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कोतवाली में लगी आग, 51 बाइकें जली

Wed, 16 Mar 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद Updated Wed, 16 Mar 2016 12:04 AM IST
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Fire station, 51 bikes burnt
कोतवाली में जल रही आग, खाक हुईं बाइकें - फोटो : अमर उजाला

शहर कोतवाली में मंगलवार की सुबह आग लग गई। आग फैलते ही कमरे में सो रहे क्राइम ब्रांच प्रभारी इंस्पेक्टर रूम सिंह यादव लपटों के बीच घिर गए। इंस्पेक्टर को बचाने के लिए लोग मौके पर पहुंचे। कमरे की दीवार काटकर इंस्पेक्टर को बाहर निकाला गया। आग की लपटों से इंस्पेक्टर का चेहरा व बाल झुलस गए। वहीं कोतवाली परिसर में खड़ीं 51 बाइकें, एक स्कूटर और तीन साइकिलें जल गई। साक्ष्य के लिए रखीं 270 पोस्टमार्टम की पोटली भी राख हो गईं।

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सुबह करीब आठ बजे शहर कोतवाली परिसर में खड़ी सीज बाइकों में आग लग गई। बाइकों की आग ने भीषण रूप ले लिया और समूची कोतवाली में धुआं भर गया। लपटों के साथ इतना धुआं हुआ कि वहां पहुंचने वालों का दम घुटने लगा। कोतवाली के ऊपरी मंजिल पर इंस्पेक्टर रूम सिंह यादव कमरे में काम कर रहे थे। उनका कमरा आग की लपटों से पूरी तरह से घिर गया। इंस्पेक्टर को फंसा देखकर मुंशी सूरजपाल जादौन ने कंट्रोल रूम को सूचना दी।
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सूचना मिलते ही थाने में मौजूद पुलिस के साथ आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। करीब नौ बजे फायरब्रिगेड भी मौके पर आ गई। लोगों ने इंस्पेक्टर के कमरे की खिड़की और रोशनदान तोड़ने के प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हुए तो कमरे की दीवार काटकर इंस्पेक्टर को बाहर निकाला  गया। इंस्पेक्टर रूम सिंह का चेहरा और बाल झुलस गए। करीब आधा घंटा तक बाइकें जलती रहीं। फायरब्रिगेड ने आधे घंटे बाद आग बुझाने में कामयाबी हासिल की।
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घटना की सूचना पाकर डीएम सत्येंद्र सिंह, पुलिस कप्तान राजेश कृष्ण, सीओ सिटी योगेश कुमार और शासकीय अधिवक्ता घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के बाद जिलाधिकारी ने कहा कि आग शार्ट सर्किट से लगी मालूम होती है। इसके बाद भी जांच समिति गठित की जाएगी।



कहीं लाभ पहुंचाने को तो नहीं जलाई गई पोस्टमार्टम पोटली
शहर कोतवाली में लगी आग से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। भले ही पुलिस इस घटना को शार्ट सर्किट से आग लगने की ओर मोड़ दे रही हो, लेकिन असलियत यह है कि न्यायालय ने जिस माल को पुलिस अभिरक्षा में दिया था, उसके जलने से तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। इनका जवाब पुलिस अधिकारियों के पास भी नहीं है।
लोगों का मानना है कि शार्ट सर्किट से एक साथ 51 बाइकों में आग नहीं लग सकती। बाइकोे के साथ 270 पोस्टमार्टम पोटली भी जल गईं।

पुलिस की बताई कहानी पर अगर विश्वास किया जाए तो सुबह 8.10 बजे आग लगी और ड्यूटी पर तैनात मुंशी सूरजपाल जादौन ने 8.25 बजे आग लगने की सूचना दे दी। दस मिनट के अंदर शार्ट सर्किट से 51 बाइकों में आग लग गई। यह कैसे संभव है। वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र दुबे का कहना है कि पोस्टमार्टम पोटली में मृतक के कपड़े व उसके पास जो सामान बरामद होता है। उसे रखा जाता है। न्यायालय में इस सामान को मुकदमे की सुनवाई के दौरान पेश किया जाता है।


किसी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पुलिस ने यह खेल खेला है। चर्चा है कि पोस्टमार्टम पोटली जलाने में बाइकों में भी आग लग गई और लपटों ने बड़ा रूप ले लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश द्विवेदी और सत्यपाल सिंह चौहान ने बताया कि किसी व्यक्ति को जब मुकदमे का लाभ पहुंचाना होता है तो इसी तरह सबूत मिटाए जाते है। न्यायालय जब इन बाइकों को रिलीज करेगा तो पुलिस किस फंड से लोगों को उपलब्ध कराएगी। इसका जवाब पुलिस के अधिकारियों के पास नहीं हैं।

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