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ॉकडाउन की दुश्वारियां: न पैसे न दूध, पानी पिलाकर मासूम को चुप करने का प्रयास

Fri, 08 May 2020 09:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 09:12 PM IST
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Forgiveness of hunger and thirst in the joy of reaching home
घर पहुंचने की खुशी में भूले भूख-प्यास का दर्द
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फर्रुखाबाद। गुजरात के पालमपुर से स्पेशल ट्रेन 1295 श्रमिकों को लेकर फर्रुखाबाद स्टेेशन पर शुक्रवार सुबह 10.05 बजे पहुंची। इसमें फर्रुखाबाद के साथ अन्य जनपदों के भी लोग थे। लॉकडाउन में फंसे इन श्रमिकों के चेहरों पर घर जाने की खुशी के साथ वह दर्द भी था, जो उन्होंने लॉकडाउन में घर से दूर दूसरे प्रदेश में भूखे प्यासे झेला है। पर जब उनसे बात कि तो उन्होंने घर पहुंचने की खुशी के आगे वहां के दर्द को कम ही बताया।
पानी पिलाकर भूख मिटाने की कोशिश
जनपद हरदोई के पाली निवासी सोनवती पत्नी निशू अपने एक साल के मासूम बेटे आयुष को गले से लगाकर चुप करने का प्रयास कर रही थीं। दूध न होने से उसे बार-बार चम्मच से पानी पिलाने की कोशिश कर रही थी। सोनवती ने बताया कि वह पालमपुर में पति के साथ भट्ठे पर काम करती थी। लॉकडाउन में काम बंद हो गया।
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भट्ठा मालिक ने जो पैसे दिए वह बड़े बेटे के इलाज में खर्च हो गए। 480 रुपये की एक टिकट आई। गुरुवार शाम को सात बजे ट्रेन पर सवार हुए तो थोड़ा दूध था। वह रास्ते में ही बच्चे ने पी लिया। बिस्कुट भी नहीं है।
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जमा पूंजी खर्च होने से भुखमरी की नौबत
जालौन निवासी लाखन पालमपुर में पकौड़ी का ठेला लगाते थे। लॉकडाउन से काम बंद हो गया। साथ में पत्नी सोनकली व बेटी साधना भी किराए के मकान में रहते थे। मकान मालिक ने किराया वसूल लिया। जेब में कुछ नहीं बचा। सरकारी राशन भी कुछ दिन ही चल सका। भुखमरी का नंबर आ गया।
ट्रेन आने का पता चला तो किसी तरह टिकट का पैसा जुटाया और घर के लिए ट्रेन में सवार हो गए। भूखे प्यासे लाखन बताते हैं अब वह बाहर कमाने नहीं जाएंगे। स्टेशन पर भोजन का पैकेट मिला तो उनके चेहरे पर कुछ खुशी नजर आई।
एक समय ही भोजन कर संतों ने काटा समय
जिला अलीगढ़ के साधु महंत गोपालदास गिरि ने बताया कि गुजरात के हमीरगंज जिले में डूंगरपुर धूनी में आश्रम है। लॉकडाउन के बाद आश्रम में लोगों का आना बंद हो गया। आश्रम में सौ से अधिक संत रह रहे थे।राशन पानी की समस्या होने लगी। ऐसे में भगवान के भजन करते हुए संतों ने एक समय का ही भोजन किया।
ज्यादा समस्या होने लगी तो अपने गुरु का आशीर्वाद लेकर हम अपने घरों के लिए निकल आए हैं। उनके साथ में आए साधु मोहब्बत दास ने बताया कि महामारी से निपटने के लिए वह सरकार के आदेशों का पालन कर रहे हैं।
प्यासे बच्चे को कलेजे से चिपटाया
जिला कासगंज के थाना पटियाली गांव सिकंदरपुर के सुदीप की पत्नी सीमा छह माह की गर्भवती हैं। वह दर्द से ट्रेन में लेटी थीं। बेटा अनमोल खाना मांग रहा था। वह चुप नहीं हो रहा था। सुदीप ने बेटे को गोद में लेकर समझाया कि वह अपने गांव तीन घंटे में पहुंच जाएगा। इसके बाद खूब खाना व पानी मिलेगा।
घर में बाबा दादी इंतजार कर रहे हैं। जिला शाहजहांपुर के कांठ की सुनीता पत्नी धनीराम भी पांच माह की गर्भवती हैं। उसका बच्चा भी पानी के लिए रो रहा था। सुनीता बच्चे को कलेजे से चिपटाकर शांत कर रही थीं।
सूखी रोटी नमक लगाकर थमा दी
जिला शाहजहांपुर के अल्लागंज की हंतूराम की बेटी लाडली स्टेशन आने पर पानी के लिए रो रही थी। मां-बाप समझा रहे थे। जिला बदायूं के राम लखन की बेटी अंजुल खाना मांग रही थी। इस पर उसकी मां ने कपड़े की पोटली से सूखी रोटी निकाली औ र नमक लगाकर दे दी। अंजुम सब्जी मांगने लगी तो रामलखन की आंखों में आंसू आ गए।
बदायूं की गायत्री अपने बीमार बेटे आशू को गोद में लेकर तेजी से स्टेशन के बाहर जा रही थी। पूछने पर बताया कि बेटे की तबियत खराब हो गई है। घर पहुंचते ही इसको डॉक्टर को दिखाएंगी।
साढ़े चार घंटे देर से आई ट्रेन
फर्रुखाबाद। गुजरात के पालमपुर रेलवे स्टेशन से स्पेशल ट्रेन गुरुवार शाम साढ़े सात बजे रवाना हुई। इसे शुक्रवार सुबह 5.30 बजे पहुंचना था। इससे पुलिस व प्रशासन के अफसर सुबह से ही रेलवे स्टेशन पर पहुंचने लगे थे। पहले ट्रेन दो घंटे लेट बताई गई। फिर साढ़े नौ बजे आने की जानकारी मिली। इस पर बड़े अफसर चले गए। लगभग 9 बजे सभी अधिकारी आ गए लेकिन ट्रेन और लेट हो गई। ट्रेन 10 बजकर 5 मिनट पर आई। तब कहीं जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
थ्रर्मल स्क्रीनिंग के बाद निकाले गए श्रमिक व उनके परिजन
फर्रुखाबाद। ट्रेन जब प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंची तो रेलवे के दो दो कर्मचारी एक-एक बोगी के सामने खड़े हो गए। इन्होंने बोगी में बैठे श्रमिकों से खिड़कियां बद करवाकर बाहर थूकने से मना कर दिया। इंजन के पीछे वाली बोगी से सबसे पहले श्रमिकों व उनके परिजनों को उतारा गया।
प्लेटफार्म पर हर छह फुट की दूरी बने गालों में दो लाइनों में श्रमिकों व उनके परिवार के लोगों को खड़ा किया गया। इसके बाद थ्रर्मल स्क्रीनिंग कर सभी को दो-दो मास्क देकर स्टेशन के गेट के बाहर किया गया।
शिक्षक हाथों में जिले के नाम लिखी पट्टिकाएं लेकर कर रहे थे इंतजार
फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर शुक्रवार को एयरपोर्ट जैसा नजारा दिख रहा था। शिक्षक व अन्य विभाग के कर्मचारी हाथों में जिलों के नाम लिखी पट्टिकाएं लेकर खड़े थे। श्रमिकों के बाहर निकलने पर यह लोग आवाज देकर पूछ रहे थे कि वे किस जिले के रहने वाले हैं। जिले का नाम बताने पर वे श्रमिकों का बसों में पहुंचाने का काम कर रहे थे। धूप में खड़े कर्मचारी व शिक्षक कोरोना वारियर्स बनकर अपना योगदान दे रहे थे।
बसों को नगर पालिका के कर्मचारी कर रहे थे सैनिटाइज
श्रमिकों को उनके जिलों में सकुशल पहुंचाने के लिए रोडवेज बसों को शुक्रवार सुबह ही रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ा करवा दिया गया था। बसों को जहां जाना था उस जिले के नाम के पर्चे उस पर चस्पा कर दिए गए थे। श्रमिकों व उनके परिजनों के बसों में बैठने से पहले नगरपालिका के कर्मचारियों ने सभी बसों को अंदर व बाहर से पूरी तरह सैनिटाइज किया। इसके बाद ही श्रमिकों व उनके परिजनों को बसों के अंदर बैठाया गया।
धूप में नंगे पांव चले रहे बच्चे रो पड़े
फर्रुखाबाद। पंद्रह घंटे के सफर के बाद जब श्रमिकों के बच्चे स्टेशन पहुंचे तो वह भूख प्यास से बिलबिला रहे थे। सिर पर सामान की बोरी रखे माता पिता अपने कलेजों को टुकड़ों को पैदल ले जाने को मजबूर थे। बच्चे प्यास बुझाने स्टेशन पर लगे पीने के पानी के नल तक पहुंचे तो कर्मचारियों ने मना कर दिया। कहा कि स्टेशन के अंदर किसी चीज को हाथ लगाने की इजाजत नहीं है। पानी व खाने की व्यवस्था बाहर है।
बच्चे स्टेशन के बाहर आए तो वहां से बस काफी दूर थी। कुछ छोटे बच्चे नंगे पैर थे। तपती सड़क पर चल रहे बच्चे चीख पड़े। एक सिपाही ने बच्चों को गोद में लेने के लिए कहा तो मां बोली इसको गोद में ले लेंगे तो सामान कौन ले जाएगा। बसों में बैठने के काफी देर बाद खाने के पैकेट व पानी की बोतलें मिलीं। पूछने पर राजस्व कर्मियों ने बताया कि बाहर अगर भोजन बांटते तो अफरा तफरी हो जाती।
सामाजिक दूरी का पालन नहीं करवा पाया प्रशासन
पीएसी व पुलिस की तैनाती करने के बाद भी प्रशासन सामाजिक दूरी का पालन नहीं करवा पाया। रेलवे स्टेशन के बाहर निकलने के बाद श्रमिकों व उनक परिवार के लोगों की भीड़ जमा हो गई। तब तक डीएम एसपी वहां से जा चुके थे। ऐसे में कर्मचारी भी सुस्त पड़ गए और सामाजिक दूरी के बारे में जागरूक नहीं किया। श्रमिकों व उनके परिजनों को भोजन पैकेट व पानी के बोतलें देने के लिए एकत्र हुए राजस्व कर्मी भी भीड़ लगाए खड़े रहे।

इन जिलों के श्रमिकों को लेकर आई थी स्पेशल ट्रेन
बदायूं के 201, हरदोई के 113, कासगंज के 152, एटा के 12, लखीमपुर के 5, पीलीभीत के 20, शाहजहांपुर के 539, उन्नाव के 5, अमेठी का 1, वाराणसी के 4, फर्रुखाबाद के 241 लोग। स्टेशन पर आए 1295 यात्री पहुंचे।
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