फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Claim 10 hours of electricity supply, not even five hours

पांच घंटे बिजली मिलने से आलू सिंचाई का संकट

Thu, 10 Dec 2020 09:47 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Dec 2020 09:47 PM IST
विज्ञापन
Claim 10 hours of electricity supply, not even five hours
खेत में खड़ी आलू फसल। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। नलकूप के लिए बने अलग फीडरों से किसानों को दिन में निर्बाध दस घंटे बिजली आपूर्ति का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। दिन में रोस्टिंग और लोकल फॅाल्ट से इन फीडरों को पांच घंटे भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे किसान आलू की फसल में पानी नहीं लगा पा रहे हैं। रात में जो बिजली दी जाती है, उसका किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

किसानों की सुविधा के लिए निजी नलकूपों की अलग से विद्युत लाइन बनाई गई है। उपकेंद्रों पर इनके अलग से फीडर भी बने हैं। इन फीडरों से दिन में सुबह साढ़े सात से शाम साढ़े पांच बजे तक निर्बाध बिजली देने का शासन का आदेश है।
विज्ञापन

बिजली अधिकारी दस घंटे आपूर्ति का दावा भी करते हैं। हकीकत यह है कि रोज दोपहर में चार घंटे रोस्टिंग हो जाती है। बचे छह घंटों में लोकल फाल्ट और ट्रिपिंग से करीब एक घंटे आपूर्ति बाधित रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पांच घंटे जो बिजली मिलती हैं, वह भी लगातार न मिलने से नलकूप पूरी क्षमता से नहीं चल पाते। वर्तमान में आलू की फसल को पानी की जरूरत है, जिस लेकर किसान परेशान हैं।
गांव करनपुर दत्त निवासी जोगेंद्र सिंह का कहना है कि 33 केवी लाइन में फाल्ट अधिक होने से बिजली कम मिलती है। अलग फीडर से बिजली न मिलने से आलू की फसल में पानी नहीं लगा पा रहे हैं।
गांव खाखिन निवासी आशीष तिवारी का कहना है कि गंगापार क्षेत्र की 33 केवी जर्जर होने से फाल्ट अधिक होते हैं। रोजाना कई घंटे बिजली गुल रहती है। नलकूप न चलने से फसल की सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है।
गांव खाखिन निवासी अखिलेश कुमार कहना है कि चपरा फीडर का नलकूप को अलग से फीडर नहीं बना है। गांव की लाइन से नलकूप चलते हैं। बिजली पांच से छह घंटे मिलने से खेत की सिंचाई नहीं हो पाती है।
गांव गाजीपुर निवासी संजय कुमार ने बताया कि दिन में पांच घंटे बिजली मिलती है। यह भी लगातार न मिलने से नलकूप नहीं चल पाते हैं। इससे आलू में पानी लगाना मुश्किल हो रहा है। रात में बिजली आती है तो सर्दी से पानी नहीं लगा पाते हैं।

प्रत्येक माह रोस्टिंग का कार्यक्रम मुख्यालय से बनकर आता है। उसके आधार पर रोस्टिंग की जाती है। कभी-कभी मुख्यालय से अचानक रोस्टिंग के आदेश आने पर बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। सेपरेट फीडरों की 33केवी लाइन अलग से नहीं बनी है। इससे यह समस्या पैदा हो रही है। - उमेश कुमार, एक्सईएन ट्रांसमिशन।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed