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Farrukhabad News: कांशीराम कालोनी में फिर बाढ़, बिजली-पानी ठप
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। शहर के मोहल्ला कांशीराम कालोनी में पांच दिन की राहत के बाद फिर से तीन-तीन फीट पानी भर गया। लिहाजा पेयजल और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। चार मंजिल आवासों में फंसे लोगों के लिए रोजमर्रा का सामान जुटाना मुश्किल हो गया। भूतल के करीब 500 आवासों में पानी घुसने से लोग रिश्तेदारों के घर व सड़कों के किनारे समय काट रहे हैं।
जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त तक बाढ़ से घिरने के बाद 18 दिन तक बिजली पानी ठप रहा। पांच दिन की राहत के बाद फिर से गंगा की बाढ़ का पानी कालोनी में घुस गया। इस बार पहले से अधिक पानी होने से भूतल के करीब 500 आवासों में रह रहे लोग पलायन कर गए। कई परिवारों ने जानवरों को सड़क के किनारे बांध लिया है।
यही नहीं चार-चार मंजिल आवासों में रह रहे गरीब लोगों के सामने रोजमर्रा का सामान जुटाना मुश्किल हो गया है। पूरी कालोनी में तीन से चार फीट पानी भरा है। महिलाओं और छोटे बच्चों को घरों में ही कैद होना पड़ रहा है।
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छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी चौपट
बाढ़ से घिरी कालोनी के 1296 आवासों में रह रहे सैकड़ों बच्चों का घर से निकलना बंद हो गया। कोई भी बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा है। लिहाजा उनकी स्कूली और कोचिंग की पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में उनके शैक्षिक भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है। इससे परिवार के लोग भी खासे परेशान हैं।
जनप्रतिनिधियों को वाशिंदों की नहीं है फिक्र
करीब एक माह से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे कालोनी के लोगों की किसी भी जनप्रतिनिधि ने सुधि नहीं ली है। इस दफा किसी भी समाजसेवी और नेता ने परेशान लोगों को दो वक्त की रोटी भी मुहैया कराने की जरूरत नहीं समझी जबकि चुनाव के वक्त यही जनप्रतिनिधि इन्हीं मतदाताओं को हाथों हाथ लेते हैं।
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फर्रुखाबाद। शहर के मोहल्ला कांशीराम कालोनी में पांच दिन की राहत के बाद फिर से तीन-तीन फीट पानी भर गया। लिहाजा पेयजल और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। चार मंजिल आवासों में फंसे लोगों के लिए रोजमर्रा का सामान जुटाना मुश्किल हो गया। भूतल के करीब 500 आवासों में पानी घुसने से लोग रिश्तेदारों के घर व सड़कों के किनारे समय काट रहे हैं।
जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त तक बाढ़ से घिरने के बाद 18 दिन तक बिजली पानी ठप रहा। पांच दिन की राहत के बाद फिर से गंगा की बाढ़ का पानी कालोनी में घुस गया। इस बार पहले से अधिक पानी होने से भूतल के करीब 500 आवासों में रह रहे लोग पलायन कर गए। कई परिवारों ने जानवरों को सड़क के किनारे बांध लिया है।
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यही नहीं चार-चार मंजिल आवासों में रह रहे गरीब लोगों के सामने रोजमर्रा का सामान जुटाना मुश्किल हो गया है। पूरी कालोनी में तीन से चार फीट पानी भरा है। महिलाओं और छोटे बच्चों को घरों में ही कैद होना पड़ रहा है।
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छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी चौपट
बाढ़ से घिरी कालोनी के 1296 आवासों में रह रहे सैकड़ों बच्चों का घर से निकलना बंद हो गया। कोई भी बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा है। लिहाजा उनकी स्कूली और कोचिंग की पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में उनके शैक्षिक भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है। इससे परिवार के लोग भी खासे परेशान हैं।
जनप्रतिनिधियों को वाशिंदों की नहीं है फिक्र
करीब एक माह से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे कालोनी के लोगों की किसी भी जनप्रतिनिधि ने सुधि नहीं ली है। इस दफा किसी भी समाजसेवी और नेता ने परेशान लोगों को दो वक्त की रोटी भी मुहैया कराने की जरूरत नहीं समझी जबकि चुनाव के वक्त यही जनप्रतिनिधि इन्हीं मतदाताओं को हाथों हाथ लेते हैं।