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आवारा जानवरों के विचरण से शहरवासी परेशान
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 24 Feb 2015 11:02 PM IST
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शहर में आवारा जानवरों के विचरण से शहरवासी परेशान हैं। मुख्यमार्गों और
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गली-चौराहों पर विचरण करते ये पशु आएदिन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। पर
नगर पालिका प्रशासन इस ओर उदासीन है। ये आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए
पालिका प्रशासन के पास पर्याप्त इंतजाम हैं लेकिन कर्मियों और जिम्मेदारों
की ढिलाई के चलते आवारा जानवरों को पकड़ने का अभियान फ्लाप चल रहा है।
शहर में 200 से ज्यादा आवारा जानवर मुख्यमार्गों और तिराहे-चौराहों पर चहलकदमी करते रहते हैं। बजरिया, रेलवे रोड, पल्ला गल्ला मंडी, भाऊटोला, तिकोना चौकी, घुमना बाजार, पक्कापुल, लालदरवाजा, लालगेट, टाउनहाल, बजरिया फील्ड, सातनपुर आलू मंडी और सेठगली आदि में किसी भी समय पशुओं को विचरते देखा जा सकता है। पालिका प्रशासन के पास
पर्याप्त इंतजाम होने के बाद भी कर्मियों की उदासीनता से इन्हें पकड़ने का अभियान फ्लाप है। आवारा जानवरों को रखने के पालिका प्रशासन ने बीबीगंज में बेड़ारास खुलवा रखा है। इसमें नवल कुमार समेत दो कर्मचारियों की तैनाती है। यह कर्मचारी चौबीस घंटे यहां रहते हैं। यहां जानवरों के लिए चारा-पानी की भी व्यवस्था है। वर्ष 2014 में आवारा जानवरों को पकड़ने के
लिए काऊ कैचर वाहन करीब 4 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का खरीदा गया। यह वाहन शोपीस बनकर रह गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 9 नवंबर 2014 से आवारा जानवरों को पकड़ने का अभियान शुरू नहीं किया गया। आवारा जानवरों के विचरण से हर तीसरे-चौथे दिन कहीं न कहीं कोई दुर्घटना घटती है। नगरवासियों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठन भी आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए कई बार नगर पालिका प्रशासन से मांग कर चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
पशु मालिक से यह लगता जुर्माना
आवारा जानवरों को पकड़कर बेड़ारास में बंद किया जाता है। इसके बाद पशु मालिक से प्रति जानवर छुड़ाने के 150 रुपये शुल्क लगता है। इसके अलावा पशु मालिक से प्रतिदिन के हिसाब से 50 रुपये खुराकी देनी होती है। पशुओं के बच्चों पर कोई भी जुर्माना नहीं लगता है।
ऐसे छोड़े जाते जानवर
बेड़ारास में बंद जानवरों को छुड़ाने के लिए पशु मालिक नगर पालिका प्रशासन के टैक्स विभाग में संपर्क करते हैं। यहां पशु मालिक से दो गवाहों के अलावा जुर्माना जमा करवाकर पशु को छोड़ दिया जाता है। जुर्माना जमा करने की रसीद भी पशु मालिक को दी जाती है।
नीलामी का भी है प्रावधान
बेड़ारास में रखे जाने वाले जानवरों की नीलामी का भी प्रावधान है। अगर पशु मालिक दो-तीन माह तक अपना जानवर छुड़ाने नहीं आता है तो ऐसे पशु को नीलाम कर दिया जाता है।
बेड़ारास में 30 जानवर रखने की क्षमता
बीबीगंज स्थित बेड़ारास में 30 जानवर रखने की क्षमता है। लेकिन मौजूदा समय में कोई भी जानवर बेड़ारास में नहीं है। क्योंकि करीब तीन-चार माह से अभियान ही नहीं चलाया गया।
स्वास्थ्य विभाग के पास पकड़ने की जिम्मेदारी
आवारा पशुओं को पकड़वाने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग के पास है। अफसरों के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी रात में आवारा जानवरों को पकड़कर बेड़ारास में बंद करवाते हैं।
पशु मालिक भी हैं जिम्मेदार
आवारा जानवरों के विचरण में पशु मालिक भी काफी जिम्मेदार हैं। शहर में कई लोग दुधारू गायें पाले हैं। यह लोग सुबह दूध निकालने के बाद इनको चरने के लिए छोड़ देते हैं। इसके साथ ही जो गायें दूध देना बंद कर देती हैं। उन्हें भी पशु मालिक छोड़ देते हैं।
सात साल में 16-17 बार ही चला अभियान
नगर पालिका प्रशासन ने सात साल में मात्र 16-17 बार ही आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया। नागरिकों की मांग पर 9 जुलाई वर्ष 2007 में आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद 10 दिसंबर 2007, 26 अगस्त 2008, 28 अगस्त 2008, 14 सितंबर 2008, 15 सितंबर 2008, 16 सितंबर 2008, 17 सितंबर 2008, 25 सितंबर 2008, 26 सितंबर 2008, 28 सितंबर 2008 और आखिरी बार 9 नवंबर वर्ष 2014 में अभियान चला।
वर्जन
आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान कबसे नहीं चला है। इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी करवाकर शीघ्र ही शहर में अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़वाया जाएगा।
पीके श्रीवास्तव, ईओ, नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद
शहर में 200 से ज्यादा आवारा जानवर मुख्यमार्गों और तिराहे-चौराहों पर चहलकदमी करते रहते हैं। बजरिया, रेलवे रोड, पल्ला गल्ला मंडी, भाऊटोला, तिकोना चौकी, घुमना बाजार, पक्कापुल, लालदरवाजा, लालगेट, टाउनहाल, बजरिया फील्ड, सातनपुर आलू मंडी और सेठगली आदि में किसी भी समय पशुओं को विचरते देखा जा सकता है। पालिका प्रशासन के पास
पर्याप्त इंतजाम होने के बाद भी कर्मियों की उदासीनता से इन्हें पकड़ने का अभियान फ्लाप है। आवारा जानवरों को रखने के पालिका प्रशासन ने बीबीगंज में बेड़ारास खुलवा रखा है। इसमें नवल कुमार समेत दो कर्मचारियों की तैनाती है। यह कर्मचारी चौबीस घंटे यहां रहते हैं। यहां जानवरों के लिए चारा-पानी की भी व्यवस्था है। वर्ष 2014 में आवारा जानवरों को पकड़ने के
लिए काऊ कैचर वाहन करीब 4 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का खरीदा गया। यह वाहन शोपीस बनकर रह गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 9 नवंबर 2014 से आवारा जानवरों को पकड़ने का अभियान शुरू नहीं किया गया। आवारा जानवरों के विचरण से हर तीसरे-चौथे दिन कहीं न कहीं कोई दुर्घटना घटती है। नगरवासियों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठन भी आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए कई बार नगर पालिका प्रशासन से मांग कर चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
पशु मालिक से यह लगता जुर्माना
आवारा जानवरों को पकड़कर बेड़ारास में बंद किया जाता है। इसके बाद पशु मालिक से प्रति जानवर छुड़ाने के 150 रुपये शुल्क लगता है। इसके अलावा पशु मालिक से प्रतिदिन के हिसाब से 50 रुपये खुराकी देनी होती है। पशुओं के बच्चों पर कोई भी जुर्माना नहीं लगता है।
ऐसे छोड़े जाते जानवर
बेड़ारास में बंद जानवरों को छुड़ाने के लिए पशु मालिक नगर पालिका प्रशासन के टैक्स विभाग में संपर्क करते हैं। यहां पशु मालिक से दो गवाहों के अलावा जुर्माना जमा करवाकर पशु को छोड़ दिया जाता है। जुर्माना जमा करने की रसीद भी पशु मालिक को दी जाती है।
नीलामी का भी है प्रावधान
बेड़ारास में रखे जाने वाले जानवरों की नीलामी का भी प्रावधान है। अगर पशु मालिक दो-तीन माह तक अपना जानवर छुड़ाने नहीं आता है तो ऐसे पशु को नीलाम कर दिया जाता है।
बेड़ारास में 30 जानवर रखने की क्षमता
बीबीगंज स्थित बेड़ारास में 30 जानवर रखने की क्षमता है। लेकिन मौजूदा समय में कोई भी जानवर बेड़ारास में नहीं है। क्योंकि करीब तीन-चार माह से अभियान ही नहीं चलाया गया।
स्वास्थ्य विभाग के पास पकड़ने की जिम्मेदारी
आवारा पशुओं को पकड़वाने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग के पास है। अफसरों के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी रात में आवारा जानवरों को पकड़कर बेड़ारास में बंद करवाते हैं।
पशु मालिक भी हैं जिम्मेदार
आवारा जानवरों के विचरण में पशु मालिक भी काफी जिम्मेदार हैं। शहर में कई लोग दुधारू गायें पाले हैं। यह लोग सुबह दूध निकालने के बाद इनको चरने के लिए छोड़ देते हैं। इसके साथ ही जो गायें दूध देना बंद कर देती हैं। उन्हें भी पशु मालिक छोड़ देते हैं।
सात साल में 16-17 बार ही चला अभियान
नगर पालिका प्रशासन ने सात साल में मात्र 16-17 बार ही आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया। नागरिकों की मांग पर 9 जुलाई वर्ष 2007 में आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद 10 दिसंबर 2007, 26 अगस्त 2008, 28 अगस्त 2008, 14 सितंबर 2008, 15 सितंबर 2008, 16 सितंबर 2008, 17 सितंबर 2008, 25 सितंबर 2008, 26 सितंबर 2008, 28 सितंबर 2008 और आखिरी बार 9 नवंबर वर्ष 2014 में अभियान चला।
वर्जन
आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान कबसे नहीं चला है। इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी करवाकर शीघ्र ही शहर में अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़वाया जाएगा।
पीके श्रीवास्तव, ईओ, नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद