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Farrukhabad News: दूसरों के दुख को दूर करने के लिए करना पड़ता सुख का त्याग
Wed, 02 Apr 2025 11:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 02 Apr 2025 11:38 PM IST
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प्राचीन अस्तल ठाकुर मंदिर पर रामकथा सुनते भक्त।
- फोटो : प्राचीन अस्तल ठाकुर मंदिर पर रामकथा सुनते भक्त।
अमृतपुर। दूसरों के दुख दूर करने के लिए स्वयं के सुख का त्याग करना पड़ता है। जो स्वयं मुसीबतों से डरता है। वह मनुष्य दूसरे की पीड़ा को दूर नहीं कर पाता है। भक्तों के दुख को दूर करने किए ही भगवान राम ने वन जाना स्वीकार किया था।
प्राचीन अस्तल ठाकुर द्वारा मंदिर परिसर में चल रही रामकथा के चौथे दिन राम वनगमन की कथा हुई। कथा व्यास आचार्य अरविंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने संसार का दुख दूर करने के लिए अपनी इच्छा से वनवास जाना स्वीकार किया था। माता कैकेयी ने अपने प्रिय पुत्र को वन भेजकर लोकनिंदा का विष पीया।
राजा दशरथ ने प्राणों का त्याग कर दिया। मंत्री सुमंत, राजा दशरथ के परिवार ने राष्ट्र सेवा और सनातन धर्म की रक्षा में अपने सारे सुख बलिदान कर डाले। कहा कि स्वयं के लिए तो जीवन पशु भी जीते हैं। जो मनुष्य वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से जीता है, उसी का जीवन धन्य होता है। इस दौरान संत मोहनदास, लालदास, अवधेश रघुवंशी, अशोक पाठक, अजय कुमार सिंह चौहान, रामकुमार सिंह, रामचन्द्र आदि रहे।
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प्राचीन अस्तल ठाकुर द्वारा मंदिर परिसर में चल रही रामकथा के चौथे दिन राम वनगमन की कथा हुई। कथा व्यास आचार्य अरविंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने संसार का दुख दूर करने के लिए अपनी इच्छा से वनवास जाना स्वीकार किया था। माता कैकेयी ने अपने प्रिय पुत्र को वन भेजकर लोकनिंदा का विष पीया।
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राजा दशरथ ने प्राणों का त्याग कर दिया। मंत्री सुमंत, राजा दशरथ के परिवार ने राष्ट्र सेवा और सनातन धर्म की रक्षा में अपने सारे सुख बलिदान कर डाले। कहा कि स्वयं के लिए तो जीवन पशु भी जीते हैं। जो मनुष्य वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से जीता है, उसी का जीवन धन्य होता है। इस दौरान संत मोहनदास, लालदास, अवधेश रघुवंशी, अशोक पाठक, अजय कुमार सिंह चौहान, रामकुमार सिंह, रामचन्द्र आदि रहे।
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