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घूंघट की ओट, चकबंदी न कराए जाने को वोट

Fri, 16 Dec 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
अमर उजाला/फर्रुखाबाद Updated Fri, 16 Dec 2016 11:45 PM IST
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Behind the veil, consolidation Unless vot
घूंघट की ओट में हस्ताक्षर करती महिला। - फोटो : amarujala
 चकबंदी की खुली बैठक में घूंघट की ओट में महिलाओं ने वोट डाले। चकबंदी निरस्त करने के पक्ष में अधिक वोटिंग हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने लेखपाल और कानूनगो पर रुपये लेने के आरोप लगाया। चकबंदी के पक्ष में हस्ताक्षर करने वाली लिस्ट में सीरियल नंबर न डालने पर भी विरोध जताया। एसओसी ने कहा कि रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी जाएगी।
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विकास खंड कमालगंज के प्राथमिक विद्यालय बहोरा में शुक्रवार को चकबंदी की खुली बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एसओसी रामकिशोर ने दो लाइनें लगवाईं, जिसमें एक लाइन में चकबंदी के पक्ष में हस्ताक्षर कराए गए, जबकि दूसरी लाइन में चकबंदी निरस्त करन के पक्ष में हस्ताक्षर करवाए गए।
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गांव की मांती और रमा देवी ने चकबंदी न किए जाने के पक्ष में हस्ताक्षर किए। पूछने पर मांती ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं हैं कि हस्ताक्षर किसलिए कराए गए हैं। रमा देवी ने बताया कि उसके पास पट्टे की कुछ जमीन थी। तत्कालीन लेखपाल बेटालाल और कानूनगो ने जमीन गांव से लगभग तीन-चार किलोमीटर दूर छछौनापुर में निकाली।
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आरोप है कि काफी आरजू मिन्नत करने के बाद एक हजार रुपये लेकर लेखपाल ने आश्वासन दिया कि उनकी जमीन गांव में नपवा दी जाएगी। रमा देवी ने आरोप लगाया कि रुपये लेने के बाद भी उनकी जमीन का कोई निर्णय नहीं हुआ। गांव के ही लालसहाय का कहना है कि उनकी 13 बीघा जमीन को नौ बीघा नाप दिया गया है।

इसमें नाला भी शामिल कर दिया गया है। गांव के लाखन सिंह का कहना है कि उनकी पौने दो बीघा जमीन नाप के दौरान पड़ोस के गांव छछौनापुर में जोड़ दी गई। कालीचरन का कहना है कि उनकी 240 एअर जमीन है लेकिन लेखपाल और कानूनगो ने 116 एअर ही जमीन नापी है। उनका कहना है कि नाप सही कराने के लिए लेखपाल ने उससे 10 हजार रुपये की मांग की थी लेकिन पैसे न देने पर जमीन कम नापी है। गांव के ही श्रीराम ने बताया कि बिना खतौनी देखे ही हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं।

गांव के प्रधान दबंग प्रवृत्ति के हैं। इस दौरान चकबंदी कराए जाने के पक्ष में 124 लोगों हस्ताक्षर के जरिए वोट किया, जबकि चकबंदी न कराए जाने के पक्ष में 151 लोगों ने हस्ताक्षर के जरिए वोट किए। एसओसी रामकिशोर ने बताया कि हस्ताक्षर सूचियों की जांच के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।


उधर लेखपाल बेटालाल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा लगाए आरोप निराधार हैं। इस मौके पर एसीओ मेड़ीलाल, राधेश्याम, इंद्रेश पांडेय, लेखपाल यूनुस और कानूनगो अतर सिंह के साथ जहानगंज थाना पुलिस मौजूद रही।
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