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फर्रुखाबादी निराश, नहीं मिली लालबत्ती
अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:28 AM IST
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उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से बनी भाजपा सरकार में फर्रुखाबाद के किसी भी विधायक को लालबत्ती नसीब नहीं हुई। फर्रुखाबाद वीआईपी जिला माना जाता है। इसे जिले ने राष्ट्रपति से लेकर केंद्र सरकार में विदेश मंत्री तक देश को दिए हैं। भाजपा सरकार में जहां स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ऊर्जा मंत्री रहे। कायमगंज क्षेत्र के गांव पितौरा निवासी सलमान खुर्शीद कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे। बसपा सरकार में विधायक अनंत मिश्र अंटू स्वास्थ्य मंत्री बने। सपा सरकार में पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह यादव होमगार्ड राज्यमंत्री रहे।
पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सतीश दीक्षित को भी मंत्री का दर्जा मिला। 14 साल बाद जनता ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को वनवास खत्म कर प्रचंड बहुमत दिया। इस दौरान फर्रुखाबाद की चारों विधानसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं। ऐसे में जिले की जनता को उम्मीद थी कि फर्रुखाबाद में भी कम से कम एक विधायक को तो लालबत्ती मिलेगी।
इनमें मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी और सुशील शाक्य के नाम शामिल थे। सुशील शाक्य की दावेदारी इसलिए थी कि वे किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही वर्ष 1996 में कायमगंज विधानसभा से विधायक रहे और उनके पिता दयाराम शाक्य भी सांसद और विधायक रहे थे। मेजर का दावा इसलिए मजबूत था कि उनके पिता स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ऊर्जा मंत्री और उनकी मां स्व. प्रभा द्विवेदी कैबिनेट मंत्री रहीं।
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लाल बत्ती न मिलने का कोई मलाल नहीं: मेजर
मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी ने मोबाइल पर हुई बातचीत में कहा कि लालबत्ती न मिलने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। सूबे में बनी भाजपा सरकार का विधायक बनना ही उनके लिए गर्व की बात है। सबका साथ सबका विकास के मंत्र के साथ वह विकास कार्य कराएंगे।
उपयोगिता के हिसाब से बने मंत्री
भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह का कहना था कि प्रदेश नेतृत्व ने सोच-समझकर और उपयोगिता के हिसाब से ही मंत्री बनाए हैं। सूबे में सरकार तो भाजपा की है। ऐसे में लालबत्ती कोई जरूरी भी तो नहीं है।
दिन भर लालबत्ती की
उड़ती रहीं अफवाहें
उत्तर प्रदेश में भाजपा के योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण समारोह से पहले तक जिले में लालबत्ती को लेकर भाजपा समर्थकों में अफवाहों का बाजार गर्म रहा। अफवाह थी कि मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी को लालबत्ती मिल गई है तो कोई कहता सुना गया कि सुशील शाक्य मंत्री बन गए हैं। मीडिया के लोगों से भी लोग इसकी जानकारी करते रहे।
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पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सतीश दीक्षित को भी मंत्री का दर्जा मिला। 14 साल बाद जनता ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को वनवास खत्म कर प्रचंड बहुमत दिया। इस दौरान फर्रुखाबाद की चारों विधानसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं। ऐसे में जिले की जनता को उम्मीद थी कि फर्रुखाबाद में भी कम से कम एक विधायक को तो लालबत्ती मिलेगी।
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इनमें मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी और सुशील शाक्य के नाम शामिल थे। सुशील शाक्य की दावेदारी इसलिए थी कि वे किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही वर्ष 1996 में कायमगंज विधानसभा से विधायक रहे और उनके पिता दयाराम शाक्य भी सांसद और विधायक रहे थे। मेजर का दावा इसलिए मजबूत था कि उनके पिता स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ऊर्जा मंत्री और उनकी मां स्व. प्रभा द्विवेदी कैबिनेट मंत्री रहीं।
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लाल बत्ती न मिलने का कोई मलाल नहीं: मेजर
मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी ने मोबाइल पर हुई बातचीत में कहा कि लालबत्ती न मिलने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। सूबे में बनी भाजपा सरकार का विधायक बनना ही उनके लिए गर्व की बात है। सबका साथ सबका विकास के मंत्र के साथ वह विकास कार्य कराएंगे।
उपयोगिता के हिसाब से बने मंत्री
भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह का कहना था कि प्रदेश नेतृत्व ने सोच-समझकर और उपयोगिता के हिसाब से ही मंत्री बनाए हैं। सूबे में सरकार तो भाजपा की है। ऐसे में लालबत्ती कोई जरूरी भी तो नहीं है।
दिन भर लालबत्ती की
उड़ती रहीं अफवाहें
उत्तर प्रदेश में भाजपा के योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण समारोह से पहले तक जिले में लालबत्ती को लेकर भाजपा समर्थकों में अफवाहों का बाजार गर्म रहा। अफवाह थी कि मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी को लालबत्ती मिल गई है तो कोई कहता सुना गया कि सुशील शाक्य मंत्री बन गए हैं। मीडिया के लोगों से भी लोग इसकी जानकारी करते रहे।