ले जाने की बात कहकर छुट्टी कर दी
दोपहर पौन बजे मऊदरवाजा के मोहल्ला ढुइया निवासी बबलू अपने पुत्र किशन उर्फ रोहन (4) को लोहिया अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बबलू ने बताया कि उल्टी-दस्त होने पर आवास विकास के निजी अस्पताल ले गए थे। वहां 12 हजार रुपये लेकर इलाज किया। अभी बाहर ले जाने की बात कहकर छुट्टी कर दी। बच्चों के परिजनों में चीख-पुकार मची रही।

सीवियर डायरिया के शिकार होते बच्चे, तुरंत मिले इलाज
लोहिया जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना कहते हैं कि बच्चे के बीमार होने पर सीधे सरकारी अस्पताल ले जाएं। झोलाछापों के चक्कर में न आएं। बारिश का डायरिया गंभीर होता है। माइल्ड व एवरेज की बजाय इन दिनों बच्चे सीधे सीवियर डायरिया के शिकार होते हैं। ऐसे में बच्चों को आयु के हिसाब से इंजेक्शन और फ्लूड दिया जाता है।

खानपान का भी रखें ध्यान
अप्रशिक्षित यहीं पर चूक कर देते हैं। उल्टी-दस्त होते ही घर में ओआरएस, इलेक्ट्रॉल देना शुरू कर दें। बोतल की बजाय कटोरी-चम्मच से दूध पिलाने और हैंडपंप का पानी गर्म करने के बाद ठंडा करके पिलाने से बीमारी नहीं होगी। सात साल से ऊपर के बच्चों को केला, दलिया, दाल देते रहने से पानी की पूर्ति होती है।

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