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कटरी धर्मपुर गोसदन में पांच, ट्रांजिट में एक गोवंश की मौत

Fri, 29 Nov 2019 06:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2019 06:45 PM IST
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Five in Katri Dharmpur Gosadan, one cow died in transit
कटरी धर्मपुर स्थित राजकीय गोसदन में तड़प रहे गोवंश को देखते हिंदू जागरण मंच के नेता। - फोटो : FARRUKHABAD
गोसदनों में गोवंशों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। शुक्रवार को कटरी धर्मपुर स्थित राजकीय गोसदन में पांच, जबकि ट्रांजिट हॉस्टल गोसदन में एक गोवंश की मौत हो गई। ट्रांजिट हॉस्टर गोसदन में पांच दिन में नौ गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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बेसुध पड़े सात गोवंशों की कौवों ने आंखें निकाल लीं और कुत्ते मांस नोंचकर ले गए। विभाग के जिम्मेदारों को खबर तक नहीं हुई। दोपहर में पहुंचे पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया, तो गोवंशों के पेट में 20-20 किलो पॉलिथीन निकली। चिकित्सक गोवंशों की मौत का कारण पॉलिथीन को ही बता रहे हैं।
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शहर से छह किमी दूर गंगा की कटरी में बनी पशु विभाग के कटरी धर्मपुर में बनी राजकीय गोशाला में करीब 200 गोवंश बंद हैं। इस गोसदन में शुक्रवार सुबह 12 गोवंश इधर-उधर पड़े देखे गए। तैनात पड़ोसी गांव के कर्मचारी जब पहुंचे, तो गोसदन मैनेजर प्रदीप श्रीवास्तव को सूचना दी।
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इनमें से दो गाय और तीन बछड़े दम तोड़ चुके थे, जबकि तीन गाय और तीन बछड़े तथा एक सांड़ इधर-उधर, पानी, कीचड़ मेें पडे़ तड़प रहे थे। गोसदन के अंदर घुसे कुत्ते उन्हें नोच रहे थे। कौवे आंखें निकालकर ले गए थे।
सूचना पर सुबह साढ़े 11 बजे पशु चिकित्साधिकारी डा. देवेंद्र चौधरी, डा. सत्येंद्र कुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे। नगर पालिका की जेसीबी से मरे गोवंशों को उठवाकर जंगल में पोस्टमार्टम किया गया। गोवंशों के पेट में 20-20 किलो पॉलिथीन की गठरी सी निकली।
इधर, ट्रांजिट हॉस्टल गोसदन में भी सुबह ही एक गोवंश की मौत हो गई। यहां सोमवार को चार, मंगलवार, बुधवार को एक-एक, गुरुवार को दो गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोसदनों में मृत्यु का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा हैै।

‘गोवंश के मरने की मुख्य वजह पॉलिथीन है। पेट के चार भाग हैं रियूमन, रेटीकुलम, ओमेसम और एवोमेसम। हाजमे की प्रक्रिया में चारा एक के बाद दूसरे भाग में जाता है। सबसे बाद में आंत में पहुंचता है। पॉलिथीन रियूमन में ही रुक जाती है। लिहाजा ब्लड बनना ही बंद हो जाता है। इसी से मौतें हो रही हैं। -डा. देवेंद्र चौधरी, पशु चिकित्साधिकारी।
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