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सिर्फ दूध पिलाकर बच्चों को बना रहे पोषित
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एनआरसी वार्ड में भर्ती मां की गोद में मिस्टी मिश्रा। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। कुपोषित बच्चों को पोषित करने वाला पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) जिम्मेदारों की मनमानी का शिकार है। पोषण सप्ताह के पहले दिन ही भर्ती बच्चों को सिर्फ दूध ही नसीब हुआ। हालांकि वहां बनी रसोई की दीवार पर पूरे सप्ताह का मेन्यू चस्पा है। उस पर कोई अमल नहीं होता है। दोपहर तक डॉक्टर भी बच्चों को देखने नहीं आए।
सरकार कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए भारी धनराशि खर्च कर रही है। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के एनआरसी वार्ड में चार बच्चे भर्ती हैं। बच्चों को इलाज और विटामिन युक्त खाद्यान्न देने के लिए पूरे सप्ताह का मेन्यू निर्धारित है। इस मेन्यू पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि 13-13 दिन से भर्ती बच्चों को दूध के अलावा और कुछ भी नहीं मिल रहा। इससे उन्हें बाजार से मंगाए सामान पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
भर्ती बच्चों के परिजनों की बात
शाहजहांपुर के मिर्जापुर थाने के ढाईघाट निवासी रोहित का नौ माह का पुत्र कन्हैया 13 दिन से बच्चा वार्ड में भर्ती रहकर सोमवार को एनआरसी में भर्ती किया गया। नाना रामौतार पांडेय ने बताया कि तीमारदार के लिए दोपहर 12 बजे पतली दाल, आलू की सब्जी और पांच रोटी मिलती हैं। बच्चे को दूध के अलावा और कुछ नहीं मिलता। शहर के मदारबाड़ी के सचिन मिश्रा की बेटी मिस्टी मिश्रा (10 माह) मंगलवार को एनआरसी में भर्ती हुई। सचिन ने बताया कि बिजली जाने के बाद पंखा नहीं चलता। राजेपुर के गांव बहादुरपुर के रामकिशन का तीन माह का पुत्र गोविंद 9 दिन से अस्पताल में है। मां राजेश्वरी ने बताया कि उन्हें तो न दूध मिलता और न केला।
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बुधवार का यह था मेन्यू
सुबह 8 बजे- साबूदाना खीर
12 बजे- खिचड़ी मूंग की दाल, हरी सब्जी, उबला अंडा
4 बजे- 200 मिली दूध
रात 8 बजे- दूध का दलिया
रात 12 बजे- 200 मिली दूध
सुबह 4 बजे- 200 मिली दूध और केला
24 घंटे में एक बार आते हैं प्रभारी डॉक्टर
मऊदरवाजा के गांव महलई निवासी दफेदार की पुत्री सुमन्या उर्फ सौम्या दो साल की है। रक्षाबंधन से पहले दवाएं खत्म होने पर उसे घर भेज दिया गया था। मां पूजा देवी ने बताया कि मंगलवार दोपहर 3 बजे वह यहां पहुंच गई थीं। इसके बाद बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे तक भर्ती नहीं किया गया। साथ में आई आशा संगीता ने बताया कि मंगलवार दोपहर 12 बजे डॉ. विवेक सक्सेना आए थे। अब आएंगे तभी भर्ती हो सकेंगे।
13 दिन में एक हजार का खरीदा दूध
चार माह के भोलूू के पिता विपिन बताते हैं कि बच्चा डिब्बा वाला दूध पीता है। 13 दिन में सिर्फ एक बार 400 ग्राम का डिब्बा मिला। इसके बाद बाजार से खरीदने के लिए कह दिया गया। अब तक एक हजार रुपये का दूध बाजार से खरीद चुके हैं।
अधिकारी एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार
सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि एनआरसी की सभी व्यवस्थाएं एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह के अधीन हैं। वहीं से खर्च का भुगतान किया जाता हैै। डॉ. दलवीर सिंह अपना पल्ला झाड़ते दिखे। बताया कि उनसे कोई लेना-देना नहीं है। सीएमएस को सीसीटीवी लगवाना चाहिए। तभी सच सामने आ जाएगा।
--
‘मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। यदि ऐसा है, तो वह खुद गुरुवार को निरीक्षण करेंगे। मेन्यू के हिसाब से भर्ती बच्चों को खाद्य पदार्थ देना जरूरी है। मामले को अपने स्तर से दिखवाएंगे। हर हाल में व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी।’
-डॉ. सतीश चंद्रा, सीएमओ, फर्रुखाबाद
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सरकार कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए भारी धनराशि खर्च कर रही है। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के एनआरसी वार्ड में चार बच्चे भर्ती हैं। बच्चों को इलाज और विटामिन युक्त खाद्यान्न देने के लिए पूरे सप्ताह का मेन्यू निर्धारित है। इस मेन्यू पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि 13-13 दिन से भर्ती बच्चों को दूध के अलावा और कुछ भी नहीं मिल रहा। इससे उन्हें बाजार से मंगाए सामान पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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भर्ती बच्चों के परिजनों की बात
शाहजहांपुर के मिर्जापुर थाने के ढाईघाट निवासी रोहित का नौ माह का पुत्र कन्हैया 13 दिन से बच्चा वार्ड में भर्ती रहकर सोमवार को एनआरसी में भर्ती किया गया। नाना रामौतार पांडेय ने बताया कि तीमारदार के लिए दोपहर 12 बजे पतली दाल, आलू की सब्जी और पांच रोटी मिलती हैं। बच्चे को दूध के अलावा और कुछ नहीं मिलता। शहर के मदारबाड़ी के सचिन मिश्रा की बेटी मिस्टी मिश्रा (10 माह) मंगलवार को एनआरसी में भर्ती हुई। सचिन ने बताया कि बिजली जाने के बाद पंखा नहीं चलता। राजेपुर के गांव बहादुरपुर के रामकिशन का तीन माह का पुत्र गोविंद 9 दिन से अस्पताल में है। मां राजेश्वरी ने बताया कि उन्हें तो न दूध मिलता और न केला।
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बुधवार का यह था मेन्यू
सुबह 8 बजे- साबूदाना खीर
12 बजे- खिचड़ी मूंग की दाल, हरी सब्जी, उबला अंडा
4 बजे- 200 मिली दूध
रात 8 बजे- दूध का दलिया
रात 12 बजे- 200 मिली दूध
सुबह 4 बजे- 200 मिली दूध और केला
24 घंटे में एक बार आते हैं प्रभारी डॉक्टर
मऊदरवाजा के गांव महलई निवासी दफेदार की पुत्री सुमन्या उर्फ सौम्या दो साल की है। रक्षाबंधन से पहले दवाएं खत्म होने पर उसे घर भेज दिया गया था। मां पूजा देवी ने बताया कि मंगलवार दोपहर 3 बजे वह यहां पहुंच गई थीं। इसके बाद बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे तक भर्ती नहीं किया गया। साथ में आई आशा संगीता ने बताया कि मंगलवार दोपहर 12 बजे डॉ. विवेक सक्सेना आए थे। अब आएंगे तभी भर्ती हो सकेंगे।
13 दिन में एक हजार का खरीदा दूध
चार माह के भोलूू के पिता विपिन बताते हैं कि बच्चा डिब्बा वाला दूध पीता है। 13 दिन में सिर्फ एक बार 400 ग्राम का डिब्बा मिला। इसके बाद बाजार से खरीदने के लिए कह दिया गया। अब तक एक हजार रुपये का दूध बाजार से खरीद चुके हैं।
अधिकारी एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार
सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि एनआरसी की सभी व्यवस्थाएं एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह के अधीन हैं। वहीं से खर्च का भुगतान किया जाता हैै। डॉ. दलवीर सिंह अपना पल्ला झाड़ते दिखे। बताया कि उनसे कोई लेना-देना नहीं है। सीएमएस को सीसीटीवी लगवाना चाहिए। तभी सच सामने आ जाएगा।
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‘मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। यदि ऐसा है, तो वह खुद गुरुवार को निरीक्षण करेंगे। मेन्यू के हिसाब से भर्ती बच्चों को खाद्य पदार्थ देना जरूरी है। मामले को अपने स्तर से दिखवाएंगे। हर हाल में व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी।’
-डॉ. सतीश चंद्रा, सीएमओ, फर्रुखाबाद