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सिटी मजिस्ट्रेट की अभद्र भाषा और धमकी पर भड़के एंबुलेंस कर्मी
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लोहिया परिसर में कोतवाल से भिड़ता यूनियन अध्यक्ष। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। एंबुलेंस कर्मियों के शांतिपूर्ण धरने के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष से अभद्र भाषा का प्रयोग कर जेल भेजने की धमकी दे दी। इससे बात बिगड़ी और आधा घंटे तक जमकर नारेबाजी हुई। हालात बेकाबू होते देख सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खिसक लिए। इसी दौरान जिलाध्यक्ष और एक महिला ईएमटी बेहोश हो गई। आनन-फानन में दोनों को लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। बाद में फिर कर्मचारी धरने पर बैठ गए।
जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले एंबुलेंस कर्मी तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। बुधवार सुबह 10 बजे एंबुलेंस कर्मी शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए। दोपहर पौने 12 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य, सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा, सीओ सिटी नितेश सिंह समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे। धरना स्थल से संघ जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया, शिवनेश सिंह, अजय यादव, शिशिर कुमार आदि को वार्ता के लिए बुलाया गया। जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने बताया कि सीएमओ उनसे कुछ कहना चाह रहे थे। तभी सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि एक बात सुन लो, चाबियां दे रहे हो या नहीं? हां या ना में जवाब दो। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उन्होंने चाबियां देने से कभी इनकार नहीं किया। हां सभी गाड़ियां लिखित में रिसीविंग लेकर ही देंगे। इस पर कागज और कार्बन मंगवाकर लिखापढ़ी शुरू हो गई।
एंबुलेंस कर्मी लिखापढ़ी कर ही रहे थे कि सिटी मजिस्ट्रेट ने माइक से जिलाध्यक्ष की ओर इशारा करके कहा कि ये पीली शर्ट वाले इधर आ। ज्यादा नेतागीरी करता है। इधर बैठ नहीं तो अभी मुकदमा लिखवाकर जेल भेज देेंगे। 14 दिन जमानत तक नहीं होगी। सिटी मजिस्ट्रेट की अभद्र भाषा और जेल भेजने की धमकी देते ही कर्मचारी भड़क गए। उन्होंने एंबुलेंस हैंडओवर के लिए लिखे गए कागजों में आग लगा दी। जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हालात इस कदर बिगड़े कि सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ, सीएमएस और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को वहां से खिसकना पड़ा। इसी दौरान अचानक भीषण गर्मी के चलते जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया और महिला ईएमटी जूली बेहोश हो गई। आनन-फानन में साथी लोगों ने दोनों को लोहिया की इमरजेंसी में भर्ती कराया। जहां दोनों की हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि जैसे ही सीओ सिटी नितेश सिंह और कोतवाल वेदप्रकाश पांडेय ने कर्मियों को समझाया, तो वह शांत होकर फिर धरने पर बैठ गए।
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समझौते की बजाय वीडियो बनाते रहे सीएमएस
अधिकारी होने के बावजूद सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त पुलिसिया लहजे में नजर आए। उन्होंने सीएमओ से कहा कि मैंने रात में ही कहा था कि पुलिस बुला लो। अभी चाबी मिल जाएंगी। अभी भी फोर्स बुलाओ और गेट बंद करवा देता हूं। दो मिनट में सही हो जाएंगे। जब एंबुलेंस कर्मी भड़के, तो सीएमएस दूर खड़े होकर वीडियो बनाते नजर आए।
लालटोपी वालों को गेट से बाहर करो
धरना स्थल पर सपा जिला महासचिव मंदीप यादव सभी प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्षों समेत अन्य नेताओं संग लाल टोपी लगाकर पहुंचे। उन्होंने कर्मियों से वार्ता की। इसी दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने माइक से कहा कि लालटोपी वालों को गेट से बाहर करो। इस पर कोतवाल समेत अन्य पुलिस कर्मियों ने समझाकर दूर कर दिया। भर्ती दोनों ईएमटी का हालचाल जानने के बाद घर चले गए। मंदीप यादव ने कहा कि सरकार आई, तो गरीब कर्मियों की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर जैसा कर रहे हैं, उनको भुगतना पड़ेगा। उनके साथ अनिल पाल, शशांक सक्सेना, बेचेलाल यादव, आनंद गिहार, मुजीबुल हसन आदि थे।
सीएमओ पर 5 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया
मऊदरवाजा थाने के गांव चौरसिया मझोला के चालक मुकेश कुमार की कोरोना के चलते मौत हो गई थी। उसकी पांच बेटियां कामिनी, प्रिया, पल्लवी, सिम्मी और मासूम अवनी हैं। पांचों बेटी के साथ पत्नी सुनीता और भाई नीरज धरने पर बैठ गए। सुनीता और नीरज ने सीओ सिटी के सामने आरोप लगाया कि 50 लाख रुपये अनुदान की फाइल के बदले सीएमओ 5 लाख रुपये मांग रहे हैं। इस पर सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को बुलाया गया। उनके सामने दोनों ने कहा कि आपने मुझसे 5 लाख रुपये की रिश्वत देने के बाद ही फाइल पास करने को कहा। सीएमओ बोले, मैंने कब कहा, किसी लिपिक ने तो नहीं कहा। मगर मृतक की पत्नी और भाई सीएमओ पर ही आरोप लगाते रहे। बाद में सीएमओ बोले कि गुरुवार 11 बजे आना, फाइल कर दी जाएगी।
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जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले एंबुलेंस कर्मी तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। बुधवार सुबह 10 बजे एंबुलेंस कर्मी शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए। दोपहर पौने 12 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य, सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा, सीओ सिटी नितेश सिंह समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे। धरना स्थल से संघ जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया, शिवनेश सिंह, अजय यादव, शिशिर कुमार आदि को वार्ता के लिए बुलाया गया। जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने बताया कि सीएमओ उनसे कुछ कहना चाह रहे थे। तभी सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि एक बात सुन लो, चाबियां दे रहे हो या नहीं? हां या ना में जवाब दो। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उन्होंने चाबियां देने से कभी इनकार नहीं किया। हां सभी गाड़ियां लिखित में रिसीविंग लेकर ही देंगे। इस पर कागज और कार्बन मंगवाकर लिखापढ़ी शुरू हो गई।
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एंबुलेंस कर्मी लिखापढ़ी कर ही रहे थे कि सिटी मजिस्ट्रेट ने माइक से जिलाध्यक्ष की ओर इशारा करके कहा कि ये पीली शर्ट वाले इधर आ। ज्यादा नेतागीरी करता है। इधर बैठ नहीं तो अभी मुकदमा लिखवाकर जेल भेज देेंगे। 14 दिन जमानत तक नहीं होगी। सिटी मजिस्ट्रेट की अभद्र भाषा और जेल भेजने की धमकी देते ही कर्मचारी भड़क गए। उन्होंने एंबुलेंस हैंडओवर के लिए लिखे गए कागजों में आग लगा दी। जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हालात इस कदर बिगड़े कि सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ, सीएमएस और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को वहां से खिसकना पड़ा। इसी दौरान अचानक भीषण गर्मी के चलते जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया और महिला ईएमटी जूली बेहोश हो गई। आनन-फानन में साथी लोगों ने दोनों को लोहिया की इमरजेंसी में भर्ती कराया। जहां दोनों की हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि जैसे ही सीओ सिटी नितेश सिंह और कोतवाल वेदप्रकाश पांडेय ने कर्मियों को समझाया, तो वह शांत होकर फिर धरने पर बैठ गए।
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समझौते की बजाय वीडियो बनाते रहे सीएमएस
अधिकारी होने के बावजूद सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त पुलिसिया लहजे में नजर आए। उन्होंने सीएमओ से कहा कि मैंने रात में ही कहा था कि पुलिस बुला लो। अभी चाबी मिल जाएंगी। अभी भी फोर्स बुलाओ और गेट बंद करवा देता हूं। दो मिनट में सही हो जाएंगे। जब एंबुलेंस कर्मी भड़के, तो सीएमएस दूर खड़े होकर वीडियो बनाते नजर आए।
लालटोपी वालों को गेट से बाहर करो
धरना स्थल पर सपा जिला महासचिव मंदीप यादव सभी प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्षों समेत अन्य नेताओं संग लाल टोपी लगाकर पहुंचे। उन्होंने कर्मियों से वार्ता की। इसी दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने माइक से कहा कि लालटोपी वालों को गेट से बाहर करो। इस पर कोतवाल समेत अन्य पुलिस कर्मियों ने समझाकर दूर कर दिया। भर्ती दोनों ईएमटी का हालचाल जानने के बाद घर चले गए। मंदीप यादव ने कहा कि सरकार आई, तो गरीब कर्मियों की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर जैसा कर रहे हैं, उनको भुगतना पड़ेगा। उनके साथ अनिल पाल, शशांक सक्सेना, बेचेलाल यादव, आनंद गिहार, मुजीबुल हसन आदि थे।
सीएमओ पर 5 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया
मऊदरवाजा थाने के गांव चौरसिया मझोला के चालक मुकेश कुमार की कोरोना के चलते मौत हो गई थी। उसकी पांच बेटियां कामिनी, प्रिया, पल्लवी, सिम्मी और मासूम अवनी हैं। पांचों बेटी के साथ पत्नी सुनीता और भाई नीरज धरने पर बैठ गए। सुनीता और नीरज ने सीओ सिटी के सामने आरोप लगाया कि 50 लाख रुपये अनुदान की फाइल के बदले सीएमओ 5 लाख रुपये मांग रहे हैं। इस पर सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को बुलाया गया। उनके सामने दोनों ने कहा कि आपने मुझसे 5 लाख रुपये की रिश्वत देने के बाद ही फाइल पास करने को कहा। सीएमओ बोले, मैंने कब कहा, किसी लिपिक ने तो नहीं कहा। मगर मृतक की पत्नी और भाई सीएमओ पर ही आरोप लगाते रहे। बाद में सीएमओ बोले कि गुरुवार 11 बजे आना, फाइल कर दी जाएगी।