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Farrukhabad News: मछलियों के मरने के सच पर परदेदारी, गलत रिपोर्ट सौंपीघ

Mon, 21 Oct 2024 01:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2024 01:21 AM IST
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Cover up over the truth of fish dying, wrong report submitted
फर्रुखाबाद। गंगा नदी में भैरोघाट घाट के पास गिर रहे गंदे नाले के मुहाने पर मछलियों के मरने के मामले में सच को छिपाने की तैयारी कर ली गई है। प्रशासन की उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में डीएम को सही जानकारी नहीं दी है। मछलियां नदी के दक्षिण दिशा में मरी थीं, जबकि नमूना और जांच उत्तर दिशा में की गई है। ऐसे में सही तथ्य सामने आना मुश्किल लग रहा है।
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गंगा नदी में भैरोघाट के पास गिर रहे नाले के मुहाने के पास लाखों मछलियां मरने की खबर अमर उजाला ने 19 अक्तूबर के अंक में प्रकाशित की थी। इसके बाद प्रशासन ने पांच विभागों की उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर जांच कराई है। सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने शनिवार देर शाम डीएम को सौंपी निरीक्षण आख्या में सच को छिपा लिया है। टीम ने छह स्थानों से नमूने लेना बताया है, जबकि नमूने केवल दो स्थानों से लिए हैं। यही नहीं अफसर नाले के उत्तरी दिशा में थे, जबकि मछलियां दक्षिण दिशा में मरी थीं। जिस जगह से नमूना लिया गया है वह टापू जैसी जगह है। वहां पर किसी राहगीर आदि का मिलना ही मुश्किल है।
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शहर के तलैया फजल इमाम से निकला नाला गंगानगर, कछियाना, अंगूरीबाग, माधौपुर, भैरोघाट होकर हनुमान गढ़ी के पीछे गंगा की धारा में मिलता है। कुछ दिन से गंगा में पानी का बहाव तेज होने से नाले का पानी ठहर गया था। गंगा की ओर से पानी नाले की ओर आने लगा था। इससे दूषित नाले के पानी की जद में आई मछलियां मरने लगी थीं। मरी मछलियों के पानी में उतराने की सूचना पर पहुंची संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने साक्ष्य के रूप में वीडियो और फोटो एकत्रित किए थे।
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खबर छपने के बाद शनिवार को दोपहर में 12:45 बजे के करीब मत्स्य विभाग, प्रदूषण विभाग कानपुर, नगर पालिका, वन विभाग और नमामि गंगे के अफसर पांचाल घाट पहुंचे। अधिकारी दो मोटरबोट से पांचाल घाट से सीधे हनुमान गढ़ी मंदिर के पीछे उत्तर दिशा की ओर टापू पर उतरे। उसी किनारे एक मोटरबोट में बैठे लैब के कर्मचारियों ने पानी के नमूने लिए। अन्य अफसर भैरोघाट की पुलिया तक गए। करीब 15 मिनट में वापस आ गए। लैब के एक कर्मचारी को भैरो मंदिर के पीछे नमूना लेने भेजा गया। इसके बाद अधिकारी वहां से चले गए।
अफसरों ने जिलाधिकारी को जो निरीक्षण रिपोर्ट सौंपी है, उसमें सच को छिपाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मछलियां मृत नहीं जीवित पाई गईं, जबकि उस समय भी नाले के पानी में हजारों मरी मछलियां उतराई हुईं थीं। नाले का पानी करीब 25 मीटर बाद गंगा की धारा में गिरता है। नाले के पानी में उतरा रही मरी मछलियां पानी का बहाव तेज होने से गंगा में चलीं गई। मगर टीम ने रिपोर्ट में गंगा में मछलियाें के मरने की बात नकार दी है। प्रदूषण विभाग की टीम ने पांचाल घाट पुल, पुरानी घटिया, भैरोघाट, भैरोघाट नाला भैरो मंदिर के पास का नमूना लेना दिखाया है। जबकि नमूना लेने लैब कर्मचारी हनुमान गढ़ी मंदिर के पीछे ही रुके थे।

जिलाधिकारी डाॅ. वीके सिंह ने बताया कि जांच के लिए गठित की गई टीम ने नमूने लेकर जांच रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के आधार पर पानी की जांच के बाद नमूने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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