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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में लोक संस्कृति की छटा
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मालगंज के आरपी कालेज में प्रस्तुति देते छात्र।
- फोटो : FARRUKHABAD
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में लोक संस्कृति की छटा
कमालगंज। आरपी डिग्री कॉलेज के सभागार में मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। वीर नारियों के दर्द व उनके पति के शौर्य को उभारते गीतों ने मन मोह लिया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित नाटकों ने भी प्रभावित किया।
प्रबंधक अश्वनी कुमार वर्मा व प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने बीएड विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। छात्रा अदिति व सृष्टि दुबे ने सरस्वती वंदना की। साधना ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। गुंजन दुबे ने लड़की भी नाम रोशन करती है गीत से प्रशंसा पाई। विकास ने कबीरदास के दोहों का महत्व रेखांकित किया।
प्रियंका सिंह ने नृत्य से राजस्थानी लोक संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। आशुतोष ने कभी न जलने देना भेदभाव की होली गीत सुनाया। प्रियांशी हलवाई व उनकी टोली ने विदेश से आए युवक को भारतीय संस्कृति के आभा से परिचित कराया। प्रज्ञा तिवारी ने शहीदों की पत्नियों के दर्द व जवानों के शौर्य को समर्पित प्रस्तुति दी।
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प्राची कुशवाह ने गाने पर धमाल मचाया। गौरी चौहान ने मां तेरे बिन कहां जी पाऊंगी गीत सुनाया। मोहित, प्रिया सक्सेना, दुर्गा, मोहम्मद अली ने भी प्रस्तुति दी। उन्नति पांडेय व हर्ष ने संचालन किया। तरन्नुम, प्रभात, लखन, रवीश, सादाव आदि ने व्यवस्था की। प्रो.सुबोध वर्मा, आरके सिंह, विष्णु भगवान सिंह, माधुरी वर्मा, करुणेश पांडेय आदि रहे।
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कमालगंज। आरपी डिग्री कॉलेज के सभागार में मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। वीर नारियों के दर्द व उनके पति के शौर्य को उभारते गीतों ने मन मोह लिया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित नाटकों ने भी प्रभावित किया।
प्रबंधक अश्वनी कुमार वर्मा व प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने बीएड विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। छात्रा अदिति व सृष्टि दुबे ने सरस्वती वंदना की। साधना ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। गुंजन दुबे ने लड़की भी नाम रोशन करती है गीत से प्रशंसा पाई। विकास ने कबीरदास के दोहों का महत्व रेखांकित किया।
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प्रियंका सिंह ने नृत्य से राजस्थानी लोक संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। आशुतोष ने कभी न जलने देना भेदभाव की होली गीत सुनाया। प्रियांशी हलवाई व उनकी टोली ने विदेश से आए युवक को भारतीय संस्कृति के आभा से परिचित कराया। प्रज्ञा तिवारी ने शहीदों की पत्नियों के दर्द व जवानों के शौर्य को समर्पित प्रस्तुति दी।
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प्राची कुशवाह ने गाने पर धमाल मचाया। गौरी चौहान ने मां तेरे बिन कहां जी पाऊंगी गीत सुनाया। मोहित, प्रिया सक्सेना, दुर्गा, मोहम्मद अली ने भी प्रस्तुति दी। उन्नति पांडेय व हर्ष ने संचालन किया। तरन्नुम, प्रभात, लखन, रवीश, सादाव आदि ने व्यवस्था की। प्रो.सुबोध वर्मा, आरके सिंह, विष्णु भगवान सिंह, माधुरी वर्मा, करुणेश पांडेय आदि रहे।