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लोहिया में दो साल बाद ईएनटी की जांच शुरू
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लोहिया अस्पताल में जांच करता ऑडियोलॉजिस्ट। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। दो साल बाद लोहिया अस्पताल में फिर से ईएनटी की जांच शुरू कर दी गई है। लैब में ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती से मरीजों को मुफ्त जांच का लाभ मिलना शुरू हो गया है।
डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में ईएनटी सर्जन की सितंबर 2021 में संविदा पर तैनाती की गई थी। इसी दौरान जांच के लिए ऑडियोलॉजिस्ट मोहम्मद नवेद रहमानी की तैनाती लैब में हुई।
ईएनटी सर्जन की संविदा समाप्त होने और कोरोना के कारण जांचें बंद कर दी गईं। लिहाजा ऑडियोलॉजिस्ट की ड्यूटी कोरोना के नमूने लेने के लिए लगा दी गई।
कोरोना खत्म होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने ईएनटी जांच शुरू नहीं कराई, जिससे दूरदराज से आने वाले मरीजों को बाहर से महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था।
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एनएचएम के तहत कर्मचारी की तैनाती के बावजूद रिपोर्ट शून्य भेजी जाती रही। इस पर शासन से नाराजगी के बाद सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने सात सितंबर से लैब में दोबारा ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती कर जांच का काम शुरू करा दिया है।
इससे मरीजों राहत मिली है। अस्पताल में बनी जांच लैब साउंड लैस है। फाइवर की सीटें लगी हैं। आंख-कान व गला की जांच के लिए लगी कीमती मशीनें दो साल से जमीं धूल को साफ कर उनका प्रयोग शुरू किया गया।
अस्पताल की लैब में प्योरटोनऑडियोमेटरी, ऑटोअकोस्टिक एमीशन (नवजात के लिए), टिम्पेनोमेट्री (कान का पर्दा) की जांच की जाती है। निजी लैबों पर इन जांचों की फीस 1000 रुपये तक वसूल की जाती है।
ऑडियोलॉजिस्ट मोहम्मद नवेद रहमानी ने बताया कि नवजात शिशु की जांच अवश्य करानी चाहिए। बच्चे के कान, नाक और गले में यदि कोई कमी होगी तो तुरंत पता चल जाएगी। अधिकांश अभिभावक एक साल बाद जब बच्चा बोलता नहीं अथवा तुतलाता है, तब जांच कराते हैं।
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डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में ईएनटी सर्जन की सितंबर 2021 में संविदा पर तैनाती की गई थी। इसी दौरान जांच के लिए ऑडियोलॉजिस्ट मोहम्मद नवेद रहमानी की तैनाती लैब में हुई।
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ईएनटी सर्जन की संविदा समाप्त होने और कोरोना के कारण जांचें बंद कर दी गईं। लिहाजा ऑडियोलॉजिस्ट की ड्यूटी कोरोना के नमूने लेने के लिए लगा दी गई।
कोरोना खत्म होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने ईएनटी जांच शुरू नहीं कराई, जिससे दूरदराज से आने वाले मरीजों को बाहर से महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था।
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एनएचएम के तहत कर्मचारी की तैनाती के बावजूद रिपोर्ट शून्य भेजी जाती रही। इस पर शासन से नाराजगी के बाद सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने सात सितंबर से लैब में दोबारा ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती कर जांच का काम शुरू करा दिया है।
इससे मरीजों राहत मिली है। अस्पताल में बनी जांच लैब साउंड लैस है। फाइवर की सीटें लगी हैं। आंख-कान व गला की जांच के लिए लगी कीमती मशीनें दो साल से जमीं धूल को साफ कर उनका प्रयोग शुरू किया गया।
अस्पताल की लैब में प्योरटोनऑडियोमेटरी, ऑटोअकोस्टिक एमीशन (नवजात के लिए), टिम्पेनोमेट्री (कान का पर्दा) की जांच की जाती है। निजी लैबों पर इन जांचों की फीस 1000 रुपये तक वसूल की जाती है।
ऑडियोलॉजिस्ट मोहम्मद नवेद रहमानी ने बताया कि नवजात शिशु की जांच अवश्य करानी चाहिए। बच्चे के कान, नाक और गले में यदि कोई कमी होगी तो तुरंत पता चल जाएगी। अधिकांश अभिभावक एक साल बाद जब बच्चा बोलता नहीं अथवा तुतलाता है, तब जांच कराते हैं।