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ई-पास की कहानी, मुश्किल में फंसी जिंदगानी
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कलक्ट्रेट में खड़े शादाब। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। कोरोना वायरस से बचाव को लॉकडाउन चल रहा है। वहीं बाहर से इलाज कराने वालों को ई-पास की व्यवस्था की गई। अब कहीं इंटरनेट की समस्या तो कहीं जानकारी का अभाव होने से लोगों को ई-पास के लिए आवेदन करना ही टेढ़ी खीर हो गई। इससे गैर जनपद से इलाज कराने वाले लोगों की जिंदगी संकट में है। रविवार को कलक्ट्रेट में मिले कुछ लोगों ने अपना दर्द बयां किया।
कोरोना वायरस के नियंत्रण को लॉकडाउन में गैर जनपद या गैर प्रांत में इलाज कराने वाले मरीजों के सामने बड़ी समस्या है। ई-पास की सुविधा गैर जनपद तक सीमित है। इससे गैर प्रांत में इलाज कराने वाले वहीं फंस गए हैं।
केस-1 शहर के टाउन हाल निवासी शादाब कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके बहनोई रायबरेली निवासी इश्तियाक हुसैन नकवी एनटीपीसी में कार्यरत हैं। ब्रेन ट्यूमर होने से 20 फरवरी को इश्तियाक का दिल्ली के मैक्स हास्पिटल में आपरेशन हुआ। 25 मार्च को उन्हें सिकाई कराने दिल्ली जाना था। इस बीच लॉकडाउन हो गया। इससे वह अब तक सिकाई कराने नहीं जा पाए। 30 अप्रैल को इश्तियाक का रिटायरमेंट है। इससे उन्हें सिकाई कराने के साथ देयकों के भुगतान को भी अपने आफिस भी जाना है। ई-पास के लिए आवेदन किया तो निरस्त कर दिया गया। इससे वह प्रार्थनापत्र लेकर एडीएम से स्वीकृत कराने आए थे। हालांकि एडीएम के मौजूद न मिल पाने से वह लौट गए।
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केस-2 कमालगंज क्षेत्र के गांव कंधरापुर निवासी अशोक कटियार (70) ने बताया कि उनकी पत्नी शकुंतला का कानपुर में 18 मार्च को आपरेशन हुआ। 21 मार्च को डिस्चार्ज होने पर उन्हें किराए के मकान में रह रहे पुत्र रितेश के पास कानपुर में ही रोक दिया। अब घर में मरीज होने की वजह से मकान मालिक ऐतराज करते हैं। इससे उन्हें पत्नी को लेकर वापस आना है। ई-पास के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं हो पा रहा है। इससे वह एडीएम को प्रार्थनापत्र देने आए हैं। हालांकि एडीएम विवेक श्रीवास्तव ने उन्हें ई-पास जारी करने का आश्वासन दिया है।
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कोरोना वायरस के नियंत्रण को लॉकडाउन में गैर जनपद या गैर प्रांत में इलाज कराने वाले मरीजों के सामने बड़ी समस्या है। ई-पास की सुविधा गैर जनपद तक सीमित है। इससे गैर प्रांत में इलाज कराने वाले वहीं फंस गए हैं।
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केस-1 शहर के टाउन हाल निवासी शादाब कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके बहनोई रायबरेली निवासी इश्तियाक हुसैन नकवी एनटीपीसी में कार्यरत हैं। ब्रेन ट्यूमर होने से 20 फरवरी को इश्तियाक का दिल्ली के मैक्स हास्पिटल में आपरेशन हुआ। 25 मार्च को उन्हें सिकाई कराने दिल्ली जाना था। इस बीच लॉकडाउन हो गया। इससे वह अब तक सिकाई कराने नहीं जा पाए। 30 अप्रैल को इश्तियाक का रिटायरमेंट है। इससे उन्हें सिकाई कराने के साथ देयकों के भुगतान को भी अपने आफिस भी जाना है। ई-पास के लिए आवेदन किया तो निरस्त कर दिया गया। इससे वह प्रार्थनापत्र लेकर एडीएम से स्वीकृत कराने आए थे। हालांकि एडीएम के मौजूद न मिल पाने से वह लौट गए।
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केस-2 कमालगंज क्षेत्र के गांव कंधरापुर निवासी अशोक कटियार (70) ने बताया कि उनकी पत्नी शकुंतला का कानपुर में 18 मार्च को आपरेशन हुआ। 21 मार्च को डिस्चार्ज होने पर उन्हें किराए के मकान में रह रहे पुत्र रितेश के पास कानपुर में ही रोक दिया। अब घर में मरीज होने की वजह से मकान मालिक ऐतराज करते हैं। इससे उन्हें पत्नी को लेकर वापस आना है। ई-पास के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं हो पा रहा है। इससे वह एडीएम को प्रार्थनापत्र देने आए हैं। हालांकि एडीएम विवेक श्रीवास्तव ने उन्हें ई-पास जारी करने का आश्वासन दिया है।