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Farrukhabad News: बाढ़ से दो वक्त की रोटी के साथ पशुओं के चारे का संकट
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अमृतपुर। गंगा व रामगंगा के जलस्तर में पांच-पांच सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन रामगंगा का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर है। दोनों नदियों में उफान के चलते बाढ़ प्रभावित गांवों में कई दिनों से पानी भरा है। इससे ग्रामीणों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। घरों और गलियों में पानी भरा होने से जनजीवन पूरी तरह ठहर गया है।
पहाड़ों पर बारिश के बाद नदियों में पानी छोड़े जाने से बाढ़ का कहर लगातार जारी है। शनिवार को नरौरा बांध से गंगा में 71,051 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का जलस्तर 137.10 मीटर से घटकर 137.05 मीटर पर पहुंच गया है। गंगा की बाढ़ से अंबरपुर, बरुआ, बामियारी, कुड़री सारंगपुर, मंझा, करनपुर घाट, माखन नगला, कुसुमापुर, भाऊपुर चौरासी, सैदापुर, तीसराम की मड़ैया, उदयपुर, कंचनपुर और सबलपुर समेत कई गांव पानी से घिरे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। किसी तरह खाने का इंतजाम हो भी जाता है, लेकिन पशुओं के लिए चारे की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि पानी भरा होने से बाजार और मुख्य मार्ग तक पहुंचना मुश्किल है। बीमार लोगों को भी इलाज के लिए ले जाने में परेशानी हो रही है। लगातार जलभराव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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मंझा की मड़ैया में कई लोग बीमार हैं। नीलम नाव से बच्चे की दवा लेने के लिए अमृतपुर पहुंचीं। रामगंगा का जलस्तर सुबह 137.20 मीटर पर पहुंच गया था। शाम को पांच सेंटीमीटर की कमी होने पर 137.15 मीटर पर है। खो, हरेली व रामनगर बैराज से 6013 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में आई बाढ़ का पानी अमैयापुर पुलिया पर तेजी से बह रहा है।
गांव भावन, गुलरिया, गैहलार बजीरपुर, झंडी की मड़ैया का एसडीएम ने निरीक्षण किया। एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांव में नाव चलाई जा रही है। राशन वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम भी भेजी जा रही है।
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पहाड़ों पर बारिश के बाद नदियों में पानी छोड़े जाने से बाढ़ का कहर लगातार जारी है। शनिवार को नरौरा बांध से गंगा में 71,051 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का जलस्तर 137.10 मीटर से घटकर 137.05 मीटर पर पहुंच गया है। गंगा की बाढ़ से अंबरपुर, बरुआ, बामियारी, कुड़री सारंगपुर, मंझा, करनपुर घाट, माखन नगला, कुसुमापुर, भाऊपुर चौरासी, सैदापुर, तीसराम की मड़ैया, उदयपुर, कंचनपुर और सबलपुर समेत कई गांव पानी से घिरे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। किसी तरह खाने का इंतजाम हो भी जाता है, लेकिन पशुओं के लिए चारे की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि पानी भरा होने से बाजार और मुख्य मार्ग तक पहुंचना मुश्किल है। बीमार लोगों को भी इलाज के लिए ले जाने में परेशानी हो रही है। लगातार जलभराव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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मंझा की मड़ैया में कई लोग बीमार हैं। नीलम नाव से बच्चे की दवा लेने के लिए अमृतपुर पहुंचीं। रामगंगा का जलस्तर सुबह 137.20 मीटर पर पहुंच गया था। शाम को पांच सेंटीमीटर की कमी होने पर 137.15 मीटर पर है। खो, हरेली व रामनगर बैराज से 6013 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में आई बाढ़ का पानी अमैयापुर पुलिया पर तेजी से बह रहा है।
गांव भावन, गुलरिया, गैहलार बजीरपुर, झंडी की मड़ैया का एसडीएम ने निरीक्षण किया। एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांव में नाव चलाई जा रही है। राशन वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम भी भेजी जा रही है।