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आंख के आपरेशन में चलता रहा ‘अंधा’ खेल
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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग में अंधता निवारण योजना में चार साल से मरीजों का सत्यापन नहीं हुआ है। बिना सत्यापन के 60 लाख के भुगतान की फाइल लाइन में लगी है। आपरेशन करने वालों में कायमगंज की कल्याण सेवा समिति भी शामिल है। अब सीबीआई लिखी एक कार भुगतान के लिए दबाव बना रही है।
सीएमओ कार्यालय में वर्ष 2018 से कोई भी नया टेंडर नहीं हुआ। अंधता निवारण योजना में आंख के आपरेशन के लिए चार वर्ष से तीन फर्मों को चयनित किया जा रहा है। इसमें दो फर्में कानपुर की, जबकि एक फर्म कायमगंज के नेत्र परीक्षक की कल्याण सेवा समिति शामिल है। योजना के तहत नेत्र शिविर लगाकर नेत्र परीक्षण, चश्मा वितरण व आपरेशन होते हैं। इन फर्मों की करीब 60 लाख रुपये के भुगतान के लिए सीएमओ कार्यालय में पत्रावलियां जमा हैं।
अब भुगतान के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। तत्कालीन सीएमओ की ओर से मरीजों का सत्यापन न होने से भुगतान लटका रहा। बताया जा रहा है कि आपरेशन कराने वाले अधिकांश मरीजों के न तो मोबाइल नंबर दर्ज हैं और न ही आधार कार्ड, उनका पता भी संदिग्ध लिखा है। गत वर्ष कुछ मरीजों का सत्यापन किया गया तो वह अपने पते पर मिले ही नहीं थे।
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इस वर्ष एक भी नहीं लगा नेत्र शिविर
अंधता निवारण व टेंडर का कई वर्षों से पटल देख रहे एआरओ वसीम खां ने बताया कि भुगतान के लिए फाइलें लगी हैं, लेकिन किसी भी फर्म को विभाग से भुगतान नहीं किया गया है। बीते साल 10 नेत्र शिविर लगाए गए थे। इस वर्ष अप्रैल से अब तक एक भी नेत्र शिविर नहीं लग सका है। शासन से अंधता निवारण योजना के तहत नौ लाख रुपये बजट मिला है।
इनकी भी सुनें
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि वर्ष 2018 से आंखों के आपरेशन संबंधी तीन फर्मों का करीब 60 लाख रुपये भुगतान बकाया है। विभाग से मरीजों का कोई सत्यापन नहीं हुआ है। फर्मों द्वारा ही मरीजों का विवरण दिया गया है। सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि अंधता निवारण में बिना जांच व सत्यापन के कोई भी भुगतान नहीं किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि उनके कार्यालय परिसर में दो-तीन दिन से सीबीआई लिखी कार घूमती देखी गई। इससे कार्यालय के काम में व्यवधान हो रहा है। इसके साथ ही विभाग की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र भेजा है।
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सीएमओ कार्यालय में वर्ष 2018 से कोई भी नया टेंडर नहीं हुआ। अंधता निवारण योजना में आंख के आपरेशन के लिए चार वर्ष से तीन फर्मों को चयनित किया जा रहा है। इसमें दो फर्में कानपुर की, जबकि एक फर्म कायमगंज के नेत्र परीक्षक की कल्याण सेवा समिति शामिल है। योजना के तहत नेत्र शिविर लगाकर नेत्र परीक्षण, चश्मा वितरण व आपरेशन होते हैं। इन फर्मों की करीब 60 लाख रुपये के भुगतान के लिए सीएमओ कार्यालय में पत्रावलियां जमा हैं।
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अब भुगतान के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। तत्कालीन सीएमओ की ओर से मरीजों का सत्यापन न होने से भुगतान लटका रहा। बताया जा रहा है कि आपरेशन कराने वाले अधिकांश मरीजों के न तो मोबाइल नंबर दर्ज हैं और न ही आधार कार्ड, उनका पता भी संदिग्ध लिखा है। गत वर्ष कुछ मरीजों का सत्यापन किया गया तो वह अपने पते पर मिले ही नहीं थे।
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इस वर्ष एक भी नहीं लगा नेत्र शिविर
अंधता निवारण व टेंडर का कई वर्षों से पटल देख रहे एआरओ वसीम खां ने बताया कि भुगतान के लिए फाइलें लगी हैं, लेकिन किसी भी फर्म को विभाग से भुगतान नहीं किया गया है। बीते साल 10 नेत्र शिविर लगाए गए थे। इस वर्ष अप्रैल से अब तक एक भी नेत्र शिविर नहीं लग सका है। शासन से अंधता निवारण योजना के तहत नौ लाख रुपये बजट मिला है।
इनकी भी सुनें
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि वर्ष 2018 से आंखों के आपरेशन संबंधी तीन फर्मों का करीब 60 लाख रुपये भुगतान बकाया है। विभाग से मरीजों का कोई सत्यापन नहीं हुआ है। फर्मों द्वारा ही मरीजों का विवरण दिया गया है। सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि अंधता निवारण में बिना जांच व सत्यापन के कोई भी भुगतान नहीं किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि उनके कार्यालय परिसर में दो-तीन दिन से सीबीआई लिखी कार घूमती देखी गई। इससे कार्यालय के काम में व्यवधान हो रहा है। इसके साथ ही विभाग की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र भेजा है।