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पुलिसिया लापरवाही का नतीजा है अनिल हत्याकांड
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:35 PM IST
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अनिल हत्याकांड पुलिसिया लापरवाही का नतीजा है। अनिल के परिजनों ने कई बार
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पुलिस से जानमाल की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।
इतना ही नहीं एक बार भी आरोपियों से पूछताछ भी नहीं की गई। इसी का परिणाम
है कि बेखौफ दूसरे पक्ष ने बुधवार सुबह ताबड़तोड़ गोली मार कर अनिल को मौत
के घाट सुला दिया।
दरअसल यह हत्याकांड सात साल पहले हुई हत्या के बदले हुई है। थाना मऊदरवाजा के गांव कुइयंाबूट निवासी मजहब सिंह सरदार तीन साल पहले शहर कोतवाली के मोहल्ला काली देवी शिवनगर कालोनी में रहता था। यहां रहने वाले संजीव कुमार से प्लाट पर कब्जे को लेकर रंजिश हुई। इसी बीच 16 दिसंबर 2007 को संजीव के भाई शैलेंद्र उर्फ लल्ला पेंटर की हत्या कर दी गई।
इस मामले में चंद्रजीत उर्फ छैला, इंद्रजीत, अनिल और इनकी मां धनकौर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कोर्ट में अनिल और इंद्रजीत को नाबालिग बताया गया था। चंद्रजीत और धनकौर को सजा सुनाई गई। इसके बाद से ही दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा।
आरोप है कि संजीव अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अनिल को निशाना बनाता रहा। इसकी जानकारी होने पर मजहब सिंह ने पुलिस से लिखित में शिकायत की। इतना ही नहीं मजहब सिंह और अनिल ने पुलिस के आला अधिकारियों को भी इस संबंध में फैक्स भेजकर जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
इसके बाद भी पुलिस ने इस मामले में जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। अनिल के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने एक बार भी संजीव से पूछताछ नहीं की, जिसका नतीजा है कि उसके हौंसले बुलंद रहे।
शहर कोतवाल की बातों पर भड़के परिजन
अनिल की मौत के बाद परिवार के लोग पुलिसकर्मियों से भड़क गए थे। इस बीच शहर कोतवाल आरपी यादव ने परिजनों से गलतबयानी कर दी। यह सुनकर परिजनों का आक्रोश भड़क गया। कोतवाल को अपनी हद में रहने की भी इन्हाेंने हिदायत दी।
मृतक की बहन का हो चुका अपहरण, नहीं लगा सुराग
मजहब सिंह की बेटी का पिछले साल संजीव और उसके साथी अपहरण कर ले गए थे। इस मामले की परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन अभी तक किशोरी का कोई सुराग नही लगा। पीड़ित पिता अपनी बेटी की बरामदगी के लिए डीएम, एसपी से लेकर आलाधिकारियों को भी पत्र देकर गुहार लगा चुका है।
पिता का कहना था कि वह पुलिस की खामोशी से पूरा परिवार टूट चुका है। उसके परिवार के साथ लगातार घटनाएं हो रही हैं। अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसके प्लाट पर भी कब्जा हो चुका है। अभी तक पुलिस उसकी बेटी को बरामद नहीं कर सकी है। लोहिया अस्पताल में मजहब सिंह रो रोकर पुलिस को कोस रहा था। गुस्से में मजहब सिंह ने कहा कि अब वह बेटी के अपहरणकर्ताओं के साथ ही बेटे के हत्यारों से खुद ही निपट लेगा।
सीओ सिटी पर दो लाख लेने का आरोप
फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल से अनिल का शव लेकर परिजन रास्ता जाम करने आवास विकास तिराहा जा रहे थे। तभी लोहिया गेट के पास सीओ ने रोक लिया। इस बीच सीओ और अनिल के परिजनों में नोंकझोंक हुई। अनिल के परिवारी सुरजीत के चार साल के बेटे को रेलवे रोड स्थित डा. रवींद्र दुबे के यहां बीमार होने पर भर्ती कराया था।
जहां लापरवाही के चलते बच्चे की मौत हो गई थी। इस पर परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि सीओ सिटी ने दो लाख रुपये लेकर उसमें एफआर लगा दी थी। सीओ सिटी वाईपी सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट लिखी गई थी।
डाक्टरों के पैनल से मिली रिपोर्ट पर ही एफआर और चार्जशीट की कार्रवाई होती है। पैनल की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप गलत पाए जाने पर एफआर लगाई गई थी। रुपये लिए जाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं।
दरअसल यह हत्याकांड सात साल पहले हुई हत्या के बदले हुई है। थाना मऊदरवाजा के गांव कुइयंाबूट निवासी मजहब सिंह सरदार तीन साल पहले शहर कोतवाली के मोहल्ला काली देवी शिवनगर कालोनी में रहता था। यहां रहने वाले संजीव कुमार से प्लाट पर कब्जे को लेकर रंजिश हुई। इसी बीच 16 दिसंबर 2007 को संजीव के भाई शैलेंद्र उर्फ लल्ला पेंटर की हत्या कर दी गई।
इस मामले में चंद्रजीत उर्फ छैला, इंद्रजीत, अनिल और इनकी मां धनकौर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कोर्ट में अनिल और इंद्रजीत को नाबालिग बताया गया था। चंद्रजीत और धनकौर को सजा सुनाई गई। इसके बाद से ही दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा।
आरोप है कि संजीव अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अनिल को निशाना बनाता रहा। इसकी जानकारी होने पर मजहब सिंह ने पुलिस से लिखित में शिकायत की। इतना ही नहीं मजहब सिंह और अनिल ने पुलिस के आला अधिकारियों को भी इस संबंध में फैक्स भेजकर जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
इसके बाद भी पुलिस ने इस मामले में जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। अनिल के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने एक बार भी संजीव से पूछताछ नहीं की, जिसका नतीजा है कि उसके हौंसले बुलंद रहे।
शहर कोतवाल की बातों पर भड़के परिजन
अनिल की मौत के बाद परिवार के लोग पुलिसकर्मियों से भड़क गए थे। इस बीच शहर कोतवाल आरपी यादव ने परिजनों से गलतबयानी कर दी। यह सुनकर परिजनों का आक्रोश भड़क गया। कोतवाल को अपनी हद में रहने की भी इन्हाेंने हिदायत दी।
मृतक की बहन का हो चुका अपहरण, नहीं लगा सुराग
मजहब सिंह की बेटी का पिछले साल संजीव और उसके साथी अपहरण कर ले गए थे। इस मामले की परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन अभी तक किशोरी का कोई सुराग नही लगा। पीड़ित पिता अपनी बेटी की बरामदगी के लिए डीएम, एसपी से लेकर आलाधिकारियों को भी पत्र देकर गुहार लगा चुका है।
पिता का कहना था कि वह पुलिस की खामोशी से पूरा परिवार टूट चुका है। उसके परिवार के साथ लगातार घटनाएं हो रही हैं। अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसके प्लाट पर भी कब्जा हो चुका है। अभी तक पुलिस उसकी बेटी को बरामद नहीं कर सकी है। लोहिया अस्पताल में मजहब सिंह रो रोकर पुलिस को कोस रहा था। गुस्से में मजहब सिंह ने कहा कि अब वह बेटी के अपहरणकर्ताओं के साथ ही बेटे के हत्यारों से खुद ही निपट लेगा।
सीओ सिटी पर दो लाख लेने का आरोप
फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल से अनिल का शव लेकर परिजन रास्ता जाम करने आवास विकास तिराहा जा रहे थे। तभी लोहिया गेट के पास सीओ ने रोक लिया। इस बीच सीओ और अनिल के परिजनों में नोंकझोंक हुई। अनिल के परिवारी सुरजीत के चार साल के बेटे को रेलवे रोड स्थित डा. रवींद्र दुबे के यहां बीमार होने पर भर्ती कराया था।
जहां लापरवाही के चलते बच्चे की मौत हो गई थी। इस पर परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि सीओ सिटी ने दो लाख रुपये लेकर उसमें एफआर लगा दी थी। सीओ सिटी वाईपी सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट लिखी गई थी।
डाक्टरों के पैनल से मिली रिपोर्ट पर ही एफआर और चार्जशीट की कार्रवाई होती है। पैनल की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप गलत पाए जाने पर एफआर लगाई गई थी। रुपये लिए जाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं।