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दिवाली मेलाः 150 के लक्ष्य के सापेक्ष लगे 17 स्टाल
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क्रिश्चियन कालेज मैदान में लगे दीवाली मेले में खाली पड़े काउंटर। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री के आदेश पर क्रिश्चियन मैदान में लगे दिवाली मेले में 150 स्टाल के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 17 ही लगाए जा सके हैं। प्रशासन ने कुल 48 स्टाल के लिए टेंट लगाए हैं। इनमें 31 खाली पड़े हैं। मेले में लोगों का पहुंचना भी शुरू नहीं हुआ हैै।
कोरोना काल में आर्थिक रूप से परेशान छोटे दुकानदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से लगाए गए मेले में दुकानें तक नहीं पहुंची हैं। प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं ने आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के बीच मेले का शुभारंभ कर दिया। जिम्मेदार विभाग ने मेले का प्रचार-प्रसार तक नहीं किया। यही वजह रही कि न तो दुकानदार पहुंच रहे और न ही लोगों का आना शुरू हुआ है। इससे नहीं लगता कि शासन की मंशा के अनुरूप जरूरतमंदों को मेले का लाभ पहुंचेगा।
मेले में टेंट के कुल 48 स्टाल लगाए गए हैं। इनमें से मात्र 17 में बैनर टंगे हैं। कई में तो विभागीय बैनर टांग कर कुछ पंपलेट रख दिए गए हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए सिर्फ एक उछलकूद करने वाला झूला लगा है।
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आप सीसीटीवी कैमरे की नजर में हैं। यह बात लिखे बैनर मेले में कई स्थानों पर लगे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है, मुख्य गेट से घुसते ही पश्चिम तरफ लगा सीसीटीवी का सेटअप शुक्रवार दोपहर 12 बजे बंद पड़ा था। उसमें कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था।
नगर पालिका परिषद ने एक मोबाइल टॉयलेट खड़ा किया है। उसमें पानी तक की व्यवस्था नहीं है। अब यदि किसी को शौच जाना है, तो वह पहले पानी के लिए बोतल की व्यवस्था करे। उसके बाद ही टॉयलेट का प्रयोग करना संभव होगा। इससे लोग परेशान हैं।
मेले में दोपहर के वक्त पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं की गई थी। लिहाजा कुछ काउंटरों पर बैठे लोग पानी के लिए हैंडपंप की तलाश में दिखे। पालिका ने टैंकर खड़ा करवाने की जरूरत नहीं समझी।
‘मेला पहली बार लग रहा है। छोटे दुकानदार जहां बैठते हैं, वहां से अपनी दुकानदारी खराब नहीं करना चाहते। इसीलिए मेले में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। अब शुरुआत हो गई है, तो भविष्य में मेला कारगर साबित होगा। जो व्यवस्थाएं बची हैं, वह शीघ्र पूरी कर दी जाएंगी।’
- जयविजय सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा।
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कोरोना काल में आर्थिक रूप से परेशान छोटे दुकानदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से लगाए गए मेले में दुकानें तक नहीं पहुंची हैं। प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं ने आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के बीच मेले का शुभारंभ कर दिया। जिम्मेदार विभाग ने मेले का प्रचार-प्रसार तक नहीं किया। यही वजह रही कि न तो दुकानदार पहुंच रहे और न ही लोगों का आना शुरू हुआ है। इससे नहीं लगता कि शासन की मंशा के अनुरूप जरूरतमंदों को मेले का लाभ पहुंचेगा।
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मेले में टेंट के कुल 48 स्टाल लगाए गए हैं। इनमें से मात्र 17 में बैनर टंगे हैं। कई में तो विभागीय बैनर टांग कर कुछ पंपलेट रख दिए गए हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए सिर्फ एक उछलकूद करने वाला झूला लगा है।
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आप सीसीटीवी कैमरे की नजर में हैं। यह बात लिखे बैनर मेले में कई स्थानों पर लगे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है, मुख्य गेट से घुसते ही पश्चिम तरफ लगा सीसीटीवी का सेटअप शुक्रवार दोपहर 12 बजे बंद पड़ा था। उसमें कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था।
नगर पालिका परिषद ने एक मोबाइल टॉयलेट खड़ा किया है। उसमें पानी तक की व्यवस्था नहीं है। अब यदि किसी को शौच जाना है, तो वह पहले पानी के लिए बोतल की व्यवस्था करे। उसके बाद ही टॉयलेट का प्रयोग करना संभव होगा। इससे लोग परेशान हैं।
मेले में दोपहर के वक्त पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं की गई थी। लिहाजा कुछ काउंटरों पर बैठे लोग पानी के लिए हैंडपंप की तलाश में दिखे। पालिका ने टैंकर खड़ा करवाने की जरूरत नहीं समझी।
‘मेला पहली बार लग रहा है। छोटे दुकानदार जहां बैठते हैं, वहां से अपनी दुकानदारी खराब नहीं करना चाहते। इसीलिए मेले में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। अब शुरुआत हो गई है, तो भविष्य में मेला कारगर साबित होगा। जो व्यवस्थाएं बची हैं, वह शीघ्र पूरी कर दी जाएंगी।’
- जयविजय सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा।