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एआरटीओ समेत चार के खिलाफ धोखाखड़ी की याचिका दायर
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, बाइक एजेंसी के मैनेजर समेत चार के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की गई। इसमें बाइक की पूरी कीमत लेने के बाद फर्जी तरीके से कागज तैयार कर बाइक दूसरे को बेचने का आरोप लगाया है।
गांव बंधा अमेठी कोहना निवासी लालजी दुबे ने एआरटीओ प्रशासन मोहम्मद हसीब, लिपिक भीम बाबू, टीवीएस राठौर एजेंसी बढ़पुर के मैनेजर शर्मा व मऊदरवाजा थाना क्षेत्र निवासी गिरीश चंद्र के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की।
इसमें कहा कि उसने दिसंबर 2018 में टीवीएस राठौर एजेंसी से एक बाइक खरीदी थी। इसके 97500 रुपये भुगतान किए थे। एजेंसी के मैनेजर शर्मा ने 8 फरवरी 2019 को बाइक का पंजीकरण और बीमा कराया था। कुछ खराबी आने पर 12 फरवरी को बाइक लेकर एजेंसी पर दिखाने गया।
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मैनेजर ने पंजीकरण लेने के बाद बाइक को बाद में उठाकर ले जाने की बात कही। इससे वह चला आया और दूसरे दिन बाइक लेने गया तो मैनेजर ने बताया कि बाइक गिरीश चंद्र के साथ भेज दी है। जब गिरीश चंद्र के घर जाकर बाइक लाने के संबंध में पूछा तो उसने बताया कि बाइक उसको बेची गई है।
उसने बाइक के अपने नाम के कागज भी दिखाए। तब एआरटीओ कार्यालय जाकर पता किया तो मालूम हुआ कि एआरटीओ, लिपिक व अन्य सभी ने मिलकर फर्जी अभिलेख तैयार कर उसकी बाइक को बेच दिया। 15 मई को रिपोर्ट दर्ज कराने को एसपी को प्रार्थना पत्र दिया।
सुनवाई न होने पर पीड़ित ने याचिका दायर की। कोर्ट ने फतेहगढ़ कोतवाल से आख्या मांगी है। एआरटीओ प्रशासन मोहम्मद हसीब ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। एजेंसी से कोई गड़बड़ी हुई होगी। वह बाइक नंबर से प्रकरण की जांच करेंगे।
एआरटीओ समेत चार के खिलाफ धोखाखड़ी की याचिका
बाइक के फर्जी अभिलेख तैयार कर बेचने का लगाया आरोप
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गांव बंधा अमेठी कोहना निवासी लालजी दुबे ने एआरटीओ प्रशासन मोहम्मद हसीब, लिपिक भीम बाबू, टीवीएस राठौर एजेंसी बढ़पुर के मैनेजर शर्मा व मऊदरवाजा थाना क्षेत्र निवासी गिरीश चंद्र के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की।
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इसमें कहा कि उसने दिसंबर 2018 में टीवीएस राठौर एजेंसी से एक बाइक खरीदी थी। इसके 97500 रुपये भुगतान किए थे। एजेंसी के मैनेजर शर्मा ने 8 फरवरी 2019 को बाइक का पंजीकरण और बीमा कराया था। कुछ खराबी आने पर 12 फरवरी को बाइक लेकर एजेंसी पर दिखाने गया।
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मैनेजर ने पंजीकरण लेने के बाद बाइक को बाद में उठाकर ले जाने की बात कही। इससे वह चला आया और दूसरे दिन बाइक लेने गया तो मैनेजर ने बताया कि बाइक गिरीश चंद्र के साथ भेज दी है। जब गिरीश चंद्र के घर जाकर बाइक लाने के संबंध में पूछा तो उसने बताया कि बाइक उसको बेची गई है।
उसने बाइक के अपने नाम के कागज भी दिखाए। तब एआरटीओ कार्यालय जाकर पता किया तो मालूम हुआ कि एआरटीओ, लिपिक व अन्य सभी ने मिलकर फर्जी अभिलेख तैयार कर उसकी बाइक को बेच दिया। 15 मई को रिपोर्ट दर्ज कराने को एसपी को प्रार्थना पत्र दिया।
सुनवाई न होने पर पीड़ित ने याचिका दायर की। कोर्ट ने फतेहगढ़ कोतवाल से आख्या मांगी है। एआरटीओ प्रशासन मोहम्मद हसीब ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। एजेंसी से कोई गड़बड़ी हुई होगी। वह बाइक नंबर से प्रकरण की जांच करेंगे।
एआरटीओ समेत चार के खिलाफ धोखाखड़ी की याचिका
बाइक के फर्जी अभिलेख तैयार कर बेचने का लगाया आरोप