{"_id":"673e292b7870f3dbb10bc38d","slug":"farrukhabadi-roasted-potato-business-farrukhabad-news-c-222-1-ka11004-117780-2024-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: फर्रुखाबादी भुने आलू का धंधा चोखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: फर्रुखाबादी भुने आलू का धंधा चोखा
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। आलू की पैदावार में अग्रणी फर्रुखाबाद अब मेहनत की आंच पर आलू तप कर सोना बन रहा है। सड़क किनारे धधकने वाली सैकड़ों भट्टियों में भुने आलू की साेंधी महक का स्वाद खानपान के शौकीनों के लिए खास बन चुका है। 25 रुपये का आलू भुनते ही 120 रुपये किलो बिकता है। स्वाद का कारोबार ऐसा कि शहरवासी रोज छह लाख का आलू खा जाते हैं।
आलू के भाव जरा से चढ़ने पर आम इंसान की रसोई का बजट बिगड़ने लगता है। लेकिन फर्रुखाबाद का आलू मेहनत की आंच पर पकते ही 120 रुपये किलो बिकता है। सोंधी महक समेटे यह आलू मसाला नमक और चटनी के साथ खूब खाया जाता है। नुक्कड से लेकर चौराहों तक पर धधकती आलू भूनने की भट्टियों पर मेहनतकश परिवारों का यह धंधा उनके घर में चूल्हे की आंच बन गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
इनसेट-
जंक फूड और चायनीज खाद्य पदार्थों को मात दे रहा साधारण आलू
भुने आलू का स्वाद भला किसे पसंद नहीं अक्सर यह शौक लोग घरों में पूरा कर लेते हैं। लेकिन फर्रुखाबादी आलू अब चायनीज जंक फूड को भी मात दे रहा है। खानपान के शौकीन लोग तली-भुनी चीजों को छोड़ खासतौर पर तैयार मसाला नमक और चटनी के साथ भुने हुए आलू पसंद कर रहे हैं। जिसके चलते आलू का यह कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। शहर में करीब 70 से अधिक स्थानों पर आलू का कारोबार किया जा रहा है। वहीं जिले भर में करीब 200 से अधिक लोग भुने आलू के कारोबार को कर रहे हैं।
मिशन कंपाउंड के पास लगने वाली चौपाटी शहर में खाने-पीने के शौकीनों के लिए मशहूर है। शाम होते ही यहां पर भुने आलू खाने के लिए लोग दुकानों पर घंटों इंतजार करते हैं।आलू का यह कारोबार सर्दियां बढ़ते ही परवान चढ़ने लगता है। गर्म-गर्म आलू खाने के लिए लोग वक्त और पैसा लगाकर इसका स्वाद चखना नहीं भूलते हैं। एक दुकानदार औसतन रोज 70 किलो आलू बेच डालता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदार भी प्रतिदिन 50 किलो आलू की खपत कर रहे हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
गर्मा-गर्म आलू के साथ चटनी च
फोटो-03-शहनवाज
शहनवाज बताते हैं कि आलू को भूनते वक्त एक निश्चित ताप पर गर्म किया जाता है ताकि आलू अधिक जले बिना पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाए।फिर इसकी बाहरी परत को निकालने के लिए झाबे में डालकर रगड़ दी जाती है। जिससे आलू दिखने में अच्छा लगने लगता है। मसाला नमक और चटनी के साथ आलू गर्म-गर्म ही परोसा जाता है।
-- -- -- -- -- -
फोटो-04सर्वेश कुमार
सर्वेश कुमार बताते हैं कि आलू के रेट कितने भी गिर जाए लेकिन भुने आलू का रेट कभी कम नहीं होता है। आलू को भूनने के लिए भट्टी में लकड़ी ज्यादा लगती है। जिसकी वजह से रेट ज्यादा रहते हैं।
विज्ञापन
आलू के भाव जरा से चढ़ने पर आम इंसान की रसोई का बजट बिगड़ने लगता है। लेकिन फर्रुखाबाद का आलू मेहनत की आंच पर पकते ही 120 रुपये किलो बिकता है। सोंधी महक समेटे यह आलू मसाला नमक और चटनी के साथ खूब खाया जाता है। नुक्कड से लेकर चौराहों तक पर धधकती आलू भूनने की भट्टियों पर मेहनतकश परिवारों का यह धंधा उनके घर में चूल्हे की आंच बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इनसेट-
जंक फूड और चायनीज खाद्य पदार्थों को मात दे रहा साधारण आलू
भुने आलू का स्वाद भला किसे पसंद नहीं अक्सर यह शौक लोग घरों में पूरा कर लेते हैं। लेकिन फर्रुखाबादी आलू अब चायनीज जंक फूड को भी मात दे रहा है। खानपान के शौकीन लोग तली-भुनी चीजों को छोड़ खासतौर पर तैयार मसाला नमक और चटनी के साथ भुने हुए आलू पसंद कर रहे हैं। जिसके चलते आलू का यह कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। शहर में करीब 70 से अधिक स्थानों पर आलू का कारोबार किया जा रहा है। वहीं जिले भर में करीब 200 से अधिक लोग भुने आलू के कारोबार को कर रहे हैं।
मिशन कंपाउंड के पास लगने वाली चौपाटी शहर में खाने-पीने के शौकीनों के लिए मशहूर है। शाम होते ही यहां पर भुने आलू खाने के लिए लोग दुकानों पर घंटों इंतजार करते हैं।आलू का यह कारोबार सर्दियां बढ़ते ही परवान चढ़ने लगता है। गर्म-गर्म आलू खाने के लिए लोग वक्त और पैसा लगाकर इसका स्वाद चखना नहीं भूलते हैं। एक दुकानदार औसतन रोज 70 किलो आलू बेच डालता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदार भी प्रतिदिन 50 किलो आलू की खपत कर रहे हैं।
गर्मा-गर्म आलू के साथ चटनी च
फोटो-03-शहनवाज
शहनवाज बताते हैं कि आलू को भूनते वक्त एक निश्चित ताप पर गर्म किया जाता है ताकि आलू अधिक जले बिना पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाए।फिर इसकी बाहरी परत को निकालने के लिए झाबे में डालकर रगड़ दी जाती है। जिससे आलू दिखने में अच्छा लगने लगता है। मसाला नमक और चटनी के साथ आलू गर्म-गर्म ही परोसा जाता है।
फोटो-04सर्वेश कुमार
सर्वेश कुमार बताते हैं कि आलू के रेट कितने भी गिर जाए लेकिन भुने आलू का रेट कभी कम नहीं होता है। आलू को भूनने के लिए भट्टी में लकड़ी ज्यादा लगती है। जिसकी वजह से रेट ज्यादा रहते हैं।