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Farrukhabad News: प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे बिक रहा चीनी मांझा
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फोटो-1 कायमगंज बाजार में सजी पतंगे और डोर। संवाद
कायमगंज। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही पतंगों की दुकानें सज गई हैं। प्रतिबंध के बावजूद मुख्य बाजार समेत कई इलाकों में सामान्य मांझे की आड़ में चोरी-छिपे प्रतिबंधित चीनी मांझा बेचा जा रहा है। गली-मोहल्लों की कुछ दुकानों पर भी इसकी बिक्री हो रही है। प्रशासन ने चीनी मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बावजूद यह कारोबार जारी है।
हाल में 14 जुलाई को गांव सुभानपुर निवासी टीपू खान का पुत्र दानियाल (17) गांव के पास बाइक से जाते समय चीनी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। मांझा गर्दन में उलझने से उसे गहरा घाव हो गया था। बाजार में पड़ताल के दौरान अधिकांश दुकानों पर सामान्य मांझा ही रखा मिला। दुकानदारों ने खुलेआम चीनी मांझा बेचने से इन्कार किया, लेकिन मांग करने पर कुछ स्थानों पर प्रतिबंधित मांझा उपलब्ध कराने की बात सामने आई। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रतिबंध के कारण चीनी मांझा छिपाकर बेचना पड़ता है।
जानकारों के अनुसार, नगर में चीनी मांझे के कई विक्रेता सक्रिय हैं। एक पैकेट में 28 चरखियां होती हैं, जिसकी थोक कीमत करीब 800 रुपये है। फुटकर में एक चरखी 50 रुपये तक में बेची जाती है। वहीं देसी मांझा करीब 200 रुपये प्रति चरखी मिलता है। सस्ता और अधिक मजबूत होने के कारण पतंगबाज चीनी मांझे को ज्यादा पसंद करते हैं। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि बाजार पर लगातार नजर रखी जा रही है। पतंग और मांझे की दुकानों की जांच कराई जाएगी। कहीं भी प्रतिबंधित चीनी मांझा मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इस तरह बनाया जाता है मांझा :
देसी मांझा सूती धागे पर चावल, गोंद और सीमित मात्रा में कांच का लेप लगाकर तैयार किया जाता है, जबकि चीनी मांझा नायलॉन और प्लास्टिक के धागे पर रसायन व महीन कांच की परत चढ़ाकर बनाया जाता है। इसकी धार बेहद तेज होती है, जिससे राहगीरों, बाइक सवारों और पक्षियों के घायल होने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।
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बीते वर्षों में हुए हादसे
- 14 जुलाई 2026 को गांव सुभानपुर निवासी 17 वर्षीय दानियाल बाइक से जाते समय चीनी मांझे से घायल हो गया था।
- 22 जुलाई 2025 को गांव रुटौल के पास सुल्तानपुर निवासी 40 वर्षीय महेंद्र सिंह के गले में प्रतिबंधित मांझा फंसने से उनका गला गंभीर रूप से कट गया था। उन्हें रेफर करना पड़ा था।
- 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन के दिन मोहल्ला सधवाड़ा निवासी अशोक कुमार शाक्य का 15 वर्षीय पुत्र जैनब प्रतिबंधित मांझे से घायल हो गया था। उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
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बीते वर्ष दर्ज हुए थे दो मुकदमे
कायमगंज। 23 जुलाई 2025 को कायमगंज पुलिस ने गांव रायपुर निवासी मुन्ना को पतंगों के साथ प्रतिबंधित मांझा बेचते गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से नौ लच्छे प्रतिबंधित मांझा बरामद हुआ था। वहीं 8 अगस्त 2025 को मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के बजरिया सुभाषनगर निवासी आमोद कुमार को कायमगंज में अस्थायी दुकान पर प्रतिबंधित मांझा बेचते पकड़ा गया था। उसकी दुकान से 11 लच्छे प्रतिबंधित मांझा बरामद हुआ था।
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हाल में 14 जुलाई को गांव सुभानपुर निवासी टीपू खान का पुत्र दानियाल (17) गांव के पास बाइक से जाते समय चीनी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। मांझा गर्दन में उलझने से उसे गहरा घाव हो गया था। बाजार में पड़ताल के दौरान अधिकांश दुकानों पर सामान्य मांझा ही रखा मिला। दुकानदारों ने खुलेआम चीनी मांझा बेचने से इन्कार किया, लेकिन मांग करने पर कुछ स्थानों पर प्रतिबंधित मांझा उपलब्ध कराने की बात सामने आई। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रतिबंध के कारण चीनी मांझा छिपाकर बेचना पड़ता है।
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जानकारों के अनुसार, नगर में चीनी मांझे के कई विक्रेता सक्रिय हैं। एक पैकेट में 28 चरखियां होती हैं, जिसकी थोक कीमत करीब 800 रुपये है। फुटकर में एक चरखी 50 रुपये तक में बेची जाती है। वहीं देसी मांझा करीब 200 रुपये प्रति चरखी मिलता है। सस्ता और अधिक मजबूत होने के कारण पतंगबाज चीनी मांझे को ज्यादा पसंद करते हैं। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि बाजार पर लगातार नजर रखी जा रही है। पतंग और मांझे की दुकानों की जांच कराई जाएगी। कहीं भी प्रतिबंधित चीनी मांझा मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इस तरह बनाया जाता है मांझा :
देसी मांझा सूती धागे पर चावल, गोंद और सीमित मात्रा में कांच का लेप लगाकर तैयार किया जाता है, जबकि चीनी मांझा नायलॉन और प्लास्टिक के धागे पर रसायन व महीन कांच की परत चढ़ाकर बनाया जाता है। इसकी धार बेहद तेज होती है, जिससे राहगीरों, बाइक सवारों और पक्षियों के घायल होने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।
बीते वर्षों में हुए हादसे
- 14 जुलाई 2026 को गांव सुभानपुर निवासी 17 वर्षीय दानियाल बाइक से जाते समय चीनी मांझे से घायल हो गया था।
- 22 जुलाई 2025 को गांव रुटौल के पास सुल्तानपुर निवासी 40 वर्षीय महेंद्र सिंह के गले में प्रतिबंधित मांझा फंसने से उनका गला गंभीर रूप से कट गया था। उन्हें रेफर करना पड़ा था।
- 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन के दिन मोहल्ला सधवाड़ा निवासी अशोक कुमार शाक्य का 15 वर्षीय पुत्र जैनब प्रतिबंधित मांझे से घायल हो गया था। उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
बीते वर्ष दर्ज हुए थे दो मुकदमे
कायमगंज। 23 जुलाई 2025 को कायमगंज पुलिस ने गांव रायपुर निवासी मुन्ना को पतंगों के साथ प्रतिबंधित मांझा बेचते गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से नौ लच्छे प्रतिबंधित मांझा बरामद हुआ था। वहीं 8 अगस्त 2025 को मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के बजरिया सुभाषनगर निवासी आमोद कुमार को कायमगंज में अस्थायी दुकान पर प्रतिबंधित मांझा बेचते पकड़ा गया था। उसकी दुकान से 11 लच्छे प्रतिबंधित मांझा बरामद हुआ था।

फोटो-1 कायमगंज बाजार में सजी पतंगे और डोर। संवाद