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देहात में प्रसव सुविधा ध्वस्त
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 01 Apr 2015 11:10 PM IST
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देहात इलाके में प्रसव की सुविधा मुहैया कराने के लिए एएनएम सेंटर यानी
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उपकेंद्र खोले गए हैं। 93 उपकेंद्रों पर प्रसव की सुविधा ही नहीं है। इससे
उपकेंद्र इलाके में आने वाली प्रसूताओं को शहर तक दौड़ लगानी पड़ती है।
सीएमओ की मानें तो कहीं भी दिक्कत नहीं है। सभी केंद्र चल रहे हैं।
जिले की 87 न्याय पंचायतों में 185 एएनएम सेंटर हैं। इन सेंटरों को देहात इलाके में ही सामान्य प्रसव की सुविधा मुहैया कराने के मकसद से खोला गया था। इनकी जिम्मेदारी एएनएम को दी गई थी। स्वास्थ्य महकमे के रिकार्ड के मुताबिक 92 केंद्रों पर ही प्रसव हो रहे हैं। बाकी केंद्र देखने भर को हैं। यह कें द्र नियमित खुलते भी नहीं हैं। इससे गांव के लोगों को प्रसव के
लिए शहर या कस्बाई इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की दौड़ लगानी पड़ती है। एक माह में कम से कम तीन प्रसव होने पर ही केंद्र को संचालित माना जाता है। उपकेंद्रों पर प्रसव न होने से प्रसूताओं की जान को भी जोखिम रहता है।
उपकेंद्रों पर प्रसव न होने के पीछे एएनएम की लापरवाही बताई जाती है। यह गांव में नहीं रुकतीं। क ई केंद्रों पर बिजली,
पानी, शौचालय की दिक्कत है। यहां प्रसव की सुविधाएं ही मुहैया नहीं हैं। 23 केंद्र किराए के मकान में चल रहे हैं। इनके भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। सीएमओ डा. राकेश कुमार का कहना है कि सभी केंद्र चल रहे हैं। जहां एएनएम नहीं हैं, वहां इसकी जिम्मेदारी दूसरी एएनएम को दी गई है।
जिले की 87 न्याय पंचायतों में 185 एएनएम सेंटर हैं। इन सेंटरों को देहात इलाके में ही सामान्य प्रसव की सुविधा मुहैया कराने के मकसद से खोला गया था। इनकी जिम्मेदारी एएनएम को दी गई थी। स्वास्थ्य महकमे के रिकार्ड के मुताबिक 92 केंद्रों पर ही प्रसव हो रहे हैं। बाकी केंद्र देखने भर को हैं। यह कें द्र नियमित खुलते भी नहीं हैं। इससे गांव के लोगों को प्रसव के
लिए शहर या कस्बाई इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की दौड़ लगानी पड़ती है। एक माह में कम से कम तीन प्रसव होने पर ही केंद्र को संचालित माना जाता है। उपकेंद्रों पर प्रसव न होने से प्रसूताओं की जान को भी जोखिम रहता है।
उपकेंद्रों पर प्रसव न होने के पीछे एएनएम की लापरवाही बताई जाती है। यह गांव में नहीं रुकतीं। क ई केंद्रों पर बिजली,
पानी, शौचालय की दिक्कत है। यहां प्रसव की सुविधाएं ही मुहैया नहीं हैं। 23 केंद्र किराए के मकान में चल रहे हैं। इनके भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। सीएमओ डा. राकेश कुमार का कहना है कि सभी केंद्र चल रहे हैं। जहां एएनएम नहीं हैं, वहां इसकी जिम्मेदारी दूसरी एएनएम को दी गई है।