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Farrukhabad News: किसानों के पैसे से आढ़ती कर रहे मक्के का व्यापार
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कमालगंज। मक्का की बंपर पैदावार से मंडी गुलजार है। रोजाना डेढ़ करोड़ से अधिक की मक्का किसानों से खरीदकर गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों में भेजी जा रही। खास बात यह कि मंडी में मक्का का व्यापार किसानों के पैसे से किया जा रहा। किसानों से उधार में खरीद कर एक माह बाद पैसा दिए जाने का भरोसा दिया जाता।
आलू में मंदी के लगे जोरदार डंक से किसान परेशान हैं। ऐसे में मक्का की अच्छी पैदावार से राहत मिली है। मंडी में रोजाना सात हजार कुंटल से अधिक मक्का पहुंच रही है। छोटी-बड़ी मिलाकर 20 से 24 गाड़ियों की लोडिंग हो रही है। गुजरात के सिद्धपुर, पालनपुर, आनंद, महाराष्ट्र के मालेगांव, धुलिया, बढ़ानी, ओझर के लिए लदान हो रही।
खेत के बाद मेहनत-पसीने से सुखाकर मक्का को मंडी में लाने पर किसानों को तौल के बाद नकद पैसा पाने की खुशी नहीं मिल पाती। मक्का की खंदाई, ट्रैक्टर भाड़ा, मजदूरी भर का कुछ पैसा (करीब पांच प्रतिशत) ही किसानों को नकद दिया जाता। शेष रकम एक माह बाद मिल जाने का भरोसा दे दिया जाता है। समय नजदीक आने पर भी चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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आठवें दिन लगता भुगतान
आढ़ती संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि कभी-कभी लोडिंग के बाद चार दिन में गाड़ी पहुंच पाती है। माल बिककर गाड़ी खाली होने के आठवें दिन फैक्टरी या पोल्ट्री फार्म से भुगतान लगता है। अधिक नमी व मक्का की गुणवत्ता अच्छी न होने पर गाड़ी तीन-चार दिन खड़ी रहती। रिजेक्ट माल में 30 हजार तक कटौती हो जाती। कई व्यापारियों के पास 10-12 दिन में एक करोड़ का माल आ रहा है। ऐसे में किसानों को नकद भुगतान संभव नहीं हो पाता। वहीं बाहर मक्का बिकने के बाद तीन प्रतिशत करेंट डिपाजिट (सीडी) काटकर आढ़तियों को पैसा मिलता है।
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आलू में मंदी के लगे जोरदार डंक से किसान परेशान हैं। ऐसे में मक्का की अच्छी पैदावार से राहत मिली है। मंडी में रोजाना सात हजार कुंटल से अधिक मक्का पहुंच रही है। छोटी-बड़ी मिलाकर 20 से 24 गाड़ियों की लोडिंग हो रही है। गुजरात के सिद्धपुर, पालनपुर, आनंद, महाराष्ट्र के मालेगांव, धुलिया, बढ़ानी, ओझर के लिए लदान हो रही।
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खेत के बाद मेहनत-पसीने से सुखाकर मक्का को मंडी में लाने पर किसानों को तौल के बाद नकद पैसा पाने की खुशी नहीं मिल पाती। मक्का की खंदाई, ट्रैक्टर भाड़ा, मजदूरी भर का कुछ पैसा (करीब पांच प्रतिशत) ही किसानों को नकद दिया जाता। शेष रकम एक माह बाद मिल जाने का भरोसा दे दिया जाता है। समय नजदीक आने पर भी चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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आठवें दिन लगता भुगतान
आढ़ती संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि कभी-कभी लोडिंग के बाद चार दिन में गाड़ी पहुंच पाती है। माल बिककर गाड़ी खाली होने के आठवें दिन फैक्टरी या पोल्ट्री फार्म से भुगतान लगता है। अधिक नमी व मक्का की गुणवत्ता अच्छी न होने पर गाड़ी तीन-चार दिन खड़ी रहती। रिजेक्ट माल में 30 हजार तक कटौती हो जाती। कई व्यापारियों के पास 10-12 दिन में एक करोड़ का माल आ रहा है। ऐसे में किसानों को नकद भुगतान संभव नहीं हो पाता। वहीं बाहर मक्का बिकने के बाद तीन प्रतिशत करेंट डिपाजिट (सीडी) काटकर आढ़तियों को पैसा मिलता है।