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Farrukhabad News: एसडीओ, जेई, ठेकेदार व ड्रिलिंग मशीन मालिक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
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फर्रुखाबाद। रेलवे से अनुमति लिए बिना मई में बढ़पुर हिंदुस्तान होटल के पीछे रेल लाइन के नीचे से 33 केवी केबल निकालने के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एसडीओ, जेई, ठेकेदार व ड्रिलिंग मशीन मालिक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। विद्युत निगम के जिम्मेदार सेटिंग बैठाने में नाकाम रहे। अब रेलवे कोर्ट में मामला चलेगा।
बढ़पुर में रेलवे लाइन के नीचे से निकाली गई 33 केवी केबल में 17 मई की रात फाल्ट होने से लकूला, ठंडी सड़क और राजेपुर क्षेत्र के चार उपकेंद्र की बिजली ठप हो गई थी। विद्युत निगम ने रेलवे की बिना अनुमति लिए बिना हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (एचडीडी) मशीन से ड्रिलिंग करके पुरानी केबल के पास ही दूसरी केबल निकाल दी। इस काम में 24 घंटे से अधिक का समय लगा था।
इसकी किसी रेल अधिकारी को भनक तक नहीं लगी। अमर उजाला ने 19 मई के अंक में ठेकेदार ने गुल की 300 गांवों की बिजली, 20 मई के अंक में रेलवे पटरी के नीचे केबल डालने से 300 गांवों में बिजली गुल होने की जांच शुरू... खबरें प्रमुखता से प्रकाशित कीं। इसके बाद रेलवे के वरिष्ठ सहायक मंडल इंजीनियर सुयश द्विवेदी हरकत में आए। उन्होंने अधिकारियों की टीम बनाई, तो बिजली विभाग की मनमानी उजागर हो गई।
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रेलवे के अधिकारी दो दिन तक मामले को दबाए रहे। इसके बाद 20 मई को सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) जहीर अहमद खान की तहरीर पर आरपीएफ थाने में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारी व ठेकेदार पर प्राथमिकी लिखाई गई थी। केबल डालने की कोई अनुमति न लेने की बात भी सामने आई।
रेलवे संरक्षा नियमों का उल्लंघन, पटरी बैठने, संचार संसाधनों में सिग्नल व टेलीकॉम की क्षति होना संभावित होना पाया गया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर ओपी मीना ने बुधवार को आरोपपत्र रेलवे कोर्ट में दाखिल किया। बताया कि आरोप पत्र में एसडीओ रामप्रवेश, जेई लकूला अजय कुमार सिंह, ठेकेदार संदीप कुमार गंगवार और हाइड्रा मशीन के मालिक व चालक अमित कुमार को शामिल किया गया है।
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रेलवे के जिम्मेदारों को दी गई राहत :
आरपीएफ ने जब मामले जांच की तो रेलवे के जिम्मेदार अफसरों को पूरी तरह से बरी कर दिया, जबकि चंद किमी दूरी होने के बावजूद किसी अधिकारी को जानकारी न होना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।
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बढ़पुर में रेलवे लाइन के नीचे से निकाली गई 33 केवी केबल में 17 मई की रात फाल्ट होने से लकूला, ठंडी सड़क और राजेपुर क्षेत्र के चार उपकेंद्र की बिजली ठप हो गई थी। विद्युत निगम ने रेलवे की बिना अनुमति लिए बिना हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (एचडीडी) मशीन से ड्रिलिंग करके पुरानी केबल के पास ही दूसरी केबल निकाल दी। इस काम में 24 घंटे से अधिक का समय लगा था।
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इसकी किसी रेल अधिकारी को भनक तक नहीं लगी। अमर उजाला ने 19 मई के अंक में ठेकेदार ने गुल की 300 गांवों की बिजली, 20 मई के अंक में रेलवे पटरी के नीचे केबल डालने से 300 गांवों में बिजली गुल होने की जांच शुरू... खबरें प्रमुखता से प्रकाशित कीं। इसके बाद रेलवे के वरिष्ठ सहायक मंडल इंजीनियर सुयश द्विवेदी हरकत में आए। उन्होंने अधिकारियों की टीम बनाई, तो बिजली विभाग की मनमानी उजागर हो गई।
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रेलवे के अधिकारी दो दिन तक मामले को दबाए रहे। इसके बाद 20 मई को सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) जहीर अहमद खान की तहरीर पर आरपीएफ थाने में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारी व ठेकेदार पर प्राथमिकी लिखाई गई थी। केबल डालने की कोई अनुमति न लेने की बात भी सामने आई।
रेलवे संरक्षा नियमों का उल्लंघन, पटरी बैठने, संचार संसाधनों में सिग्नल व टेलीकॉम की क्षति होना संभावित होना पाया गया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर ओपी मीना ने बुधवार को आरोपपत्र रेलवे कोर्ट में दाखिल किया। बताया कि आरोप पत्र में एसडीओ रामप्रवेश, जेई लकूला अजय कुमार सिंह, ठेकेदार संदीप कुमार गंगवार और हाइड्रा मशीन के मालिक व चालक अमित कुमार को शामिल किया गया है।
रेलवे के जिम्मेदारों को दी गई राहत :
आरपीएफ ने जब मामले जांच की तो रेलवे के जिम्मेदार अफसरों को पूरी तरह से बरी कर दिया, जबकि चंद किमी दूरी होने के बावजूद किसी अधिकारी को जानकारी न होना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।