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Farrukhabad News: चीन का लहसुन लोगों की बिगाड़ रहा सेहत
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फर्रुखाबाद। आंखों को भाने वाली हर वस्तु अच्छी नहीं होती। यही हाल है बाजार में बिकने वाले चीन के चमकदार लहसुन की। लोगों को यह पता नहीं कि यह लहसुन लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है।
सब्जी की दुकान पर बिकने वाला देसी लहसुन भले ही छोटा व देखने में अच्छा न हो, लेकिन सब्जी का जायका बढ़ाने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। सब्जी की दुकान पर सजी टोकरी में चाइनीज लहसुन देखने में चमकदार, साइज बड़ा और सुंदर दिखने के लोग आकर्षित होकर बेहिचक खरीद रहे हैं। उसी भाव बिकने वाले देसी लहसुन के चमकदार न होने से लोगों को लुभा नहीं पा रहा है। खास बात तो यह है कि सब्जी विक्रेताओं को भी नहीं पता कि चमकदार लहसुन कहां से आ रहा है।
सब्जी विक्रेताओं से बातचीत
सब्जी विक्रेता रोहित ने बताया कि चमकदार लहसुन बाहर से आता है। इसकी एटा, घिरोर व भोगांव प्रमुख मंडी हैं। जिले की अर्रापहापुर मंडी में कभी-कभी आता है। यह लहसुन 250 से 300 रुपये किलो थोक में मिलता है। दुकान पर फुटकर में 350 से 400 रुपये किलो बिकता है। कुछ अन्य सब्जी विक्रेताओं ने भी कुछ ऐसी ही जानकारी दी, लेकिन उन्हें भी यह नहीं पता है कि लहसुन कहां से आ रहा है।
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इनकी भी सुनें
सातनपुर मंडी की उपमंडी अर्रा पहाड़पुर मंडी सहायक अभय प्रताप ने बताया कि लहसुन बेचने किसान ही आते हैं। औसतन आठ से 10 क्विंटल लहसुन रोजाना बिकता है। कोई व्यापारी लहसुन लेकर नहीं आता। इसी वजह से मंडी शुल्क की रसीद भी नहीं कटती है। कायमगंज मंडी सचिव नागेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन करीब आठ से 10 क्विंटल लहसुन स्थानीय किसान लेकर आते हैं। बाहरी लहसुन की बिक्री प्रमुख रूप से घिरोर, एटा व भोगांव मंडी में होती है।
सेहत के लिए घातक है चाइनीज लहसुन
यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के लहसुन पर कई देशों ने बैन लगा दिया है। चाइनीज लहसुन में जिंक व आर्सेनिक जैसी हानिकारक धातुएं होती हैं, जो कैंसर का कारण हैं। इसी वजह से भारत में चीनी लहसुन पर वर्ष 2014 से प्रतिबंध लगा है। यह लहसुन खाने से पेट की बीमारियां जैसे अल्सर, इन्फेक्शन के अलावा किडनी को नुकसान हो सकते हैं। चाइनीज़ लहसुन में फंगस होने से गंभीर बीमारियां पनपती हैं। कीड़ों से बचाने के लिए मेथाइल ब्रोमाइड का इस्तेमाल किया जाता है। फ़्रुक्टोज़ की मात्रा अधिक होने से गैस हो सकती है। इसे खाने से पेट में सूजन, गैस्ट्राइटिस, अल्सर और इंफ़ेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कोई अधिकारी नहीं दे रहा ध्यान
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त खाद्य अजीत कुमार ने बताया कि किसान का उत्पाद होने से वह लहसुन का नमूना नहीं ले सकते। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह का कहना है कि लहसुन सब्जी में शामिल है। इससे जिला आलू विकास अधिकारी को ही पूरी जानकारी होगी। जिला आलू विकास एवं शाकभाजी अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि चाइनीज लहसुन का नमूना लेने या जांच कराने के संबंध में उन्हें न तो कोई आदेश मिला है और न ही इसकी जानकारी है।
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सब्जी की दुकान पर बिकने वाला देसी लहसुन भले ही छोटा व देखने में अच्छा न हो, लेकिन सब्जी का जायका बढ़ाने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। सब्जी की दुकान पर सजी टोकरी में चाइनीज लहसुन देखने में चमकदार, साइज बड़ा और सुंदर दिखने के लोग आकर्षित होकर बेहिचक खरीद रहे हैं। उसी भाव बिकने वाले देसी लहसुन के चमकदार न होने से लोगों को लुभा नहीं पा रहा है। खास बात तो यह है कि सब्जी विक्रेताओं को भी नहीं पता कि चमकदार लहसुन कहां से आ रहा है।
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सब्जी विक्रेताओं से बातचीत
सब्जी विक्रेता रोहित ने बताया कि चमकदार लहसुन बाहर से आता है। इसकी एटा, घिरोर व भोगांव प्रमुख मंडी हैं। जिले की अर्रापहापुर मंडी में कभी-कभी आता है। यह लहसुन 250 से 300 रुपये किलो थोक में मिलता है। दुकान पर फुटकर में 350 से 400 रुपये किलो बिकता है। कुछ अन्य सब्जी विक्रेताओं ने भी कुछ ऐसी ही जानकारी दी, लेकिन उन्हें भी यह नहीं पता है कि लहसुन कहां से आ रहा है।
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इनकी भी सुनें
सातनपुर मंडी की उपमंडी अर्रा पहाड़पुर मंडी सहायक अभय प्रताप ने बताया कि लहसुन बेचने किसान ही आते हैं। औसतन आठ से 10 क्विंटल लहसुन रोजाना बिकता है। कोई व्यापारी लहसुन लेकर नहीं आता। इसी वजह से मंडी शुल्क की रसीद भी नहीं कटती है। कायमगंज मंडी सचिव नागेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन करीब आठ से 10 क्विंटल लहसुन स्थानीय किसान लेकर आते हैं। बाहरी लहसुन की बिक्री प्रमुख रूप से घिरोर, एटा व भोगांव मंडी में होती है।
सेहत के लिए घातक है चाइनीज लहसुन
यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के लहसुन पर कई देशों ने बैन लगा दिया है। चाइनीज लहसुन में जिंक व आर्सेनिक जैसी हानिकारक धातुएं होती हैं, जो कैंसर का कारण हैं। इसी वजह से भारत में चीनी लहसुन पर वर्ष 2014 से प्रतिबंध लगा है। यह लहसुन खाने से पेट की बीमारियां जैसे अल्सर, इन्फेक्शन के अलावा किडनी को नुकसान हो सकते हैं। चाइनीज़ लहसुन में फंगस होने से गंभीर बीमारियां पनपती हैं। कीड़ों से बचाने के लिए मेथाइल ब्रोमाइड का इस्तेमाल किया जाता है। फ़्रुक्टोज़ की मात्रा अधिक होने से गैस हो सकती है। इसे खाने से पेट में सूजन, गैस्ट्राइटिस, अल्सर और इंफ़ेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कोई अधिकारी नहीं दे रहा ध्यान
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त खाद्य अजीत कुमार ने बताया कि किसान का उत्पाद होने से वह लहसुन का नमूना नहीं ले सकते। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह का कहना है कि लहसुन सब्जी में शामिल है। इससे जिला आलू विकास अधिकारी को ही पूरी जानकारी होगी। जिला आलू विकास एवं शाकभाजी अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि चाइनीज लहसुन का नमूना लेने या जांच कराने के संबंध में उन्हें न तो कोई आदेश मिला है और न ही इसकी जानकारी है।