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भोलेनाथ के जलाभिषेक को रवाना कांवरिया
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sun, 15 Mar 2015 11:45 PM IST
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चैत्र मास की एकादशी को भोलेनाथ पर कांवर चढ़ाने के लिए रविवार को शहर से
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कांवरियाें का जत्था गोला गोकर्णनाथ रवाना हुआ। रविवार को जय भोले बाबा
कमेटी के पदाधिकारियों का जत्था भी भोलेनाथ के दर्शन करने को कांवर लेकर
रवाना हुआ। बैट्री चलित एलईडी लाइटों से कांवर को भव्य रूप दिया गया। घरों
में पूजन के बाद कांवर को पांडवेश्वरनाथ मंदिर ले जाया गया। यहां पूजन
अर्चन के बाद मठिया देवी और बढ़पुर स्थित शीतला देवी मंदिर में पूजन किया
गया। इसके बाद
कांवरिया कांवर लेकर बम भोले, भोलेनाथ की जय के उद्घोष के साथ निकले। कंावरियों की यात्रा के आगे डीजे पर बज रहे शिव भजनों से माहौल भक्ति मय हो गया। आगे आगे डीजे और पीछे से झूमते कांवरियों का जत्था जल भरने को पांचालघाट पर पहुंचा। यहां स्नान आदि कर कांवर में जल भरकर भगवान रुद्ध का जलाभिषेक करने के लिए कांवरिया लखीमपुर खीरी स्थित गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना हुए। भोले बाबा कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद दुबे ने बताया कि होली के बाद चैत्र मास की
एकादशी व तेरस को भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का खास महत्व है। कांवर लेकर जाने वालों में सुशील गुप्ता, दिलीप दुबे, कल्लू गुप्ता, राममोहन शुक्ला, विपिन बाजपेई, पुन्नू बाजपेई, लव गुप्ता आदि थे। कायमगंज प्रतिनिधि के अनुसार चैत मास की शिवतेरस पर कांवर लेकर गोला गोकर्णनाथ जाने की परंपरा पुरानी है। इसके तहत शिव भक्त आलीशान कांवर सजाकर भोले को
मनाने गोला तक पैदल जाते हैं। कुछ समय पहले तक अधिकांश भक्त पैदल और साइकिलों से गोला तक का सफर तय किया करते थे। अब साइकिलों की जगह मोटर साइकिलों, छोटा हाथी और ट्रकों ने ले ली है। घटियाघाट गंगा तट से जल भर कर कांवरियों के जत्थे गोला को रवाना हो चले हैं। गाजे बाजों और भोले के जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान हो गया है।
कांवरिया कांवर लेकर बम भोले, भोलेनाथ की जय के उद्घोष के साथ निकले। कंावरियों की यात्रा के आगे डीजे पर बज रहे शिव भजनों से माहौल भक्ति मय हो गया। आगे आगे डीजे और पीछे से झूमते कांवरियों का जत्था जल भरने को पांचालघाट पर पहुंचा। यहां स्नान आदि कर कांवर में जल भरकर भगवान रुद्ध का जलाभिषेक करने के लिए कांवरिया लखीमपुर खीरी स्थित गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना हुए। भोले बाबा कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद दुबे ने बताया कि होली के बाद चैत्र मास की
एकादशी व तेरस को भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का खास महत्व है। कांवर लेकर जाने वालों में सुशील गुप्ता, दिलीप दुबे, कल्लू गुप्ता, राममोहन शुक्ला, विपिन बाजपेई, पुन्नू बाजपेई, लव गुप्ता आदि थे। कायमगंज प्रतिनिधि के अनुसार चैत मास की शिवतेरस पर कांवर लेकर गोला गोकर्णनाथ जाने की परंपरा पुरानी है। इसके तहत शिव भक्त आलीशान कांवर सजाकर भोले को
मनाने गोला तक पैदल जाते हैं। कुछ समय पहले तक अधिकांश भक्त पैदल और साइकिलों से गोला तक का सफर तय किया करते थे। अब साइकिलों की जगह मोटर साइकिलों, छोटा हाथी और ट्रकों ने ले ली है। घटियाघाट गंगा तट से जल भर कर कांवरियों के जत्थे गोला को रवाना हो चले हैं। गाजे बाजों और भोले के जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान हो गया है।