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कोरोना पॉजिटिव किशोर को किया रेफर
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फर्रुखाबाद। सरकारी एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे एक 15 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव किशोर को बिना भर्ती किए ओपीडी के पर्चे पर ही रेफर कर दिया गया। तीमारदारों की सूचना पर सीएमओ और एसीएमओ देर रात इमरजेंसी पहुंचे। उन्होंने किशोर का रिकार्ड मांगा, तो कुछ नहीं मिला। इस पर उन्होंने संबंधित डॉक्टर से बात की।
फतेहगढ़ के एक मोहल्ला निवासी 15 वर्षीय किशोर को कुछ दिन से बुखार आ रहा था। बीते दिन उसकी सांस फूलने लगी। इस पर परिजनों ने उसका सीटी स्कैन कराया। सीटी स्कैन में बच्चे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। बच्चे को शनिवार देर शाम सरकारी एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. योगेंद्र कुमार मिश्र ने उसे बिना भर्ती किए इमरजेंसी के ओपीडी के पर्चे पर ही सैफई के लिए रेफर कर दिया। परिजन बच्चे का यहीं इलाज कराना चाहते थे। तीमारदारों ने इसकी सूचना सीएमओ को दे दी।
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा और एसीएमओ डॉ. राजीव शाक्य रात करीब साढ़े नौ बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचें। उन्होंने बच्चे का नाम, पता पूछा, तो मालूम हुआ कि यहां कुछ भी नहीं है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद सीएमओ और एसीएमओ ने डॉ. योगेंद्र मिश्रा से जानकारी ली। बाद में सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त से मिलने चले गए। हालांकि परिजन बच्चे को लेकर सैफई चले गए। वहां उसका इलाज किया जा रहा है।
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कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को बच्चों के लिए 40 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया है। उसमें मशीनरी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, मगर उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। लिहाजा बीमार बच्चों का इलाज कैसे होगा, इसका कोरोना पॉजिटिव बच्चा आने से पोल खुल गई। अधिकारी सच पर पर्दा डालने में जुटे हुए हैं। जबकि इसी तरह के मरीजों को भर्ती करने के लिए 27 अगस्त को लोहिया अस्पताल, कमालगंज, बरौन व कायमगंज सीएचसी में रिहार्सल किया गया था।
किशोर को रेफर करने वाले डॉ. योगेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि लोहिया अस्पताल नॉन कोविड है। लिहाजा यहां पॉजिटिव का इलाज नहीं हो सकता। पहले आइसोलेशन वार्ड था अब उसे पीकू में बदल दिया गया है। पीकू वार्ड में रात के वक्त न तो कोई डॉक्टर रहता और न ही स्टाफ। ऐसे में रेफर के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता।
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि फिलहाल पीकू में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। किशोर के परिजन यहीं इलाज चाह रहे थे। फिलहाल उसका सैफई में इलाज चल रहा है।
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फतेहगढ़ के एक मोहल्ला निवासी 15 वर्षीय किशोर को कुछ दिन से बुखार आ रहा था। बीते दिन उसकी सांस फूलने लगी। इस पर परिजनों ने उसका सीटी स्कैन कराया। सीटी स्कैन में बच्चे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। बच्चे को शनिवार देर शाम सरकारी एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. योगेंद्र कुमार मिश्र ने उसे बिना भर्ती किए इमरजेंसी के ओपीडी के पर्चे पर ही सैफई के लिए रेफर कर दिया। परिजन बच्चे का यहीं इलाज कराना चाहते थे। तीमारदारों ने इसकी सूचना सीएमओ को दे दी।
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सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा और एसीएमओ डॉ. राजीव शाक्य रात करीब साढ़े नौ बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचें। उन्होंने बच्चे का नाम, पता पूछा, तो मालूम हुआ कि यहां कुछ भी नहीं है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद सीएमओ और एसीएमओ ने डॉ. योगेंद्र मिश्रा से जानकारी ली। बाद में सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त से मिलने चले गए। हालांकि परिजन बच्चे को लेकर सैफई चले गए। वहां उसका इलाज किया जा रहा है।
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कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को बच्चों के लिए 40 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया है। उसमें मशीनरी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, मगर उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। लिहाजा बीमार बच्चों का इलाज कैसे होगा, इसका कोरोना पॉजिटिव बच्चा आने से पोल खुल गई। अधिकारी सच पर पर्दा डालने में जुटे हुए हैं। जबकि इसी तरह के मरीजों को भर्ती करने के लिए 27 अगस्त को लोहिया अस्पताल, कमालगंज, बरौन व कायमगंज सीएचसी में रिहार्सल किया गया था।
किशोर को रेफर करने वाले डॉ. योगेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि लोहिया अस्पताल नॉन कोविड है। लिहाजा यहां पॉजिटिव का इलाज नहीं हो सकता। पहले आइसोलेशन वार्ड था अब उसे पीकू में बदल दिया गया है। पीकू वार्ड में रात के वक्त न तो कोई डॉक्टर रहता और न ही स्टाफ। ऐसे में रेफर के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता।
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि फिलहाल पीकू में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। किशोर के परिजन यहीं इलाज चाह रहे थे। फिलहाल उसका सैफई में इलाज चल रहा है।