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डलिया कारीगरों से डीएम मिले, दिया जाएगा प्रशिक्षण
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गांव रजीपुर में डलिया देखते डीएम मानवेंद्र सिंह। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कमालगंज। पला, डलिया व झौआ बनाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली महिलाओं को अब राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जोड़ने की तैयारी है। जिलाधिकारी ने गुरुवार को रजीपुर पहुंच कर डलिया कारीगरों से बात कर समस्याएं जानीं। डीएम ने सभी कारीगरों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दिलाने के निर्देश दिए।
अमर उजाला में बुधवार को रजीपुर में फिर शुरू हुआ डलिया बनाने का कार्य शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था। इसका संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने डलिया तैयार करने वाले कारीगरों की समस्याओं को जानने व उनकी आर्थिक उन्नति के लिए संभावना तलाशने के निर्देश बीडीओ को दिए थे। इस पर एडीओ निरंजन त्रिवेदी ने बुधवार को ही रजीपुर पहुंचकर डलिया कारीगरों से बात की थी। गुरुवार को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह भी बीडीओ राजेश बघेल के साथ रजीपुर पहुंचे।
उन्होंने प्राथमिक विद्यालय परिसर में डलिया व पला तैयार करने वाले ओमप्रकाश, देवेंद्र प्रताप, गंगा सहाय, कैलाश व सेवंत आदि से बात की। कारीगरों ने कहा कि फर्रुखाबाद में अरहर का उत्पादन बहुत कम हो गया है। इससे हम लोगों को मध्यप्रदेश व बुंदेलखंड से अरहर की लकड़ी, डलिया व पला आदि लानी पड़ती है। लागत भी बढ़ गई है। 50 रुपये की लकड़ी एक पला तैयार करने में लग जाती है। 75 रुपये में बिकता है। डीएम ने बीडीओ व एडीओ को निर्देशित किया कि कारीगरों के कौशल व आर्थिक उन्नति के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दिलाई जाए। समूह गठित हो जाए तो बिना ब्याज के 1.25 लाख व्यवसाय संचालन को ऋण मिल सकेगा। ब्लाक मिशन मैनेजर प्रदीप कुमार को भी समूह गठन के लिए महिलाओं को प्रेरित करने के लिए जिम्मेदारी दी।
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अमर उजाला में बुधवार को रजीपुर में फिर शुरू हुआ डलिया बनाने का कार्य शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था। इसका संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने डलिया तैयार करने वाले कारीगरों की समस्याओं को जानने व उनकी आर्थिक उन्नति के लिए संभावना तलाशने के निर्देश बीडीओ को दिए थे। इस पर एडीओ निरंजन त्रिवेदी ने बुधवार को ही रजीपुर पहुंचकर डलिया कारीगरों से बात की थी। गुरुवार को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह भी बीडीओ राजेश बघेल के साथ रजीपुर पहुंचे।
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उन्होंने प्राथमिक विद्यालय परिसर में डलिया व पला तैयार करने वाले ओमप्रकाश, देवेंद्र प्रताप, गंगा सहाय, कैलाश व सेवंत आदि से बात की। कारीगरों ने कहा कि फर्रुखाबाद में अरहर का उत्पादन बहुत कम हो गया है। इससे हम लोगों को मध्यप्रदेश व बुंदेलखंड से अरहर की लकड़ी, डलिया व पला आदि लानी पड़ती है। लागत भी बढ़ गई है। 50 रुपये की लकड़ी एक पला तैयार करने में लग जाती है। 75 रुपये में बिकता है। डीएम ने बीडीओ व एडीओ को निर्देशित किया कि कारीगरों के कौशल व आर्थिक उन्नति के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दिलाई जाए। समूह गठित हो जाए तो बिना ब्याज के 1.25 लाख व्यवसाय संचालन को ऋण मिल सकेगा। ब्लाक मिशन मैनेजर प्रदीप कुमार को भी समूह गठन के लिए महिलाओं को प्रेरित करने के लिए जिम्मेदारी दी।
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