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मिट्टी न मिलने से बदला काम
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Sat, 07 Nov 2015 11:47 PM IST
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कमालगंज। मिट्टी न मिलने से मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों ने पुश्तैनी काम छोड़कर दूसरे काम को अपना लिए। कोई अचार तो कोई कपड़ों की फेरी लगा रहा है। जो लोग इस काम से जुड़े हैं, वह भी मिट्टी न मिलने से परेशान हैं।
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कसबे में कई परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने के काम से जुड़े हैं। दीपावली पर यह लोग मिट्टी के बर्तन और छोटे व बड़े दीपक आदि बनाकर अच्छीखासी कमाई कर लेते थे। पर मिट्टी न मिलने से अधिकतर लोगों ने इस पुश्तैनी धंधे को छोड़कर दूसरा काम शुरू कर दिया। जहानगंज रोड निवासी रामनिवास कुम्हार का कहना है कि पिछली दिवाली पर 10 हजार छोटे दीपक बनाए थे।
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इस बार मिट्टी न मिलने से तीन से चार हजार ही छोटे दीपक बनाए हैं। ग्रामीण तालाब से मिट्टी खोदने भी नहीं देते। ब्लैक में भी मिट्टी मिल नहीं रही है। इस बार छोटे दीपक 30 रुपये सैकड़ा बिक रहे हैं। होतेलाल ने बताया कि मिट्टी न मिलने के चलते परिवार के भरण-पोषण में दिक्कत आ रही थी। इसलिए कुम्हारी का काम छोड़कर कपड़े की फेरी लगानी शुरू कर दी है।
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रामपाल निवासी नई बस्ती का कहना है कि मिट्टी न मिलने से मिट्टी के बर्तन बनाने में दिक्कतें आ रही थीं। इसलिए कुम्हारी का काम छोड़कर अचार बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। विष्णुचंद्र कहते हैं कि रात के अंधेरे में खनन माफिया धड़ल्ले से मिट्टी का खनन कर रहे हैं लेकिन उन लोगों को मिट्टी नहीं मिल रही है।
इसके चलते कुम्हार पर्याप्त मात्रा में मिट्टी के बर्तन ही नहीं बना पा रहे हैं। इससे रोजीरोटी में भी दिक्कतें आ रही थीं। उन्होंने पुश्तैनी काम छोड़कर अचार बेचना शुरू कर दिया है। इससे प्रतिदिन शाम को 100-150 रुपये की मजदूरी तो हो जाती है, जिससे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।