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दोस्तों संग बेटे ने ही की थी पिता की हत्या
farrukhabad
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:00 AM IST
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हत्या का खुलासा करते एसपी दयानंद मिश्र, साथ में पकड़े गए आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद/अमृतपुर। चपरा गांव में 27 अगस्त को हुए वृद्ध हत्याकांड का एसपी ने शुक्रवार को खुलासा कर दिया। पुलिस की मानें तो विरोधियों को फंसाने के लिए बेटे ने ही अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी बेटे समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीन अन्य की तलाश जारी है।
एसपी दयानंद मिश्रा ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में पत्रकारों को बताया कि थाना अमृतपुर के गांव चपरा निवासी वृद्ध विश्राम सिंह 27 अगस्त की रात घर के बाहर सो रहे थे। देर रात विश्राम की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। घटना की सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की थी। मृतका की पत्नी विटोली की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही बटेश्वर, जसकरन, रामपाल, शिवपाल के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने उसी रात चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया था।
एसपी ने बताया कि प्रथमदृष्टया जांच के बाद घटना वाले दिन से ही पुलिस नामजदगी को गलत मान कर छानबीन कर रही थी। पकड़े गए आरोपियों से दो बार एएसपी त्रिभुवन सिंह ने भी पूछताछ की। कोई हल न निकलने पर पुलिस ने गुरुवार की रात पकड़े गए आरोपियों को छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने मृतक के बेटे रमेश और उसके साथी गांव रंपुरा निवासी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया। उससे कड़ाई से पूछताछ की तो सच सामने आ गया।
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एसपी ने बताया कि दिल्ली से आने के बाद रमेश 23 अगस्त को घर न जाकर अपने दोस्त राजकुमार के घर पर रुका और चार दिनों तक वहीं ठहरा। 27 तारीख को इन लोगों के अलावा इनके तीन अन्य साथियों ने गूजरपुर ठेके पर शराब पी। इसके बाद सभी लोग रात में रमेश के घर आए और उसके पिता विश्राम को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद मृतक का बेटा और उसके चारों साथी भाग गए। एसपी ने बताया कि नामजद आरोपियों को फंसाने के लिए यह घटना की गई थी। हत्या में शामिल रहे गांव नगला खुशहाली निवासी सत्यवीर यादव, श्यामवीर व सरपंच की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एसपी ने खुलासा करने वालाी टीम को ढाई हजार का ईनाम दिया है।
इससे पहले भी दोनों पक्षों में दर्ज हुए थे मुकदमे
अमृतपुर। एसओ नरेंद्र गौतम ने बताया कि 1998 में मृतक के बड़े भाई मुक्ताप्रसाद को गोली मार कर घायल कर दिया गया था। इसमें शिवपाल समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद बटेश्वर के भाई रक्षपाल ने 2004 में रमेश के खिलाफ कुकर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में रमेश को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। रमेश ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें वह जमानत पर चल रहा था। दोनों परिवार वालों के बीच काफी समय से रंजिश चल रही है। इससे नाराज रमेश ने शिवपाल व अन्य को फंसाने के लिए अपने ही पिता को मार डाला।
सर्विलांस ने सुलझाई गुत्थी
अमृतपुर। थानाध्यक्ष नरेंद्र गौतम ने बताया कि वारदात के बाद रमेश के मोबाइल की काल डिटेल निकलवाई गई। इससे उसकी दोस्तों के साथ हुई बातचीत और लोकेशन का ब्यौरा सामने आया। शक होने पर जब इस दिशा में जांच शुरू की गई तो केस की गुत्थी सुलझती चली गई। उसने दिल्ली से आने के बाद चार दिन यहां बिताने की जानकारी परिजनों तक को नहीं दी थी।
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एसपी दयानंद मिश्रा ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में पत्रकारों को बताया कि थाना अमृतपुर के गांव चपरा निवासी वृद्ध विश्राम सिंह 27 अगस्त की रात घर के बाहर सो रहे थे। देर रात विश्राम की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। घटना की सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की थी। मृतका की पत्नी विटोली की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही बटेश्वर, जसकरन, रामपाल, शिवपाल के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने उसी रात चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया था।
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एसपी ने बताया कि प्रथमदृष्टया जांच के बाद घटना वाले दिन से ही पुलिस नामजदगी को गलत मान कर छानबीन कर रही थी। पकड़े गए आरोपियों से दो बार एएसपी त्रिभुवन सिंह ने भी पूछताछ की। कोई हल न निकलने पर पुलिस ने गुरुवार की रात पकड़े गए आरोपियों को छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने मृतक के बेटे रमेश और उसके साथी गांव रंपुरा निवासी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया। उससे कड़ाई से पूछताछ की तो सच सामने आ गया।
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एसपी ने बताया कि दिल्ली से आने के बाद रमेश 23 अगस्त को घर न जाकर अपने दोस्त राजकुमार के घर पर रुका और चार दिनों तक वहीं ठहरा। 27 तारीख को इन लोगों के अलावा इनके तीन अन्य साथियों ने गूजरपुर ठेके पर शराब पी। इसके बाद सभी लोग रात में रमेश के घर आए और उसके पिता विश्राम को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद मृतक का बेटा और उसके चारों साथी भाग गए। एसपी ने बताया कि नामजद आरोपियों को फंसाने के लिए यह घटना की गई थी। हत्या में शामिल रहे गांव नगला खुशहाली निवासी सत्यवीर यादव, श्यामवीर व सरपंच की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एसपी ने खुलासा करने वालाी टीम को ढाई हजार का ईनाम दिया है।
इससे पहले भी दोनों पक्षों में दर्ज हुए थे मुकदमे
अमृतपुर। एसओ नरेंद्र गौतम ने बताया कि 1998 में मृतक के बड़े भाई मुक्ताप्रसाद को गोली मार कर घायल कर दिया गया था। इसमें शिवपाल समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद बटेश्वर के भाई रक्षपाल ने 2004 में रमेश के खिलाफ कुकर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में रमेश को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। रमेश ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें वह जमानत पर चल रहा था। दोनों परिवार वालों के बीच काफी समय से रंजिश चल रही है। इससे नाराज रमेश ने शिवपाल व अन्य को फंसाने के लिए अपने ही पिता को मार डाला।
सर्विलांस ने सुलझाई गुत्थी
अमृतपुर। थानाध्यक्ष नरेंद्र गौतम ने बताया कि वारदात के बाद रमेश के मोबाइल की काल डिटेल निकलवाई गई। इससे उसकी दोस्तों के साथ हुई बातचीत और लोकेशन का ब्यौरा सामने आया। शक होने पर जब इस दिशा में जांच शुरू की गई तो केस की गुत्थी सुलझती चली गई। उसने दिल्ली से आने के बाद चार दिन यहां बिताने की जानकारी परिजनों तक को नहीं दी थी।