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धक्का मार एंबुलेंस से लाए जा रहे मरीज

Tue, 21 Dec 2021 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Dec 2021 11:57 PM IST
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राजेपुर सीएचसी में एंबुलेंस में धक्का लगाते कर्मचारी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। जिले में निशुल्क एंबुलेंस सेवा के बेड़े में 46 गाड़ियां हैं। इनमें से 10 गाड़ियां दो साल पहले ही कंडम घोषित हो चुकी हैं। बावजूद इसके उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जाता है। कई को धक्का लगाकर चालू कर काम चल रहा है। जबकि किसी की खिड़कियां, तो किसी की सीटें और बॉडी जर्जर हो चुकी हैं। कुछ की लाइटें भी सही से काम नहीं करती हैं। मानक से कहीं अधिक किलोमीटर चल चुकी एंबुलेंस मरीजों को ढो रहीं हैं।
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जिले की एंबुलेंस सेवा में 108 की 22, 102 की 21 और तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) की गाड़ियां हैं। फिलहाल तीन एएलएस का संचालन नई कंपनी कर रही है। अन्य 43 गाड़ियां जीवीके चलवा रही है। जीवीके के बेड़े में अभी भी जीरो सीरीज की सबसे पहले आईं एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। इन गाड़ियों को तीन लाख किमी तक सड़कों पर चलाया जा सकता था, मगर अभी तक चार-चार लाख किमी तक चल चुकी हैं। लिहाजा मरीज को लाते वक्त रास्ते में भी कई बार खड़ी हो जाती हैं। इससे मरीजों को ही परेशानी होती है।
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धक्का देकर चालू होती राजेपुर की एंबुलेंस
राजेपुर सीएचसी पर एक एंबुलेंस धक्का मारने के बाद चालू होती है। जब मरीज की कॉल आती है, तब कर्मचारी लोगों को एकत्रित करके धक्का मारकर चालू करवाते हैं। इससे मरीजों को लेटलतीफ लाया जा सकता है।
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कई गाड़ियों की फिटनेस भी नहीं
जिले में जो एंबुलेंस चल रही हैं, उनमें से कई गैरजनपदों में पंजीकृत हैं। कंडम हालत में होने की वजह से बिना फिटनेस के ही उन्हें रोड पर दौड़ाया जा रहा है। इससे हादसा होने पर तैनात स्टाफ, सवार मरीज तथा तीमारदार के सामने बड़ी दिक्कत आ सकती है।
डीएम के ऑडिट में सात गाड़ियां में मिली थीं कमियां
करीब छह माह पहले डीएम ने सभी एंबुलेंस की ऑडिट कराई थी। इसमें सात गाड़ियां कंडम हालत में मिली थीं। ऑडिट का पत्र शासन को भी भेजा गया था। इसके बावजूद नई गाड़ियां उपलब्ध नहीं हो सकीं।

‘एंबुलेंस का संचालन करने वाले कंपनी को शासन से नई गाड़ियां भेजने के निर्देश दिए जाते हैं। यदि सभी गाड़ियां नहीं चल रही हैं तो इसके लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।’
डॉ. सतीश चंद्र, सीएमओ फर्रुखाबाद
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