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48 घंटे के अंदर मां और पिता का दुलार यादों में सिमट कर रह गया
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कायमगंज। गांव घसिया चिलौली निवासी संजय पाठक से कोरोना ने पहले मां और फिर पिता का साया छीन लिया। 48 घंटे के अंदर मां और पिता का दुलार यादों में सिमट कर रह गया। फादर्स-डे पर इकलौते बेटे को माता-पिता बहुत याद आए।
संजय पाठक इकलौते बेटे हैं। दो बड़ी हैं। बड़ी बहन डॉ. मधुबाला व छोटी बहन सुमन की शादी हो चुकी है। पिता 70 वर्षीय भैंसज्य पाठक 2011 में शिक्षक पद से रिटायर हो गए थे। मां ऊषा गृहणी थीं। तीन मई को पिता कोरोना की चपेट में आ गए। उन्हें कमालगंज के एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार मई को मां भी बीमार हो गईं। पांच मई को उन्हें कायमगंज के एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। छह मई की सुबह उनकी मौत हो गई। ठीक दूसरे दिन सात मई को पिता का भी निधन हो गया।
बकौल संजय पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद वह खुद बीमार पड़ गए। रूंधे गले से संजय ने बताया कि फादर्स-डे पर पिता की कमी रह रहकर बेहद खल रही है। इस दिन पिता से आशीर्वाद लेकर उन्हें शुभकामनाएं देते थे। बहनें भी विश करतीं थीं तो पिता के चेहरे के भाव ही अलग दिखाई देते थे।
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संजय पाठक इकलौते बेटे हैं। दो बड़ी हैं। बड़ी बहन डॉ. मधुबाला व छोटी बहन सुमन की शादी हो चुकी है। पिता 70 वर्षीय भैंसज्य पाठक 2011 में शिक्षक पद से रिटायर हो गए थे। मां ऊषा गृहणी थीं। तीन मई को पिता कोरोना की चपेट में आ गए। उन्हें कमालगंज के एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार मई को मां भी बीमार हो गईं। पांच मई को उन्हें कायमगंज के एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। छह मई की सुबह उनकी मौत हो गई। ठीक दूसरे दिन सात मई को पिता का भी निधन हो गया।
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बकौल संजय पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद वह खुद बीमार पड़ गए। रूंधे गले से संजय ने बताया कि फादर्स-डे पर पिता की कमी रह रहकर बेहद खल रही है। इस दिन पिता से आशीर्वाद लेकर उन्हें शुभकामनाएं देते थे। बहनें भी विश करतीं थीं तो पिता के चेहरे के भाव ही अलग दिखाई देते थे।
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