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-युवक ने हाथों की नशें काटकर लगाई फांसी
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ओमकार का फाइल फोटो।
- फोटो : FARRUKHABAD
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पहले हाथ की नसें काटीं, फिर लगाई फांसी
फर्रुखाबाद। दिल्ली से घर लौटे युवक ने मकान के कमरे में पहले हाथ की नसें काटीं, फिर फंदे पर झूल गया। सुबह चार बजे मां ने शव फंदे पर लटका देखा। परिजन घटना के पीछे कारण बताने की स्थिति में नहीं हैं। पुलिस मामला प्रेम प्रसंग का मान रही हैै।
मोहल्ला श्यामनगर निवासी प्रेमचंद्र राजपूत का 24 वर्षीय पुत्र ओमकार दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था। वह शुक्रवार सुबह घर लौटा था। रात में गेट के पास वाले कमरे में लेट गया। रात में किसी वक्त उसने अपने हाथ की नसें काट लीं। इसके बाद दुपट्टे से कमरे की दीवारों के छेद में फंसे बांस पर फंदा बनाकर फांसी लगा ली। सुबह चार बजे जब मां शीलप्रभा उठीं, तो उन्होंने कमरे में शव बैठी हालत में लटकता देखा। इससे चीखपुकार मच गई। सूचना मिलते ही परिवार और मोहल्ले के लोग पहुंच गए।
परिजनों की सूचना पर आईटीआई चौकी प्रभारी राजीव कुमार पहुंचे। उन्होंने शव कब्जे में ले लिया। चौकी प्रभारी ने बताया कि परिजनों ने किसी पर कोई शक जाहिर नहीं किया है। बड़े भाई सत्यभान ने बताया कि घर पहुंचने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था। अचानक उसने आत्महत्या का फैसला क्यों कर लिया समझ में नहीं आ रहा। ओमकार पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था। सबसे बड़े भाई सत्यभान, बहन सुनीता, गीता और मनीषा का रो-रोकर बुरा हाल है।
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फर्रुखाबाद। दिल्ली से घर लौटे युवक ने मकान के कमरे में पहले हाथ की नसें काटीं, फिर फंदे पर झूल गया। सुबह चार बजे मां ने शव फंदे पर लटका देखा। परिजन घटना के पीछे कारण बताने की स्थिति में नहीं हैं। पुलिस मामला प्रेम प्रसंग का मान रही हैै।
मोहल्ला श्यामनगर निवासी प्रेमचंद्र राजपूत का 24 वर्षीय पुत्र ओमकार दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था। वह शुक्रवार सुबह घर लौटा था। रात में गेट के पास वाले कमरे में लेट गया। रात में किसी वक्त उसने अपने हाथ की नसें काट लीं। इसके बाद दुपट्टे से कमरे की दीवारों के छेद में फंसे बांस पर फंदा बनाकर फांसी लगा ली। सुबह चार बजे जब मां शीलप्रभा उठीं, तो उन्होंने कमरे में शव बैठी हालत में लटकता देखा। इससे चीखपुकार मच गई। सूचना मिलते ही परिवार और मोहल्ले के लोग पहुंच गए।
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परिजनों की सूचना पर आईटीआई चौकी प्रभारी राजीव कुमार पहुंचे। उन्होंने शव कब्जे में ले लिया। चौकी प्रभारी ने बताया कि परिजनों ने किसी पर कोई शक जाहिर नहीं किया है। बड़े भाई सत्यभान ने बताया कि घर पहुंचने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था। अचानक उसने आत्महत्या का फैसला क्यों कर लिया समझ में नहीं आ रहा। ओमकार पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था। सबसे बड़े भाई सत्यभान, बहन सुनीता, गीता और मनीषा का रो-रोकर बुरा हाल है।
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