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तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ नहीं लगा पा रहा धूम्रपान पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:40 PM IST
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फर्रुखाबाद। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए जिले में खोले गए तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ ने यहां पैदा इकन्नी और खर्चा रुपया वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है। एक साल के भीतर 42 लाख रुपये खर्च करने के बाद इस प्रकोष्ठ ने अब तक केवल जुर्माने के रूप में 4200 रुपये सरकारी खजाने में जमा किए हैं।
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तंबाकू से होने वाले खतरनाक रोगों से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए गतवर्ष यहां तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की स्थापना की गई थी। सीएमओ के अधीन आने वाले इस प्रकोष्ठ में जिला स्तर पर जिला सलाहकार सूरज दुबे को 40 हजार, काउंसलर अमित सिसौदिया को 25 हजार और स्मिता सिंह डाटा इंट्री आपरेटर को 12 हजार रुपये के वेतन पर रखा गया है। नोडल अधिकारी एसके वर्मा को मुख्य चिकित्साधिकारी के कार्यालय से 42 लाख रुपये का बजट दिया गया था। यह बजट करीब पूरा खर्च कर लिया गया है और साल भर में केवल 100 चालान दिखाए गए हैं तथा 4200 रुपये जुर्माना वसूलकर खजाने में जमा किया गया है।
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इस संबंध में जिला सलाहकार सूरज दुबे का कहना है कि धूम्रपान करने वाले लोग उनका दबाव नहीं मानते हैं। इस वजह से वह चालान करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। अधिकांश धूम्रपान स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर करते हैं। उनसे जब चालान की बात कही जाती है तो वह झगड़े पर आमादा हो जाते हैं। इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पैसा खर्च करने के लिए कागजी कार्रवाई में जुटे रहते हैं। प्रत्येक सार्वजनिक स्थान पर लोग धड़ल्ले से धूम्रपान करते पाए जा रहे हैं। प्रकोष्ठ सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगाने में असफल रहा है।
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स्कीम के तहत इस प्रकोष्ठ को बजट दिया जाता है। पुलिस के बिना तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ में कार्यरत लोगों का दबाव धूम्रपान करने वाले नहीं मान रहे हैं। अब सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए पुलिस और सभी सरकारी अधिकारियों को चालान बुक उपलब्ध कराई गई है। - डा. राकेश कुमार (मुख्य चिकित्साधिकारी)