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Farrukhabad News: 2500 रुपये में ट्रांसफार्मर, 3500 लदवाई, अधूरी मिलती सामग्री, किसान परेशान
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फर्रुखाबाद। निजी नलकूप कनेक्शन लेने पर एस्टीमेट के लाखों रुपये जमा करने के बाद किसानों को सामग्री के लिए भटकना पड़ रहा है। ट्रांसफार्मर का गेट पास कटवाने के लिए 2500 रुपये वसूली हो रही। इसके बाद 3500 रुपये सामग्री लदवाने का खर्च अलग देना पड़ता है। एक बार में पूरी सामग्री न मिलने से किसान परेशान हैं।
फसलों में सिंचाई की सुविधा के लिए किसान निजी नलकूप लगवा रहे हैं। इसके लिए बिजली कनेक्शन लेने पर खंभा, तार, ट्रांसफार्मर आदि सामग्री के लिए विभाग में धनराशि जमा करते हैं। विभाग से यह फाइल स्टोर में पहुंचती है। यहां सामग्री लेने के लिए किसानों को स्टोर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ट्रांसफार्मर का गेटपास काटने के नाम पर किसानों से धन उगाही भी की जा रही है। बुधवार को ट्रांसफार्मर वितरण की जानकारी पर किसान सुबह से बेवर रोड स्थित बिजली विभाग के स्टोर पहुंच गए। वहां दोपहर तक इंतजार किया, फिर चढ़ावा चढ़ाने के बाद गेट पास कटा। उसमें भी एक बार में पूरी सामग्री नहीं मिल सकी।
ठगे जा रहे किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-2 महेश।
शमसाबाद क्षेत्र के गांव रम्पुरा निवासी महेश ने बताया कि ठेकेदार के माध्यम उन्होंने नलकूप का कनेक्शन कराया। इसके लिए उसने एक लाख 45 हजार रुपये ठेकेदार को दिए। जबकि विभाग से मात्र एक लाख 11 हजार रुपये का एस्टीमेट बना। दो दिन पहले 3000 रुपये जमा करने के बाद सुबह आठ बजे ट्रांसफार्मर लेने आए और शाम तक इंतजार करना पड़ा। इसकी कोई रसीद नहीं मिली। फिर ट्रांसफार्मर व अन्य सामग्री की लोडिंग के लिए 3500 रुपये दिए। सामग्री पहुंचाने का भाड़ा अलग से देना पड़ेगा।
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फोटो-3 रामरहीस।
परतापुर तराई निवासी रामरहीस ने बताया कि उनकी मां के नाम नलकूप का कनेक्शन कराया। 2500 रुपये जमा करने के बाद गेटपास कटा। ट्रांसफार्मर लीकेज दे दिया गया। डीपी क्लेंप व अन्य सामग्री अभी नहीं मिली है। इसी गांव के जितेंद्र ने बताया कि उनकी मां मुन्नी देवी के नाम नलकूप का कनेक्शन कराया। 2500 रुपये देकर ट्रांसफार्मर का गेटपास कटाया। 2500 रुपये ट्रांसफार्मर लदवाई अलग से दिए। शाम तक इंतजार करना पड़ा।
फोटो-4 दिनेश।
नवाबगंज के गांव रसूलपुर निवासी दिनेश ने बताया कि उनका वरीयता क्रम नंबर 28 है। सुबह से बैठे हैं लेकिन गेटपास नहीं कटा। एक महीने से स्टोर के चक्कर लगा रहे हैं। कभी कहा जाता है कि खंभे नहीं हैं, तो कभी कोई बहाना बना दिया जाता। उनसे रुपये की मांग नहीं की गई। उम्मरपुर निवासी सुखराम ने बताया कि रतीराम के नाम से कनेक्शन है। 66 नंबर वरीयता क्रम है। सुबह से आए, शाम तक गेटपास नहीं काटा गया। हालांकि रुपये किसी ने नहीं मांगे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
स्टोर के सहायक अभियंता विकास कुमार ने बताया कि वरीयता क्रम नंबर 105 तक ट्रांसफार्मर के गेटपास कट चुके हैं। जो किसान आता है, उसका वरीयता क्रम के अनुसार वह अपने सामने गेटपास कटवाकर ट्रांसफार्मर व अन्य पूरी सामग्री दी जाती है। रुपये लेने का आरोप गलत लगाया जा रहा है।
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फसलों में सिंचाई की सुविधा के लिए किसान निजी नलकूप लगवा रहे हैं। इसके लिए बिजली कनेक्शन लेने पर खंभा, तार, ट्रांसफार्मर आदि सामग्री के लिए विभाग में धनराशि जमा करते हैं। विभाग से यह फाइल स्टोर में पहुंचती है। यहां सामग्री लेने के लिए किसानों को स्टोर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ट्रांसफार्मर का गेटपास काटने के नाम पर किसानों से धन उगाही भी की जा रही है। बुधवार को ट्रांसफार्मर वितरण की जानकारी पर किसान सुबह से बेवर रोड स्थित बिजली विभाग के स्टोर पहुंच गए। वहां दोपहर तक इंतजार किया, फिर चढ़ावा चढ़ाने के बाद गेट पास कटा। उसमें भी एक बार में पूरी सामग्री नहीं मिल सकी।
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ठगे जा रहे किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-2 महेश।
शमसाबाद क्षेत्र के गांव रम्पुरा निवासी महेश ने बताया कि ठेकेदार के माध्यम उन्होंने नलकूप का कनेक्शन कराया। इसके लिए उसने एक लाख 45 हजार रुपये ठेकेदार को दिए। जबकि विभाग से मात्र एक लाख 11 हजार रुपये का एस्टीमेट बना। दो दिन पहले 3000 रुपये जमा करने के बाद सुबह आठ बजे ट्रांसफार्मर लेने आए और शाम तक इंतजार करना पड़ा। इसकी कोई रसीद नहीं मिली। फिर ट्रांसफार्मर व अन्य सामग्री की लोडिंग के लिए 3500 रुपये दिए। सामग्री पहुंचाने का भाड़ा अलग से देना पड़ेगा।
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फोटो-3 रामरहीस।
परतापुर तराई निवासी रामरहीस ने बताया कि उनकी मां के नाम नलकूप का कनेक्शन कराया। 2500 रुपये जमा करने के बाद गेटपास कटा। ट्रांसफार्मर लीकेज दे दिया गया। डीपी क्लेंप व अन्य सामग्री अभी नहीं मिली है। इसी गांव के जितेंद्र ने बताया कि उनकी मां मुन्नी देवी के नाम नलकूप का कनेक्शन कराया। 2500 रुपये देकर ट्रांसफार्मर का गेटपास कटाया। 2500 रुपये ट्रांसफार्मर लदवाई अलग से दिए। शाम तक इंतजार करना पड़ा।
फोटो-4 दिनेश।
नवाबगंज के गांव रसूलपुर निवासी दिनेश ने बताया कि उनका वरीयता क्रम नंबर 28 है। सुबह से बैठे हैं लेकिन गेटपास नहीं कटा। एक महीने से स्टोर के चक्कर लगा रहे हैं। कभी कहा जाता है कि खंभे नहीं हैं, तो कभी कोई बहाना बना दिया जाता। उनसे रुपये की मांग नहीं की गई। उम्मरपुर निवासी सुखराम ने बताया कि रतीराम के नाम से कनेक्शन है। 66 नंबर वरीयता क्रम है। सुबह से आए, शाम तक गेटपास नहीं काटा गया। हालांकि रुपये किसी ने नहीं मांगे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
स्टोर के सहायक अभियंता विकास कुमार ने बताया कि वरीयता क्रम नंबर 105 तक ट्रांसफार्मर के गेटपास कट चुके हैं। जो किसान आता है, उसका वरीयता क्रम के अनुसार वह अपने सामने गेटपास कटवाकर ट्रांसफार्मर व अन्य पूरी सामग्री दी जाती है। रुपये लेने का आरोप गलत लगाया जा रहा है।